Darshan Mali   (Darshan's_diary 🖋️)
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Joined 26 October 2019


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5 HOURS AGO

ખબર પણ નથી પડતી, Earth day આવે ને જાય,
અહીં તો ચર્ચા ચિંતા એટલી જ, પૈસા કેમના ભરાય

માનવ દેશો વચ્ચે યુધ્ધો થાય કે ખોટી સંધિઓ સર્જાય
અહીં તો નજર ત્યાં ફટ મંડાય, કે મારા શેરમાં ઉછાળો કેટલો થાય

હું, બૈરી ને પોર્યા એટલા માટે જ જીવનભર ઘસાવાનું
હાં ઠીકઠાક થોડું બોડું ઉપરછલ્લું દાનધરમ કરવાનુ

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16 APR AT 22:39

रात दिन की भागादौड़ी में, कविता लिखना भूल जाता हूं
या शायद यू कहो कि मैं, जिंदगी जीना भूल जाता हूं।

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13 APR AT 23:18

क्यों करना है यह,
दिमाग से पूछो कैसे करना यह।



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11 APR AT 23:58

कहा था हमने कि कोई नही आ सकता बीच हमारे
तो फिर इक दिन ये इश्क़ भी चल दिया बीच से हमारे

मिलना चाहा था कभी, जैसे मिले थे पहली बार
एकदम अजनबी से, ना जान पहचान, बस अजनबी से
मिल ही रहें है अब, जैसे बिलकुल रही हो न जान पहचान, कैसी बदनसीबी से

लाना तो चाहते थे झगड़े रोज के मसले का अंत
लेकिन इस तरह होगी ख्वाइश पुरी, हुए नहीं हम दंग

चाहा था कुछ न आए बीच हमारे
इश्क भी ना रहा अब बीच हमारे

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11 APR AT 14:53

क्या तुम्हारा सजना संवरना ही सुंदरता है?
काले लिबाज़ में ठहरना या यू मुस्कुराना सुंदरता है?

शृंगार लगाना या फिर जुल्फों को लहराना
मेरी बातो को मानना या मिठी आवाज़ सुंदरता है?

वे तो सारी आकर्षकताए हो, मैं मानता हूं
तुम्हारा काम करना सुंदरता है।
अपने दोषों को पहचानना, उन पर अमल करना,
भीतर तुम्हारे गुणों को खिलाना है सुंदरता
गलती का सहज स्वीकार और कुछ नया सीखते रहना
अपनो की फिक्र करना या अपने खर्च की, वो है सुंदरता
प्रकृति के बारे में सोचना, संस्कृति मनन करना
इंद्रिय सुख में संयम, विपत्ति से भिड़ना, लगे मुझे सुंदरता।

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11 APR AT 13:50

तुम जब बीमार होती हो तो अच्छा नहीं लगता
सदा कुछ बोलती तुम यू चुप रहो, अच्छा नहीं लगता

मै गर हो जाऊ नादुरस्त तो कोई बात नहीं
तुम्हे मैं यू खुशमिजाज न पाऊं, तो अच्छा नहीं लगता

तुम हो तो सही घर में ही हमारे, लेकिन
ईर्दगिर्ध घूमती ना दिखो, तो अच्छा नहीं लगता

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4 APR AT 8:50

જો! દોષો પણ મારા મને, હવે માફક લાગે છે
મનોરંજન વિનાનો દિવસ , આફત લાગે છે

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3 APR AT 22:29

આ તો હિમાલય છે જે ઉત્તરથી વાતા ઠંડા પવનોને રોકે છે
બાકી ક્લાઈમેટ ચેંજમાં પણ, ભારતીય માનવમન ઑકે છે

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27 MAR AT 10:04

जैसे अलमारी से खोजते हो तुम पुराने से पुराने कपड़े,
होली के रंगो में तुम खुद को नए में रंगने,

तुम लाना पास मेरे, वही पुराने ढर्रे, पूर्वग्रह, निजी मान्यताएं,
ये वो चाहिये-न चाहिये, नाकाम चिंताएं, कामनाएं।

सब ले आना, पुराने इस तरह के कपड़े, पहचानकर, छानबीन कर।
रंगना है खुद को, अपनों को उस निरंग के रंग में।

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24 MAR AT 7:58

स्वर्ग सा अहसास होता हैं, जब वो गालो से छूती है
मै उसे छूता हूं गालों से तो कहे, कि दाढ़ी चुभती है।

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