Khan Tabassum   (K^T_Writer)
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Joined 23 February 2019


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Khan Tabassum 13 FEB AT 22:41

मुझे तुम्हारा साथ ज़िन्दगी भर नही चाहिए।

बल्कि जब तक तुम हो, तब तक ज़िन्दगी चाहिए।

#Valentine❣️

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Khan Tabassum 3 FEB AT 22:53

पल यूँ पल में बदल तो न जाओगे?
चाह कर भी उस पल में तुम दूर तो न जाओगे?

अगर खामोश रहू उस पल में भी में तो,
मेरी खामोशी से यूँ खेल तो न जाओगे?

बस एक बार बता दो उस पल में
तुम यूँ बदल न जाओगे?



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उस पल में ,🌸

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Khan Tabassum 4 JAN AT 14:07

सबके साथ हूं, पर अकेली हूं इस पल,
कहने को बहुत है, पर लब्ज नहीं इस पल,
अंधेरा बहुत है, पर ख्वाबों मे रोशन हैं ख़्वाब इस पल,
रास्ते बहुत है, पर चलू कैसे इस पल,
लिखना आता नहीं, पर लिख रही हूं इस पल ।

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💗

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Khan Tabassum 1 JAN AT 14:17

"2020" सिर्फ और सिर्फ 'Youth'के लिए है..
क्योंकि इसमें आगे भी 20 और पीछे भी 20 है 😂😂😂

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Khan Tabassum 31 DEC 2019 AT 23:03

साल की शरुवात कुछ कदर हुई..
लड़ाईया हमारी बेशुमार हुई।

दूरिया हर बार नज़दीकियों में तबदिल हुई।
वक़्त ठहरा बीते लम्हे फिर से याद आये ।

शायद एक बार फिर से हम करीब आये
एक दूसरे के गम में फिर से कम आये
खुशयो में एक दूसरे के साथ खिलखिलाए

महीने बीते साल फिर से यूही खत्म हुआ।
फिर से इस दोस्ती का नया जन्म हुआ ।

नए साल में पुरानी यादो लेकर , एक बार फिर से निकले हैं।
सफर ये कभी खत्म न हो इस उम्मीद से हम उतरे है।

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💗

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Khan Tabassum 31 DEC 2019 AT 23:01

नये साल के साथ कुछ इस कदर जोश में आयेगे....
एक बार फिर से आशा की एक नई किरण जलाएंगे...

चलता रहेगा सिलसिला ये राही ज़िन्दगी का,
कोई तो साल ऐसा भी आएगा जब हम भी बुलंदी पर जाएंगे .....
चलो ! एक बार फिर से आशा की नई किरण जलायेगे...

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Khan Tabassum 31 DEC 2019 AT 22:59

नये साल की शरुआत कुछ इस कदर करते है ।
हमसफ़र न सही,,,,
पर दोस्ती तो गहरी रखते है....!!

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Khan Tabassum 31 DEC 2019 AT 20:12

नये साल की शरुआत कुछ इस कदर करते है ।
हमसफ़र न सही,,,,
पर दोस्ती तो गहरी रखते है....!!

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Khan Tabassum 28 DEC 2019 AT 13:53

काश ये पल कभी खत्म न हो
तुम ओर मैं कभी दूर न हो।

यूँ ही रहे हर पल साथ इस कदर
के पल ये कभी खत्म न हो ।

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Khan Tabassum 26 DEC 2019 AT 23:08

गुमनाम ही सही पर खामोश बैठी हूँ।
खुवाबो में उसकी, कुछ यादे लिए हुए बैठी हूँ।

कहना चाहती हूँ अक्सर कुछ ,
मगर फिर भी यू चुप सी हो जाती हूँ ।

बातो में अक्सर उसकी मसरूफ हो जाती हूं
शायद ,इसलिए चाह कर भी कुछ न कह पाती हूँ।

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