Haseeb zarish   (Zarish)
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Qarib-Qarib shayar, Urdu 💚
Joined 28 May 2018


Qarib-Qarib shayar, Urdu 💚
Joined 28 May 2018
9 MAR 2019 AT 20:22

उसे जाते देख आँखों में जो अटकी थी जान
उसने मुड़कर भी ना देखा के मेरा दम निकले

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23 JAN 2019 AT 20:12

वक़्त के साथ सारे दर्द हवा हो जाएंगे
ज़ख्म नासूर होकर खुद दवा हो जाएंगे
आसार-ए-सैलाब हैं उसकी नम आँखें
वो रो पड़ा तो कईं घर तबाह हो जाएंगे

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8 JAN 2019 AT 17:27

ये जो शोखियां पुर-ज़ोर चलीं आईं हैं
ख़ामोशियां बनके एक शोर चलीं आईं हैं
ढूंढ़ते-ढूंढ़ते तेरी पुरअसरार ज़ुल्फों को
"दिल्ली" की सर्दियां "बंगलौर" चलीं आईं हैं

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20 JUN 2019 AT 17:21

हम तुझको सामने बिठाकर एसे देखतें हैं
कोई बच्चा जैसे छत से चाँद देखता है

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21 MAY 2019 AT 20:20

वो जो राह तेरे घर को मोड दि मैंने
बे-दिली कि सारी रस्म तोड़ दि मैंने
अब तो मुझे छोड़ने कि बात ना कर
तेरे वास्ते सिगरेट भी छोड़ दि मैंने

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5 MAY 2019 AT 13:05

इस से बढ़के बाहारों का सुबूत क्या होगा
मैं ने देखा है अपने ज़ख्म का हरा होना

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21 APR 2019 AT 14:13

In dreams I saw you in someone's arms
My chest felt numb, with hooting alarms
The eyes are dry, it's the heart that weeps
It has been days, I am unable to sleep

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18 APR 2019 AT 9:55

शहर ए दिल के दो उम्मीदवार
एक तु है , एक तेरा इंतेज़ार
अजीब कश्मकश है मेरे यार
है दोनो ही पे तो जाँ-निसार
हो तुझ पर इनायतें बेशुमार्
तो खुद पर कयूँ ये अज़ाब करूँ
मैं किसका इंतेखाब करूँ
मैं किसका इंतेखाब करूँ

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11 APR 2019 AT 4:18

और कितने हैं तेरे राज़दारों में शामील
मुझे शब गए बस ये सवाल रेहता है
इसका ग़म नही हैं और तलबगार तेरे
मसअला ये है तुझे सबका खयाल रेहता है

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3 APR 2019 AT 20:59

वही मसअले, वही सानहे, वही इंतेज़ार
ना तुम आए,ना इश्क़ में इंकलाब आया

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