25 JUN 2021 AT 7:12

हुसन-ए-बहार
इश्क हैं बेशुमार,

यू अकेली ही गुजारी है
राते हजार,

न दिल है लगाना
न लगानी है उम्मीदें हजार,

आज अकेला हूं
नही तो कल तक था
इश्क में पागल यार,

अब न इश्क
न किसी से कोई लगाव,

छोटे छोटे पलो को जीना है
बनके एक आम जनाब।

- Harshit.writes7