Divya Jain   (Divya Jain)
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Dreamer..
Observer..
Believer..
Love to write...❤️
Joined 26 January 2018


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Observer..
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Divya Jain 1 OCT AT 18:13

Ek khamoshi ne yu hoth sil diye h..
Ek Shor hmesha dil m sunai deta h..

एक खामोशी ने यूँ होठ सिल दिए हैं.. ।
एक शोर हमेशा दिल में सुनाई देता है..।।

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Divya Jain 28 SEP AT 18:52

कि तुम्हें एहसास नहीं मेरे एहसासों का..
दर्द तो ये है कि..
तुम सब जानकर भी अनजान बनते हो.. ।।

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Divya Jain 27 SEP AT 20:58

है..
हमको यूँ बेजुबान न समझ..
वाकिफ़ है तेरी चालाकियो से..
हमको यूँ अनजान न समझ..
मोहब्बत की है इसलिए पूजा था तुझको..
तू खुद को यूँ भगवान न समझ.. ।।

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Divya Jain 4 SEP AT 23:23

Rone ka dil ni krta..
Bs awaj m laraz'aat aati h..

Tu samne to hota h..
fir b Teri yaad aati h..

Kuch to bhar gya h dil m..
Ab to bs jhuthi mushkurat aati h..

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Divya Jain 1 AUG AT 19:32

Love you more ki ladai m..
Usse haar jana b..
Apne m Ek jeet h.. 😍

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Divya Jain 20 JUL AT 14:05

एहसासों को अपने उसकी सांसो में छोड़ देना चाहती हूँ.. ।
मैं उससे मोहब्बत करना चाहती हूँ.. ।।

वो बहुत जरूरी है मेरी जिंदगी में.. ।
मैं हर मर्तबा उसे ये बताना चाहती हूँ..।।

ख़्वाबो पर मेरे मेरा कोई जोर नहीं.. ।
मैं उसको बस खुश देखना चाहती हूँ.. ।।

वो जैसा है.. अच्छा है.. ।
मैं उसको बदलना कब चाहती हूँ.. ।।

वो भी जाने मेरी कदर.. ।
मैं उससे और कुछ कहा चाहती हूँ.. ।।

वो मनाएं मुझको मैं इस हसरत से.. ।
उससे रूठ जाना चाहती हूँ.. ।।

वो भी नवाजे मुझको अपनी चाहत से.. ।
मैं उसको अपना बनाना चाहती हूँ..।।

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Divya Jain 5 JUL AT 15:40


जागते रहते हैं कुछ ख्वाब मुझमें शब़ भर..
नींदो से कुछ खास मेरी अब बनती नहीं..

Jaagte rhte h kuch khwab mjhme shab bhar..
Neendo se kuch khas meri ab bnti ni..

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Divya Jain 21 JUN AT 15:42


जब मेहनत की लकीरें माथे पे उबरने लगती है..
तब हाथों की लकीरें खुद संवरने लगती है.. ।।

Jb mehnt ki lakhere mathe pe ubarne lgti h..
Tb hatho ki lakhre khud sawarne lgti hh..

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Divya Jain 14 JUN AT 1:01

Dil m jazbaato ki rukawat bht thi..
Ankho se aansoo k bhaand na toote to ar kya hota..!!

दिल में जज़्बातों की रुकावट बहुत थी..
आखों से आँसूओं के बांध न टूटते तो और क्या होता... ।।

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Divya Jain 13 JUN AT 20:26

Bin wajah jo MN na lge kbhi..
To smjh jana chaiye..
Khud se khudme hi preshan ho kahi...

बिन वजह जो मन न लगे कभी..
तो समझ जाना चाहिए..
खुद से खुद में ही परेशान हो कही.. ।।

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