anurag.writes   (anurag.writes)
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Joined 26 December 2018


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27 NOV AT 22:29

कुछ देर बस पास बैठ जाऊँ ,
माँ अब और कुछ नही चाहती है !

@anurag.writes

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7 NOV AT 13:58

सब प्रेमिकाएं एक सी नहीं होती !

सब प्रेमिकाएं नहीं डरती कॉकरोच से,
सब नहीं पढ़ती वुमेन मैगज़ीन,
सब नहीं जाती अवसाद में ब्रेक अप के बाद भी,
सब का फेवरेट नहीं होता पिंक कलर,
सबके लिए नहीं होता प्रेम पहला ओर आखिरी !

@anurag.writes

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5 OCT AT 9:16

जिन्दगी इतना उधम मचा रही है,
मौत भी डरकर इधर नहीं आती !

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3 OCT AT 13:54



एक रोज़ जब लौटोगे घर
कोई भी सामान
अपनी जगह पर नहीं मिलेगा
और....वह संसार नही मिलेगा
वह मिट्टी का चूल्हा
और लीपा हुआ आंगन नहीं होगा!
लौटोगे .....और
गौशाले में एक दुकान खुलने को तैयार मिलेगी,
घर की सबसे बूढ़ी स्त्री के लिये
सीलन और अंधेरे में डूबा कोई कमरा होगा!
देखना-
विचार और संवेदना पर नये कपड़े होंगे!

@anurag.writes

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19 SEP AT 12:37

मुझे तैरने का डर
उसे डूबने की आदत...

मुझे ठहरना पसन्द
उड़ना उसकी आदत...

मैं समय के अनुसार
उसकी अलग बिसात...

उसके सब रास्ते नये
मैं नक्शे के साथ...

मेरे और उसके ख्याल मिलते नहीं
उलझते हैं अक्सर कौन है सही !

@anurag.writes

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15 AUG AT 21:22

लीक पर नहीं,
अपनी बनाई राह पर
चलूंगा।
मैं ही
कभी लड़खड़ाते,
कभी सधे हुए कदमों से
गिरूंगा मैं ही
संभलूंगा भी मैं ही।
एक सुलझी हुई मंज़िल तक,
अपने पैरों के निशां
तो होंगे ही न?

@anurag.writes

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12 AUG AT 9:38

उठाओं तुम ईंट ज़रा,
पत्थर यहाँ से चलेंगे !

@anurag.writes

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1 AUG AT 19:52

तुम्हें याद है..
गर्मी की दोपहरी
खेलते रहे ताश
पीते रहे शरबत,
शाम को खेलते हुए
उडाते रहे दिन
खर्चते रहे पल
और फिर किया हिसाब
गिना उँगलियों पर
और हँस पड़े बेफिक्री से,
तब , हमारे पास
समय बहुत था..!

@anurag.writes

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18 JUL AT 14:05

दरवाजे की सांकल जाने कबसे बंद है ,
अरसा हुआ यहां किसी की दस्तक सुने !

@anurag.writes

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11 JUL AT 18:46

किस क़ीमत पर खुशियां पाई हैं, तुम जानो,
हम तो 365 दिन की बिखरी रातें गिनते हैं !

@anurag.writes

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