Ashutosh Rai  
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Joined 26 May 2018


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Ashutosh Rai 9 DEC 2019 AT 23:37

उन्होंने बड़ी ही सधी सी अँग्रेजी में सुना दिया।
अरे तुमने मार्लन ब्रैंडो की ऐक्टिंग देखी?
दास कैपिटल पढ़ा?
पिनो न्वाय पिया?
तो फिर तुमने ज़िन्दगी क्या जिया?

उस रात मैं भूखा था , मैने सोचा
उन्होंने कभी इस धरती पर फावड़े की चोट नहीं देखी
कार्तिक मे अधनंगे बदन गेहूं के बीज नहीं फेंके
बीजों से पौध उगते तो देखा नहीं
वो जीवन के कितने अनुभवों अछूते रहे
सच में उन्होंने जीवन जिया क्या?

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Ashutosh Rai 10 SEP 2019 AT 21:34

सोचता हूँ कहानियों की उम्र क्या होगी?घड़ी दो घड़ी या सदी भर। या कहानियां तब से हैं जब से यह ब्रह्माण्ड।आखिर ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति भी तो एक कहानी है। कहानियां हम सबके जीवन का हिस्सा हैं या हम सबका जीवन एक बड़ी कहानी है और हम सब उसके छोटे हिस्से हैं। कहते हैं परिवर्तन शाश्वत है मुझे लगता है कहानियां भी शाश्वत ही हैं क्योंकि हर परिवर्तन की कोई कहानी जरूर है।

कहानियों का वृहत रुप एक सा ही होता है बाद में अलग अलग भू भाग छूकर अलग अलग मनोभावों से सिंचित कहानियां अलग रूप में परिणत होती हैं। कहानियां किसी के लिए पालों वाली नाव होती है जो उसे एक से दूसरे महाद्वीप तक की यात्रा करा देती हैं किसी लिए टाइम मशीन होती हैं जो कल्प कल्पांतर तक अतीत मे ले जाती हैं।

मुझे तो कहानियां सर्वव्यापी दिखती हैं कहीं भी घरों में, मेट्रो में,जितने चेहरे उतनी कहानियां। पुनः वस्तुओं की भी कहानियां हैं कैसे कोई वस्तु बनी,प्रयोग में आयी और विघटित हुई। कल्पना से ऊपजी कहानियां कोई यथार्थ नहीं बताती अपितु यह बताती हैं कि 'कल्पना' एक यथार्थ है। कहानियां मृत्युंजय हैं वे प्रलय के बाद भी जीवित रहेंगी प्रलय कथा बनकर। हम आप जो कहानियां लिखते हैं वो हमारे ही अंतस का ही टुकड़ा हैं। हम जिन कहानियों के किरदार हैं उनके लेखक, पाठक कोई और होंगे।

सोचता हूँ कोई कहानी लिख दूँ,क्या लिखूँ ?मै कोई कहानी हूँ मुझे पढ़ लीजिएगा।

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Ashutosh Rai 4 JUL 2019 AT 21:48

आपन गांव

एक तो ज्येष्ठ का मध्याह्न उपर से चमकती धूप, सूर्यदेव ऐसे लालायित हैं जैसे वकील बाप के घर में बेटा दारोगा हो जाए।

एक साल बाद अपने गाँव लौटता हूँ। ऐसा लगता है मानो वह गाँव जहाँ बचपन बीता,पर्यटन हो गया है, कभी कभी आ जाया करते हैं।

कच्ची सड़क पार करके एक पगडण्डी के रास्ते जैसे गाँव मे घुसता हूँ पहला सामना महुए के पेड़ से होता है। वह किसी तिरस्कृत बुजुर्ग की भाँति कातर नजरों से देखता है। पूछता है, 'भूल गए..?' कुछ आगे बढ़ने पर आम का पेड़ दिखता है। यद्यपि वृक्ष जाति होने के कारण आधुनिक मनुष्यों से कोई सम्मान तो नहीं प्राप्त है परंतु महुआ की सी दुर्दशा नहीं है। चारो ओर खेत दिखते हैं, गेहूं की फसल काट ली गई है सो खाली पड़े हैं। ग्रीष्म कालीन अवकाश के भरपूर उपयोग हेतु खेत, क्रिकेट के मैदानों में तब्दील कर दिए गये हैं। कुछ दूर से ही पुराना पूर्व माध्यमिक विद्यालय दिखाई देता है और सम्मान से आप ही सर झुक जाता है। जैसे जैसे घर के समीप जाता हूँ शहरों का मद चूर हुआ जाता है।
(Read in caption...)

