Khushi Zone 💫   (Khushi Pandey)
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Joined 8 July 2020


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Joined 8 July 2020
15 JAN AT 1:37

बंद आँखों पर मेरी,ये फक्त थकावट का किरदार है
"माँ" नीन्दों से मेरी...तेरी कितनी-ही लोरियाँ उधार हैं!

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30 DEC 2021 AT 4:32

जर्जर से पन्ने पलटने की हासिल वजह एक हो तुम,
मेरी रद्दी सी जिंदगी का 'एक पन्ना सुलेख' हो तुम...!

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24 DEC 2021 AT 22:32


इन बेमतलब की दूरियों पर मुहर हदों की ना होती,
करते जो मोहब्बत हम भी मोहब्बत के सलीके से...!

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7 DEC 2021 AT 2:38

धड़कनों को बेताबी से जो तुम बाँध रहे हो,
जान लो जंजीरे इश्क की कब सुलझी हैं,

इंतजार अगर गिरफ्त का है तुम्हे तो
मेरी "हाँ" तेरी शोखियों से जा उलझी है!

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6 DEC 2021 AT 23:22

तू सुनता रहे और मैं कहती रहूँ,
तरीका है मेरा इश्क़ जताने का,
यार समझते हो जिसे तुम ग़ज़ल
असल में जुगाड़ है तुमसे बतियाने का!

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5 DEC 2021 AT 20:33

सहजता दिखी उन आँखों में
जिन्होंने प्रेम को
भौतिकता से बांध रखा है,

इस बीच मैंने...
प्रेम को आघातित पाया!

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9 NOV 2021 AT 1:17

दूरियां ये ढ़ल जाने दो
क्यूँ रास्तों से
उलझ रहे हो,
सर्द मौसम है
कुल्हड़ चाय की है
मैं कुछ और कहूँ...
या तुम समझ रहे हो!

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6 NOV 2021 AT 14:05

झुँका सा आँचल माथे पर सिलवटें
बात मेरी जान पर बन आती है,
भीगकर बारिश में....जब वो
किरदार खुद बारिश सा निभाती है !

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22 OCT 2021 AT 18:27

समाज ऐसी....
गहराइयों में दबा हुआ है,
जहाँ से उसे
भीतर के दरवाजों में भी
दहलीज दिखती है....!

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4 OCT 2021 AT 3:47



कि रंग दुपट्टे का उसे पसंद आ गया है,
सुना ख्वाबों ने "इश्क और धागे" की गुफ्तगू में!

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