Basant Sao  
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Joined 6 July 2018


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Basant Sao YESTERDAY AT 11:26

किन किन बातों का जवाब दूँ?,
मुझे हर बातों का जवाब कहना नहीं आता...

मैं जैसा हूँ वैसा ही ठीक हूँ यारों,
अरे मुझे औरों जैसा रहना नहीं आता...

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Basant Sao 3 DEC AT 16:21

"कुछ दरिंदे और पिछड़े लोगों की र्निलज सोच...."

कि ये लड़कियाँ क्यों छोटे कपड़े पहनती हैं??
क्यों न वो अपने शरीर को छुपाये??...

अरे नहीं नहीं!!! वो इस लिए पहनती हैं
ताकि हम उसके शरीर को छू पाए!!!...

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Basant Sao 29 NOV AT 11:22

रास्ता जो है मेंरे पैरों के नीचे
और ज़मीन के ऊपर बसा हुआ है...
और मन मेरा दिशाओं और
मंज़िलों के बीच कश्म-कश में फँसा हुआ है...

ऐसे अस्पष्ट सी स्थिति
में क्या किया जाए...?
शायद ज़िंदगी जिस रस्ते ले जाए
उस रस्ते ही जिया जाए...

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Basant Sao 26 NOV AT 10:07

किताबों पर उसके साथ अपना नाम लिखा करता था...,
कमबख़्त किताबों में ही रह गया..!!!

हकीकत मानता था उसे मैं अपनी...,
इंसान वो मेरे टूटे ख्वाबों में ही रह गया...!!!

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Basant Sao 21 NOV AT 16:29

मत पड़ प्यार में पागल,
अगर दिल टूटा, तो दर्द
और तकलीफ ही नसीब होगा...

और अगर एसा हुआ तो,
ना तेरे पास वो शख्स रहेगा
और ना तू खुद से करीब होगा....

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Basant Sao 16 NOV AT 10:30

झाँक कर देखा मैनें अपने अंदर...!
अंदर मैंने ये क्या क्या पाया...?

ये कौन कौन रहता है मेरे अंदर ...!
अरे मैं तो खुद को ना भाया...!!

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Basant Sao 9 NOV AT 14:12

"अगर सोचते हो तो सोचो,
पर जज्बातों में बेहतर सोचो,
न कि जज्बातों में बहकर सोचो..."

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Basant Sao 2 NOV AT 18:03

कहाँ पहुँचोगे इन रास्तों से?,
जिस पर तुम चल रहे हो...

बस देख लेना कि कहीं मंज़िल के साथ,
तुम तो नहीं बदल रहे हो...

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Basant Sao 29 OCT AT 20:20

मेरी आदतों का अंज़ाम मुझे पता नहीं,
आदतों में कुछ कामों को अच्छा और कुछ कामों को बुरा करता हूँ...

इंसान एक हूँ पर कितना बदल जाता हूँ मैं थोड़े ही वक्त में,
आईने में अपने अंदर छिपे कई इंसानों को घूरा करता हूँ...

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Basant Sao 24 OCT AT 17:06

हर रात मैं खिड़कियां खुली रखता हूँ,
कि दस्तक तू देगा बस इसी इंतज़ार में ही ज़िंदगी बिता रहा हूँ मैं...

आस-पास तेरी यादों को अंधेरों ने घेर रखा है,
तो इस चाँद की फीकी रोशनी से उन अंधेरों को मिटा रहा हूँ मैं...

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