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Ashutosh Rai 30 MAY 2019 AT 23:10

"It's time", An African American guard said in husky voice. A middle aged man stood up just to follow instruction. Guard followed him to the desk where prisoners used to write their dear ones.

Neither life nor people have been unfair to Kamlapati Shahi, they just have been unfaithful. Abundance of time made moments useless and tiring. Only an hour in a month means all to him, when he get chance to write. Every one can hear sound of click of retractable pen in the silence. I am not sure everyone loved that silence but he did. In blue ink on white blank paper he writes......, Dear son.

(letters in next quotes)

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Ashutosh Rai 7 MAY 2019 AT 11:58

उस मुश्ताक़ को इल्म-ओ-हिक्मत ही क्या था?
'बहुत कम का ग़म' जिंदगी से खुशियाँ ले जाएगा, ज्यादा से ज्यादा

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Ashutosh Rai 29 APR 2019 AT 11:10

That finger can't be pointed out to anyone, which doesn't have electoral indelible ink.

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Ashutosh Rai 19 APR 2019 AT 13:33

गुस्ताख़ दिल की मान खता ये करूँगा, घर तेरा किस कूचे मे है पता मैं करूँगा।
यूँ तो बा हया चुपचाप तुझे इश्क करने वाले हैं बहुत
मैं जरा 'ठेठ' हूँ, मैं तुझे जता के रहूँगा।

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Ashutosh Rai 7 APR 2019 AT 11:43

परीक्षा (last part)

चौबे जी ब्रम्ह मुहूर्त में ही स्नान करते और दो घण्टे की पूजा के बाद अपने स्कूल जाते। आज कक्षा में आते ही बोले, "सब लोग विध्रुव के अनंत से विद्युत क्षेत्र में लाने में किए गए कार्य की गणना करें। ....और हाँ सर न हिलाए कोई भी।"
सबको चुप देख बोले,"क्या हुआ किसी के पल्ले न पड़ा क्या?"
इतने में एक छात्र ने अखबार आगे किया।'दि हिंदू' ने खबर छापा,' सिक्स मिलिटेंट न्युट्रिलाईज्ड इन नौसेरा सेक्टर, वन सोल्जर मॉर्टियर्ड।' चौबे जी ने कौशल की फोटो देखते ही लपककर अखबार पकड़ा।भरोसा नहीं होता है..बार बार खबर पढ़ते हैं..,'लांस नायक कौशल कुमार चौबे बिलांग्ड टू नेवादा विलेज आफ आज़मगढ़।' गश खाकर कर बैठ जाते हैं...अन्य अध्यापक उठाकर घर लाते हैं।
अगली दोपहर आर्मी के छः जवान पार्थिव शरीर लेकर आते हैं... सम्बन्धियों का जमावड़ा लगने लगता है....सांत्वना के एक एक शब्द वज्रपात लगते हैं...सब सोचते हैं सबको हँसाने वाला कैसे शान्त सोया है?....चौबे जी अनायास ही मन में दुहराते हैं, 'हे रंघुनंदन! क्या भूल हुई होगी मुझसे?

घटना हुए एक साल हो गए हैं, १५ जनवरी की तारीख है और चौबे जी दिल्ली में उस ओर बढ़े जाते हैं जहां बहुत सारे जवान और उनके परिजन एकत्रित हैं।
( READ IN CAPTION. . .)

