Khwahish Shah   (Khwahish shah)
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Joined 29 August 2018


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Khwahish Shah 3 AUG AT 21:50

कुछ हाथों की पकड़
वक़्त के साथ
बस मजबूत
होती चली जाती हैं
क्योंकि वो हाथ
हमारा ईश्वर
हमें थमा जाता हैं ..
भाई के तौर पे ..
और हम बहने
ईश्वर के दिए सबसे
मजबूत हाथ को
एक कच्चे धागे से
हमेशा हमेशा
के लिए अपने
स्नेह से बांध लेती हैं !!

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Khwahish Shah 30 JUL AT 17:19


जैसे मेरे शिव के
अश्रु से उपजे ये
रुद्राक्ष हाँ यहीं
जो तुमनेअपने
हाथों में धारण
कर रखें हैं....
(अनुशीर्षक में पढ़े )

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Khwahish Shah 28 JUL AT 17:59

शिव रूठे हो
तो सावन जल नहीं
देह से अग्नि बन
लिपटती हैं
हर बूंद स्मृतियों पे
पड़े परत दर परत
को धुलती गिरती हैं
उम्मीद की
मृत मछरियां भी
जीवित होने को
तड़फड़ाती रहती है
(आगे अनुशीर्षक में ..)

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Khwahish Shah 27 JUL AT 18:47

कभी कभी
तुम्हारा ना होना
मेरे होने पे इस हद तक
हावी हो जाता हैं
कि मुझे मेरा होना महज
एक वहम भर लगता हैं
पूरे दिन जबां से
सारी बातें गैरों से
कह लेने के बाद
ना जाने कितने
नाम पुकार लेने
के बाद भी
बस एक तुम्हारा
नाम ना पुकार पाना
मुझें मेरी जिव्हा
के होने का
अपराध बोध कराता हैं !

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Khwahish Shah 15 JUL AT 9:59

प्रेम_प्रश्न ...?
(अनुशीर्षक में पढ़े ..)

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Khwahish Shah 14 JUL AT 8:53

____

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Khwahish Shah 13 JUL AT 8:27

~बिल्व पत्र~
___________
तुम्हारा मुझसे किनारा
कर लेने, और मेरा
खुद को विरह में
डुबो लेने के पश्चात भी
तुम्हारे प्रेम स्मृतियों को
मेरा मेरे ह्रदय में
रख लेना
बिल्कुल वैसा ही हैं जैसा
तुम्हारा अपने ईश्वर की
मूर्ति को विसर्जित करके
लौटते वक़्त
उनके चरणों से उठा कर
बिल्व पत्र का अपने
हाथों में रख लेना !!
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Khwahish Shah 9 JUL AT 18:02

मृत्यु प्रतीक्षा ...
(अनुशीर्षक में पढ़े )

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Khwahish Shah 8 JUL AT 18:14

मेरा प्रेम लिखना
तुम्हे प्रेम की अनुभूति
कराता हो तो,
सुनो ,तुम प्रेम में हो

और
मेरा विरह लिखना
गर तुम्हारे ह्रदय में
वेदना की अनुभूति
कराता हो तो,
सुनो , तुम प्रेम में नहीं

बल्कि...प्रेम तुममें हैं ..!

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Khwahish Shah 1 JUL AT 19:47

शाम को यूँही आसमाँ
को देख आया ख्याल ..

(अनुशीर्षक में पढ़े )

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