HR Kashyap   (Pahari Musafir)
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Joined 1 May 2020


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24 OCT AT 23:20

रिश्तो के बाजार में रिश्तो को कुछ
इस तरह सजाया जाता है,
ऊपर से तो बहुत अच्छा दिखाया जाता है,
पर अंदर न जाने क्या क्या मिलाया जाता है।

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21 OCT AT 21:01

देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब से,
चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से।

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15 OCT AT 10:56

अगर तुम सूरज की तरह चमकना चाहते हो
तो पहले सूरज की तरह जलो।

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6 OCT AT 21:00

घोलकर ज़हर खुद ही हवाओं में ...
हर शख्स मुंह छुपाए घूम रहा है ... ।।

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4 OCT AT 9:50

कागज़ की नाव और पीपल की छांव में ठहरा था
हम खुशनसीब थे जो बचपन गांव में गुज़रा था ।

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30 SEP AT 20:14

हर गली हर चोराहें में बेटियां लाचार है ...
कहां गये वो जो कहते थे कि हम भी चौकीदार है l

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25 SEP AT 20:32

फिक्र है सबको खुद को सही साबित करने की,
जैसे ये ज़िंदगी, ज़िंदगी नहीं, कोई इल्जाम है।

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18 SEP AT 20:49

कभी ख़िरद तो कभी दिवानगी ने लूट लिया,
क्या बताएं साहब तरह-तरह से हमें जिंदगी ने लूट लिया l

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16 SEP AT 14:46

ज़ब खामोश आँखों से बात होती है,
ऐसे ही मोहब्बत की शुरुआत होती है,
तुम्हारे ही खयालो में खोये रहते है,
पता नहीं कब दिन कब रात होती है.

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13 SEP AT 21:34

तू दूर है मुझसे और पास भी है,
तेरी कमी का एहसास भी है,
दोस्त तो हमारे लाखो है इस जहाँ में,
पर तू प्यारा भी है और खास भी है।

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