Kanksha Gupta   (कांक्षा _की_आकांक्षाएँ)
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Joined 12 November 2016


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3 HOURS AGO

वो शख्स भी कमाल करता है
वो मेरे सामने मेरी खूबियों की
और मेरे पीछे मेरी खामियों की बात करता है

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4 HOURS AGO

सूरत से ही तो रिश्ते बनते हैं
अगर सीरत से बनते होते तो
इन मुस्कुराते चहरों के पीछे गम न छुपा होता

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10 NOV AT 23:40

जो काँच की चूड़ियाँ बेचते हैं
कभी उन्हें वो चूड़ियाँ पहने नहीं देखा
जो सड़कों पे खिलौने बेचते हैं
उन्हें कभी उन खिलौनों से खेलते नहीं देखा
और तो और
जो खुदा सबको ज़िंदगी देता है
उसे कभी खुद जीते नहीं देखा
तभी सोचूँ
ये जो सबको खुशियाँ बाँटते हैं
उन्हें कभी खुश क्यों नहीं देखा?

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29 OCT AT 0:16

मैं रोज़ कुछ अल्फ़ाज़ परोस दूँगी
तुम मेरे अल्फ़ाज़ों से कोई नगम बना लेना
मैं तुम्हारी तारीफों से पन्ने भर दूँगी
तुम सिर्फ मेरे लिए एक गीत गुनगुना देना
मैं हमारी तस्वीरों से हमारा घर सजा दूँगी
तुम बस अपने हाथों से मेरी बिंदी ठीक कर देना
मैं तुम्हारे लिए हर शक़्स को भुला दूँगी
तुम मेरी भूल पे मुझे सीने से लगा लेना
सुनो, मैं रोज़ तुम्हारा पसन्दीदार खाना बना दूँगी
तुम बस मुझे अपनी आवाज़ में सिर्फ एक गीत सुना देना

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26 OCT AT 19:53

ये जो तुम बदले हो
ये उनके लौट आने पे बदले हो
या उनके लौट जाने तक बदले हो?

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26 OCT AT 19:15

जो लोग ज़िन्दगी बन जाते हैं
वो अक्सर ज़िन्दगी अकेले जीना सिखा जाते हैं

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26 OCT AT 14:30

ये जो नज़रों से गिरे हैं
इन्हें कहना संभल के उठें
मेरे विश्वास की खाई काफी गहरी थी

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24 OCT AT 0:52

पहली नहीं, मगर आखरी साँस हो तुम
पूरा जहाँ मैं पा लूँ, अगर मेरे साथ हो तुम
मेरा दिन मेरी रात मेरी हर बात हो तुम
सुनो
सिर्फ मोहब्बत नहीं,
मेरी ज़िन्दगी का सबसे कीमती एहसास हो तुम
खुदा से की मेरी हर दुआ हो तुम
पहली नहीं, मगर मेरी आखरी साँस हो तुम

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22 OCT AT 14:21

जानती हूँ तुझे मगर फिर भी तू कुछ अनजान सा लगता है
तेरा करीब होना भी कुछ बहुत दूर सा लगता है
मोहब्बत इश्क़ प्यार ये सब तो शब्द रह गए हैं बस
तेरा मेरे साथ होना अब कुछ बुरे ख्वाब सा लगता है
दिल तो बेशक बहुत भरा है मगर मेरी रूह को अब कुछ शमशान सा लगता है
अब तेरा मेरी ज़िन्दगी में होना न होना कुछ अमावस के चाँद सा लगता है

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21 OCT AT 22:12

वो कृष्ण समझे जो खुद को
मैं भी मामूली गोपी नही
राधा मीरा सब मैं हूँ
उसके लिए रुक्मणी भी

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