Dveej Surti   (D. Y. Surti)
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Joined 4 October 2017


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Joined 4 October 2017
Dveej Surti 14 FEB AT 0:54

अल्फाजों को लकीरों में दफन ना किया करो,
कोरे रह जाते हैं वह खत जिन्हें अश्कों से लिखा जाता है।

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Dveej Surti 29 JAN AT 22:07

दृश्य

मैं जहाँ रुक जाऊँ,
वहाँ आसमान से समंदर बरसता है,

मैं जरा सर झुका दूँ,
तो पर्वत भी खुद को भगवान समझता है।

बड़ा अनजान है इश्क का मजहब,
जहाँ देखो किसी का दिल गिरा मिलता है,

अब कितना ढूँढोगे मेरी मोहब्बत का दृश्य,
जरा आईने में भी तो झाँको,
मेरे प्यार का मंझर दिखाई पड़ता है।

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Dveej Surti 16 JAN AT 2:05

दोस्त

मेले में मसखरा देखने क्यों जाऊँ,
जब बार-बार जिंदगी ही मेरे साथ मजाक करती हो,

मैं कैसे किसी पर भरोसा करूं,
जब मेरे दोस्त ही मुझसे झूठ बोलते हो।

मैं कैसे तनहा ना फिरु,
जब नए दोस्त के आ जाने के बाद,
लोग मुझसे नजरें ना मिलाते हो,

छोड़ो अब किससे शिकायत कर रहा हूँ,
जो यह पढ़ रहे हैं,
उनके लिए भी हम मायने ना रखते हो।

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Dveej Surti 9 JAN AT 11:38

सूरज

खुदा ने क्या खूबसूरत तोहफा भेजा है,
दिल भी दिया,
साथ में तन्हाइयों का खंजर भी उसमें भोका है।

जाओ और कह दो उस चाँद को,
कि मुझे अब उसकी जरूरत नहीं,

वह हो या ना हो,
आसमान फिर भी काला दिखता है।

अब सूरज से मुझे कोई उम्मीद नहीं,
तेरे सामने आकर खड़ा भी हो जाऊं,
तो माथे पर बादलों का साया गिरता है।

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Dveej Surti 1 JAN AT 19:33

अंधा

आग जला कर सड़कों पर अंधेरा कर दिया,
मंज़िलों के भी इरादे कुछ गलत थे,

सूरज दिखा कर लोगों को अंधा कर दिया,
मेरे जुगनू क्या तेरे आफताब से कभी कम थे।

इंसानों पर भरोसा कर के गुमराह हो गया,
परछाई की तरह साथ चलने का वादा किया करते थे,

अंधा ना हो कर भी कैसे ना देख सका,
बिना रौशनी के सायें भी गायब हो जाया करते थे।

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Dveej Surti 18 DEC 2019 AT 16:49

लोग

अपनों से क्या शिकायत करूं,
मेरे तो अब आंसू भी पराए हो गए हैं,

रास्ते सुनसान नहीं,
पर मुझे देख लोग खामोश हो गए हैं।

ऐसा नहीं कि,
इस राह पर मैं किसी को जानता नहीं,

जानते तो वह हैं,
की मैंने उनके इरादे पढ़ लिया हैं।

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Dveej Surti 4 DEC 2019 AT 10:55

दुआ

चाँद खफा होकर बादलों में छुप जाता है,
कभी तो आंगन में आया कर,

दोस्ती टूट ना जाए इसलिए कुछ कहता नहीं,
कुछ बातें तू भी समझ जाया कर।

तू कहे तो रुसवा हो जाऊं,
इस मोहब्बत की किवाड़ पर,

थक जाते हैं तेरे लिए दुआ करते-करते,
कभी तू भी खुदा से हमें मांगा कर।

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Dveej Surti 20 NOV 2019 AT 10:25

सियासत

अभी तो पूरी जिंदगी है पड़ी,
मेरे पास काटने के लिए,

दिल टूटा हुआ ही सही,
बहुँत है अभी लोगों में बांटने के लिए।

वो तो हमने अपने हाथों से,
अपनी तकदीर जला दी वरना,

मेरे तो सिर्फ़ अल्फ़ाज़ ही काफी थे,
पूरी सियासत गिराने के लिए।

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Dveej Surti 31 OCT 2019 AT 1:23

तू थी

लोग हमारी रंजिशों के,
ख्वाब बाँटने लगे,

हम तो दोस्तों के साथ रह कर भी,
अपने-आप को तन्हा मानने लगे।

वह तो तू थी,
जिसने मेरे दिल और दिमाग को संभाला वरना,

हम तो जुगनूओं को भी,
आसमान का आफताब मानने लगे।

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Dveej Surti 17 OCT 2019 AT 14:46

दुआ

मैं तेरा हर ताबीर,
सच करना चाहता हूँ।

कमाता कुछ नहीं,
अभी किताबों से घिरा हूँ।

वैसे तो जेब खाली है मेरी,
पर एक चीज है जो मैं तुझे देना चाहता हूँ।

घर से निकलते वक्त,
माँ-बापू ने अपनी दुआ दी थी मुझे,
फिलहाल उसी से तेरा दामन भर सकता हूँ।

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