हुसन-ए-बहार
इश्क हैं बेशुमार,
यू अकेली ही गुजारी है
राते हजार,
न दिल है लगाना
न लगानी है उम्मीदें हजार,
आज अकेला हूं
नही तो कल तक था
इश्क में पागल यार,
अब न इश्क
न किसी से कोई लगाव,
छोटे छोटे पलो को जीना है
बनके एक आम जनाब।- Harshit.writes7
25 JUN 2021 AT 7:12