Dveej Surti   (D. Y. Surti)
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Joined 4 October 2017


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22 NOV AT 9:45

Believe in yourself

आसमाँ किसी के बाप का ना हुआँ,
परिंदें भी घोंसला ज़मीन पे बनाने लगे,

उड़ने से किसी ने रोका नहीं,
पर गिरने पे लोग तालियाँ बजा ने लगें,

बादलों को चूमने की चाहत रखने वाले,
अपने लिए पिंजरा भी ख़ुद बना ने लगे,

जो सूरज को पुजने से पहले शर्माते नहीं,
वो आईना देखने से पहले पर्दे लगाने लगे।

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16 SEP AT 1:30


ऐसे जाया ना कर

यार, तू ऐसे जाया ना कर,
कागज़ की सिलवटों को अच्छा नहीं लगता,

जाने से पहले लौटने की तारिक बताया कर,
तेरे बिना कोईं लम्हा मुझे अपना हिसाब नहीं देता।

वक्त ने कहाँ...,
वो समय कभी गिन्ना नहीं अपनी उम्र में जिसमे तूँ नहीं,

मुझे ऐसे छोड़ा मत कर,
तेरे अलावा मेरा कोईं ख्याल नहीं रखता।

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2 AUG AT 23:05

Understanding > Love
मुझे लगा मोहब्बत बड़ी सच्ची है नदी की समंदर से,
वर्ना थोड़ी ना कोई शिखर छोड,
इतनी दूर मिलने चला आता है!

सच बात तो किनारे से लौटी लहरों ने कहीं,
की "समज़ बड़ी गहरी है सागर की इश्क़ में,

तभी तो जुदा हो कर एक पल में,
वापस चले जाने का दिल करता है।"

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22 JUN AT 11:05

बादलों की फ़रियाद है की काफी महिनों से मैं रात को ताकने नहीं आया, अब उनके उस चाँद को क्या देखूँ जो मेरे आकाश में रह कर किसी और के सूरज से चमकता हो।

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23 MAY AT 11:19

मोहब्बत की रंगदारी नहीं होती और बेवफ़ाई की कोई सफ़ाई नहीं होती,

वफ़ा का दूसरा नाम फ़र्ज़ है,
उसमे विकल्प की अय्यारी नहीं होती।

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25 APR AT 10:12

उससे इतना भी मत बुलाया करो, कभि अपनें हाथ मैले भी कर आया करो, ऐसा ना हो जब फरियाद का मौका मिले तो देने वाला ही बहरा हो गया हो।

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30 MAR AT 2:49

बेवफाओं पे खर्च ना किया करो, उनकी औकात से मोटे कागज में हम अपना गुलाब खरीदते हैं।

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5 MAR AT 11:49

कहते है कि अच्छी चीज़ें,
अक्सर इंसानों को ठीक से याद नहीं रहती,

शायद इसी कारण,
बेवफ़ाई के वक्त उसे मेरी याद नहीं आई।

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15 FEB AT 9:36

एक दास्तां मेरे सपनों की

वह मजाक में बोली कि,
उसको ज़मीन के अलावा कुछ और पसंद नहीं है,
हम सच समझ कर अपना आसमान दफना आए,

दम तोड़ दिया रंजिशों ने उस दिन अपने हाथों से,
जब सर ढ़कने के लिए रकीब अपना चाँद छोड़ा आए,

बेवकूफियाँ बहुत हुई,
जब खसारें सपनों के होने लगे,

अक्कल ने दस्तक तब दी,
जब अपना हिस्सा मांगने परिंदे चले आए।

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30 JAN AT 21:46

कुछ बातें मैंने भी जानी है

उसकी आँखों में देखकर पता चला है,
झूठ सिर्फ ज़ुबान नहीं बोलती,

हमने हुस्न की बस्ती में झूम झुम कर सीखा है,
दीवानों की कोई जगह नहीं होती,

ज़िंदगी जीने से जाना है,
मरने से दुनिया वापस नहीं मिलती,

प्यार करके पता चला है,
दिल तुड़वाने में वह सज़ा है,
जो दिल तोड़ने पर भी नहीं मिलती।

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