Dinesh KM Shaw   (दिनेश)
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Joined 10 June 2018


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Dinesh KM Shaw 11 NOV AT 18:30

मेरे सपनों को साकार करने वास्ते हीं ये सब तूने थे चलाये
सारे प्यार भरे टोटके मानो एक संग सब काम कर जाये

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Dinesh KM Shaw 10 NOV AT 7:09

शरद की रात में वीभत्स मलाल सा काम कर गयी
वैमनस्य तेरा ये माशूकी ऋतुओं को बुलाने जैसा है

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Dinesh KM Shaw 1 NOV AT 13:41

"बेरियाँ"

कुछ बेरियाँ मौसम की तरह
होती हैं जो धीरे-धीरे सबको 
अपने में समाहित कर लेती हैं
जिसमें मन का स्थान प्रमुख है |

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Dinesh KM Shaw 22 OCT AT 8:25

"मुझसे फिर प्रेम न हो जाये"

लड़बावला मन मचल
ख़ुद को झोंके बिगड़े
सुंदरता देख डोले
न इर्द-गिर्द निहारे

(अनुशीर्षक पढ़ें)

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Dinesh KM Shaw 19 OCT AT 15:12

"संतुलन"

बीमारी को पालोगे तो और 
वह भयावह रूप लेगी
चाहे वो मनोरोग हो
या हृदय रोग हो
निदान तो तब है जब
आपस में संतुलन बना रहे
जन्म और मरण के बीच ही जीवन है

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Dinesh KM Shaw 18 OCT AT 18:10

"समझौता"

समझौते के वक़्त एक गरम तो 
एक नरम प्रवृत्ति के लोग होते हैं
परिणाम सौ टका सही आता है
प्रीत को समझने के लिये जैसे
दिल और दिमाग को एकबद्ध 
कर एक संग लाते हैं

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Dinesh KM Shaw 12 OCT AT 15:04

बिछड़न- २ "त्रि‍वेणी"

अरसों से ढूँढ रहा था तुझे मेरी तन्हाई
आई ऐसे बन तू वो किरदार भी न मन भाई

प्रेम का दूसरा अंग है यहाँ बिछड़न

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Dinesh KM Shaw 11 OCT AT 14:49

"बिछड़न"

मैं सरक रहा था
ढलुआ पहाड़ों से
जैसे तुम्हारा-हमारा
पहाड़ सा अटूट संगम
छूट रहा हो अपना
आसमान-ज़मीन का
मिलन है जैसे बड़ा दुर्गम

बिछड़न एक देन है 
अभावात्मक प्रेम का

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Dinesh KM Shaw 8 OCT AT 14:28

"दशहरा"

यहाँ एक सर नहीं संभलता
रावण के दस सिर थे
प्रकांड विद्वान, ब्राह्मण अहंकारी
वहीं राम एक सर धारी
सीधा-साधा लोक हितकारी

एक मन को संभाल लो
कुछ दुराचारी से सीख लो
वैष्णव को अच्छे से जान लो
जग के अत्याचारी न बनो

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Dinesh KM Shaw 7 OCT AT 15:09

नवरात्रि : ९ "श्लोक"

अष्ट सिद्धि दस गौण सिद्धि जगत जननी प्रदायिनी |
सर्वस्व धात्री सिद्धिदात्री माता विश्वरूप स्वरूपिणी |

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