Kishan Kumar   (📝KishaN)
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Joined 18 June 2019


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Joined 18 June 2019
11 APR AT 16:35

उसने पूरा महफ़िल जमा होने दिया मुझे छोड़ने के लिए
मुझे थोड़ा थोड़ा जोड़ा, एक झटके में तोड़ने के लिए💔

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2 APR AT 22:53

जहां दिल ठहरना चाहें, हां तू ही वो किनारा हैं
सारा जग फिजूल लगे, तू ही लगता जग सारा हैं
तू ही दिन का उजाला, तू ही चांद और तू ही मेरी रात का सितारा हैं
☀️🌝⭐

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30 MAR AT 16:46

......

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10 MAR AT 10:59

मैं ख़ुद नहीं समझ पा रहा हाल अपना तो मैं क्या बताऊं किसी को हाल अपना
तेरे चले जानें से मुझमें गर मैं बचा रहता......तब रखता न मैं ख्याल अपना💔

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9 MAR AT 19:19

परिवार समाज सगे संबंधी प्रेम-विरोधी हैं
इनको क्या पता होता हैं प्रेम में प्रेमी "युगल योगी" हैं
तबाह कर जाते हैं जिंदगियों को, इनको नहीं समझता
...जात-धर्म रूतवा-पैसा रूप-स्वरुप...
प्रेम में नहीं कोई इसका भोगी हैं

❣️प्रेम खुद ही एक श्रेष्ठ धर्म हैं❣️

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9 MAR AT 14:47

किस किस को क्या बतलाऊ की क्यों चेहरे पे मातम छाया हैं
सपनों का क्या करूं जो आज रात को भी तेरे संग आया हैं
💔 टूटा दिल दिखता नहीं किसी को💔
पर आंसुओ का क्या करू जो निरंतर सैलाब सा बह आया हैं

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7 MAR AT 21:41

मैं उसके गले लग कर रो रहा था उसने एक आह भी न भरी थी
प्यार भी शर्मसार था देखकर की
मैं तिल तिल मरता जा रहा था और वो मुंह घुमाकर निकल पड़ी थी

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7 MAR AT 12:02

कहती थी की तेरे लिए दुनिया भी बेगानी हैं
अब लगा फांसने को बुनती हर दिन एक कहानी है
मन करता है उसे बेवफ़ा धोखेबाज हरजाई कह दूं
फिर सोचा नहीं रूह बेच लेने वाले के लिए क्यूं करनी इन शब्दों की बदनामी हैं

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30 AUG 2022 AT 20:51

हर चीज़ में कमी खलता देख रहा हूं
यहां जैसा आजतक सबको पाया
उनको भी पल पल बदलता देख रहा हूं
मतलब क्या समझूँ इन घटती रोशनी का
क्या सांझ का सूरज ढ़लता देख रहा हूं

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23 AUG 2022 AT 18:07

दिल में बसने वाले दिल दुखा गए कुछ ऐसी बात हों गई
हम ख़ामोश बैठे रहे खिड़की तले उनकी यादों में
पता नहीं सामने से कब दिन निकला कब रात हो गई
आँखें भर आई की कितना फर्क हैं उनके वादों और इरादों में
पर ऊपरवाला मेहरबां निकला आँखें नम हुई तो बरसात हों गई

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