Khwahish Shah   (Khwahish shah)
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Joined 29 August 2018


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26 FEB AT 19:31

दुनिया के दो अलग अलग
कोनो में बैठे जब
हम तुम साथ साथ
एक दूसरे को सोच रहें होंगे
तब हिचकियाँ लेते हुए
हम पुकारेंगे एक दूजे का नाम
ढूँढेगे होने के अहसास को आसपास
और ना पाकर घबराकर
मूंद लेंगे अपनी अपनी आँखें
और बहेंगे साथ साथ...!

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22 FEB AT 19:27

🎂बधाई के कुछ शब्दभर.....🖋️

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20 FEB AT 19:04

जानती हूँ ...तुम सदैव के लिए मेरे पास नहीं रहोगे
तुम्हारा जाना नियति हैं ..और मैं तुम्हे रोकूँगी भी नहीं
प्रेम रोड़े अटकाना नहीं जानता ...प्रेम तो रास्ते बनाता हैं
और मुझे यकीं हैं कि प्रेम एक दिन दुनिया के सारे
रास्तो से होते हुए मुझे तुमतक और तुम्हे मुझतक ले ही आएगा ...!

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7 FEB AT 8:38

प्रेम की डाल पे
मुरझा गए हैं सुख के गुलाब
और
उग आए हैं दुःख के कांटे

मैं कांटो को चुनती हूँ
बिनती हूँ उसे देह पे
और सींचती हूँ
प्रेम को लहू से ...!

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24 JAN AT 22:20

तुम्हें जानकर
मैने जाना

मेरी खिलती मुस्कान
तुम्हारी उँगलियों से मेरे चेहरे पे उतारी गयी
कोई कविता हैं

कि कैसे कोई नम शिथिल तुम सा लड़का
प्रेम को दृढ़ता से
खुद को मेरी हथेलियों में सौंपता हैं

हाँ और ये भी कि
तुम्हारें होठों पे रखा मौन
इस शोर करती दुनिया का
विलोम और प्रेम का पर्यायवाची हैं

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14 JAN AT 22:34

कुछ किताबें भरे पड़े होते हैं
अनसुलझे सवालों से
पर उनका
हर एक पन्ना
हर एक पंक्ति
आपसे सौ सवाल नहीं करेंगे
बल्कि
आपके सवालों को हल दे जायेंगे .

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11 JAN AT 18:41

तुमसे बात करते हुए...

(अनुशीर्षक में पढ़े ..)

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9 JAN AT 17:26

तुमसे कहना कठिन हैं
और चुप रहना बहुत कठिन

ये दो विकल्प हैं प्रेम में
एक ही बात के लिए ...।

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23 DEC 2020 AT 18:54

तुम्हारा प्रेम स्वीकार्य था ...
(अनुशीर्षक में पढ़े )

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12 DEC 2020 AT 7:40

....

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