Kanksha Gupta   (कांक्षा _की_आकांक्षाएँ)
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Joined 12 November 2016


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18 JUL AT 16:03

कहानियाँ ख़त्म हो जाती हैं कहानियों में दब के
रिश्ते ख़त्म हो जाते हैं रिश्तों में पिस के
कदर नहीं करते जब सामने हो सवेरा
रौशनी मर जाती हैं रातों में घुट के

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15 JUL AT 23:01

Toot ke chaha bhi to kya chaha
Bikhar ke sameta bhi to kya sameta
Toot ke chaha bhi to kya chaha
Bikhar ke sameta bhi to kya sameta
Tumne uske lie jeena chhod dia aur use tumhari mohabbat ki bhanak bhi na hui
Tu aise toota bhi to kya toota

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14 JUL AT 14:47

Too many lights, but still feel dark?
The lights outside cannot remove the darkness inside

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14 JUN AT 23:40

Everyone knows a story about you
Which may not be known to others
You are evil to some and a blessing to others
Neither the good, nor the bad makes you
What makes you is what you know about yourself
Don't let the praise become your pride nor let the criticism sink you
Believe in who you are and grow with your own learnings
Other people's experiences will give you lessons but your own experiences will give you teachings

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7 JUN AT 15:15

वो खुदा भी ज़िन्दगी दे कर वापस ले लेता है
और तुम चाहते हो इंसान मोहबत दे कर मोहबत भी न मांगे??

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4 JUN AT 19:19

वो अंधेरों में जिन्हें ढूँढता रहा
वो सवेरे में उसका इंतजार कर रहे थे
उसे अधूरा छोड़,
वो उसके पूरा होने का इंतजार कर रहे थे
राहों में तनहा जब चल रहा था वो
तब यही लोग उसकी राहों में काँटे बिछा रहे थे
जरूरी नहीं वो बोले ना, तो उसे ज़रूरत नहीं
और सामने वाला भी हर बार ना समझे,
ये भी मुमकिन नहीं

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15 MAY AT 11:23

ऐ बंदेया तेरी कोई औकात नहीं
तू जिंदा है तो काम का
मर गया तो तेरी कोई बात नहीं
तू कर कर्म तेरा काम है ये
फल मिले न मिले वह तेरे बस की बात नहीं
ऐ बंदेया तू किसी के लिए धरती पर स्वर्ग बना दे
वो तब भी खुश नहीं तो इसमें दुखी होने की बात नहीं
तू तुच्छ प्राणि है तेरी कोई औकात नहीं
हर किसी को हर वक्त खुश रखना तेरे बस की बात नहीं

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21 APR AT 19:52

वो जो अक्सर हर शाम हमें याद किया करते थे
लगता है आज कल होश में रह रहे हैं

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20 APR AT 20:51

क्यों बातें करते हो मोहब्बत की
जब दोस्ती भी निभानी अभी तुम्हे आती नहीं
मुस्कुराहटें बाँटने की बातें करते हो
जब आँसू मिटाने अभी तुम्हे आते नहीं
मेरा हाथ क्यों थामना चाहते हो
जब साथ निभाना अभी तुम्हे आता नहीं
क्यों कहते हो मेरी खामोशियों को जानते हो
जब मेरे लफ़्ज़ों को भी अभी तुम पहचानते नहीं

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2 MAR AT 2:32

नशा भी क्या कमाल सा है उसकी मोहब्बत में
की उसके इश्क़ का ज़हर भी जाम सा लगता है

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