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Ashutosh Rai 24 MAR 2019 AT 13:01

परीक्षा (part 5)

दुनिया में अंतर्द्वंद्व ही सबसे बड़ा युद्ध है, विवेक सबसे बड़ा हथियार। 'परीक्षा पास कर लेंगे महाशय?' कौशल के मन मे बाबू जी का चिर परिचित सवाल कौंधा। कौशल मुस्करा के लाइन की ओर आगे बढ़े।
"सर मैं आपके साथ आता",सिपाही शिवा आराविंथन ने कहा।
"तुम दोनो यहीं रुकोगे मैं देखता हूँ।"कौशल ने विवेकी होने का परिचय दिया। कौशल तीनों मे सीनियर थे , अगर वो चाहते वो उन दोनों को भेज सकते थे।
"सर,आप अकेले...।"सिपाही थैकचोम ने कहा।
"इट्स एन ऑर्डर...इन केस आई डोन्ट कम..."कहकर कौशल चले गए।
कुछ देर बाद वाकी पर कौशल,"इनट्रूजन ऑन लाइन...सिक्स मेन आर्म्ड ऑन व्हीकल...ओवर।"
"जय हिंद ,दिस इज वॉच टावर.....इंगेज देम....ओवर ऐन आऊट।"
घुसपैठियों को आबादी तक पहुंचने में २५ मिनट लगते और सिपाही साथियों के उनतक पहुँचने में ३० मिनट लगते। कौशल ने पराक्रम दिखाते हुए जी के सामने से फायर ओपन किया। पहली गोली से एक पहिया पंक्चर कर दिया फिर ड्राइवर के बगल के सवार को घायल कर दिया। घुसपैठिये पैदल हो चुके थे,अब आबादी तक पहुंचने में एक घंटे लगते। फिर फायरिंग के लिए जैसे ही पोजीशन ली,सीने से कोई चीज टकराई आँखों के सामने अँधेरा छा गया....एक हाथ टेढ़ा हुआ जाता है.... घुटने होती है.... गला रूँधा जाता है....सारा अतीत जीवन्त हो उठता है मानो कोई बाईस्कोप हो... (READ IN CAPTION)

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Ashutosh Rai 12 MAR 2019 AT 18:33

परीक्षा (part4)
"956514 लांस नायक के.के चौबे"
"लांस नायक कौशल कुमार चौबे....",उस्ताद चिल्लाया।
"सर वो लेट है।"
इतने मे कौशल भागते हुए आए,"जय हिंद, सर!"
"यू आर लेट बाय 5 मिनट....आन योर नी,डाउन।"
"सर वो मैं.."
बात काटते हुए उस्ताद चिल्लाया,"आई सेड डाउउउन....नाऊ वाक आन योर नीज अनटिल यू ब्लीड।" कौशल को पनिशमेंट लेते देख बाकियों की घिग्घी बँध गई। अभी तो फौज में आए कुछ दिन हुये हैं, अभी से इतना सेवा सत्कार?
साथियों ने सोचा सहानुभूति दिखाई जाए लेकिन उल्टा कौशल अपने विनोदी स्वाभाव से साथियों को हँसाने लगे। अब तो वो मशहूर थे अपने बाबूजी के किस्से सुना के हँसाने के लिए।मुश्किल से मुश्किल घड़ी में ऐसे पेश आते मानो कुछ हुआ ही नहीं।
रात हुई उस्ताद फिर आए,"परेड सावधान।"
सब सहमे हुए थे,ये रात मे क्यूँ आए?कुछ गलती हो गई क्या? क्या सजा मिलेगी? इतने में उस्ताद बोले," किसी को गाना आता है?"
अब तो ये रिवाज हो चुका था जब उस्ताद पूछते किसी को गाना आता है तो जो सबसे बेसुरा गा सकता वो हाथ उठा देता बाकी साथी उसे गाते देख खीं खीं करके हँसते और उस्ताद बीच बीच मे बोलते ,"कोई नहीं हँसेगा इट्स एन आर्डर।"

"अब कल की ड्यूटी सुनो, सिपाही शिवा आराविंथन और नरेंद्र थोकचोम के साथ लांसनायक के.के चौबे, पोस्ट 25 बी, सुबह सात बजे।"
भोर 3 बजे वाकी पर,"लाइन पर कुछ हरकत हुई है, पोस्ट 25 बी, गार्ड्स टू कापी?"
(To be contd...)

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