Kishan Kumar   (📝KishaN)
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Joined 18 June 2019


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Joined 18 June 2019
11 SEP AT 17:00

जब से देखा है तुझे नजाकत सी इन आँखों को लगी है तू
हर धड़कन में मेहसूस करता हूँ मेरे सांसो में ऐसे बसी है तू
ख्वाबों में भी तुझे देख नशा छाता है इतनी दिल-नशीं है तू
ग़म की बिसात ही क्या जो ठहरे इस चेहरे पे
तेरे दीदार पे मरता भी मुस्कुरा जाऊँ ऐसी खुशगवार हंसी है तू

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8 SEP AT 18:50

दवा से ज्यादा तेरी बातें मुझपे असर करती है
सिर्फ दिल और दिमाग नहीं तू रग रग में बसर करती है
कल ही तो मिले थे पर लगता है जैसे तू मुझमें सदियों से सफर करती है

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5 SEP AT 14:52

ख्वाबों ख्यालों में तेरी आहट है
जुबां पे तेरे नाम की इबादत है
सोचता मैं तुझे लिखता भी तुझे
मेरे शब्द भी तू, तू ही मेरी आयत है
तू ही दिल की सुकूं तू ही राहत है
ईन नजरों को पढ़ के तो देखो ज़रा
इनमें भी बसी तू बनकर इनायत है

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2 SEP AT 15:44

देख कर तुझे मेरी नजरें प्यासी हो गई है
सोती जागती रातों में तेरे मौजूदगी से
मेरे मामूली से सपने आकाशी हो गई है
मीलों की दूरी में तुझ संग दिल्लगी से
मन बहती गंगा और दिल काशी हो गई है

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30 AUG AT 13:30


कभी ग्वाला कभी मुरलीधर पर अपराजित सुदर्शन चक्र धारी भी वो है
कृपालु दयालू और हर जगह विधमान वासुदेव, द्रोपदी का साड़ी भी वो है
इंद्र का घमंड तोड़ने कनिष्ठा ऊंगली पे गोवर्धन उठाने वाला गिरिधारी भी वो है
कभी नटखट कभी माखनचोर पर गीता का उपदेश देने वाला सर्वज्ञानी भी वो है
पल में महाभारत का युद्ध खत्म कर सकता था
पर धर्म और कर्म का बोध कराने को सारथी बन चलाता अर्जुन का गाड़ी भी वो है
प्यारा गोपाला, मनोहर नंदलाला पर दुष्टों का संहारकर्ता मधुसूदन और मुरारी भी वो है

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15 AUG AT 16:48



इतिहास बदलकर संस्कृति मिटाकर तुम्हें कहलाना उदारवादी है

370 हटाना तुम्हें पसंद न आया क्यूँ..क्यूँकी तुम्हें घर में पालना जिहादी है

सत्ता की लालच में देश बांटा, इमर्जेंसी लगायी फिर भी कहलाना गाँधीवादी है

नेतागीरी चमकाने को देश के पैसों से पढ़कर देश के खिलाफ़ करना नारेबाजी है

पिछड़ी शिक्षा ना जरूरतें कर पाते पूरी फिर भी सबकुछ दरकिनार कर सिर्फ बढ़ाना आबादी है

दूसरा जीते तो लोकतंत्र ख़तरे में दिखता है पर ख़ुद के परिवार से वर्षो से निकल रहा शहजादा और शहजादी है

तुम परजीवी आंदोलनजीवी तुमको अलोकतांत्रिक आंदोलन की आर में देश बांटना और करना देश के स्वाभिमान की बर्बादी है

देश से हमेशा सिर्फ अपने अधिकारों की माँग करने वालों क्यूँ कभी जुबां से निकलती नहीं देश के लिए अपने कर्तव्यों की वाणी है

झाड़ू लेकर तुम चले थे देश साफ़ करने पर सत्ता की लालच में इतना ज़मीर गिरा लिया कि ख़ुद के पार्टी से आए दिन निकलता आतंकवादी है

आरक्षण से तकलीफ बहुत है लेकिन तब नहीं सोचते कि दूसरों को निचा दिखाने सरनेम वाला टैग दिखाकर धौंस जमाना कितना जातिवादी है

विदेशों में देश का मान बढ़ाया बखूबी सुरक्षा में शान बढ़ाया पर अच्छे दिन के ख्वाब दिखाने वाले तुमनें भी तो देश में फैला दी बेतहासा बेरोजगारी है

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11 AUG AT 18:51

राज़ बोल बोलकर राज़ की बात सबको बता देते हैं
सामने गले लगाकर पीठ पीछे नज़रों मे गिरा देते हैं
ये कलयुग हैं जनाब यहां करने से ज्यादा जता देते हैं

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7 AUG AT 19:35

हमदम साथ हो तो हर साजिश नाकाम करता हूँ
दोस्ती हो या प्यार,..ग़र हैं तो खुलेआम करता हूँ

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7 AUG AT 17:54

तेरे रूह में लेना मुझे पनाह है
ये जुर्म चाहें कितना संगीन हो
बस तेरे बाहों में रहने की चाह है
ताकि अपना हर शाम हसीन हो

नशा ऐसा भरा हो निगाह में
हम ताउम्र एक दूसरे के शौकीन हो
मनचाहा रंग भरे हो हर राह में
जिंदगी तेरे संग कुछ यूं रंगीन हो

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4 AUG AT 14:27

तेरा इश्क यूं लाल चढ़ रहा
हम ढ़लती शाम सा सिंदूरी हो रहे
रोम-रोम तेरी खूशबू का जतन कर रहा
तुम साँसों में कस्तूरी बो रहे

हलचलें दिल में पल-पल बढ़ रहा
तुम धड़कनों सा जरूरी हो रहे
ये इश्क धीरे-धीरे परवान चढ़ रहा
तेरे इश्क़ में हम फितूरी हो रहे

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