दीप शिखा  
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Joined 5 July 2018


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दीप शिखा 23 APR AT 17:44

तेरा खयाल कागज़ पर बिखरता ही रहा,
इश्क़ उतर आया आँखों से देखते-देखते !

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दीप शिखा 23 APR AT 17:10

आश्वस्त होना स्वयं की छवि से
बहुत कठिन है
मानव प्रवृत्ति है उलझा होना
शाश्वत और शांत जीवन
कल्पना मात्र है
युग ही है
संवेदनाओं को कचोटने का
टटोलना अंत:करण
संभावनाओं के प्रति
अपेक्षित होना
उपेक्षित होकर भी
लालसा की अनुभूति करना
निश्चित रूप से आज
जीवित होने का प्रमाण है !

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दीप शिखा 19 APR AT 21:32

कुछ दिनों का ब्रेक ले रही हूँ yq से, माफ कीजियेगा, वापस आकर सबकी रचनाएं पढूंगी 🙏🙏

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दीप शिखा 19 APR AT 11:58

बेवजह बेख़याली से उन्हें फ़ुरसत तो मिले,
ज़मीं-ओ-आसमां में कहीं मरकज़ तो मिले,
आसरा मासूम मोहब्बतों का भी कहीं हो,
दरो दीवार न सही गोद-ए-कुदरत तो मिले !

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दीप शिखा 18 APR AT 8:37

चुस्कियाँ चाय की आज जरा बहकी सी है,
गर्म मेरे मिजाज़ सी और नशा तेरे इश्क़ सा है !

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दीप शिखा 17 APR AT 9:08

सिमट आई कहकशाँ मेरे दामन में तेरे ख्वाब से,
हाँ तलाश लिया दिल ने तुझे धड़कन बेहिसाब से,

डूब जाऊँ मैं जिस लम्हे में बिना तेरी इजाज़त के
ढूँढ लाई वो एक कतरा तेरे चश्मे नम के आब से,

अदना सी ख्वाहिशें लिए मिले थे रहगुज़र पे हम
हैरान हूँ आज तलक तेरे सवाल और जवाब से,

एक वक्त आया था हसरतों के‌ आसमां छूने का
वरना मुतमईन थे हम जमीं पे सैर-ए-महताब से !

मुख़्तसर इश्क़ को मुकम्मल वक्त मयस्सर न हुआ
दिल-ए-अरमान कम न थे 'दीप' तेरे आफताब से !

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दीप शिखा 17 APR AT 3:00

ऐ ख़ुदा मेरे अल्फ़ाज़ों को छू जा
जज़्बात-ए-कलम से नई नज्म निकाल

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दीप शिखा 14 APR AT 16:19

दिल से दिल तक जाने का मुनासिब रास्ता बाकी रखना,
तमाम दरवाजे बंद हों लेकिन खिड़कियाँ खुली रखना !

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दीप शिखा 13 APR AT 22:11

हर्फ़-दर-हर्फ़ वजूद अपना तलाशते हैं हम,
बिखरे पन्नों में अहसास कुरेदने की कोशिश है !

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दीप शिखा 12 APR AT 14:27

जवाब देने हैं, सवाल बाकी है
दिल में अब भी मलाल बाकी है,

नया रंग उमड़ आया बादलों पर
पूछना उनसे उनका हाल बाकी है,

इक कागज की कश्ती बहाई थी
देखना हवाओं की चाल बाकी है,

शोर तेज है आज धड़कनों का
वो करीब हैं, ये खयाल बाकी है,

पिघल रहा वक्त 'दीप' हर लम्हा
ख़ामोशियों का ये साल बाकी है !

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