Anshuman Kuthiala   (शहर में शायर)
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Joined 22 May 2017


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Joined 22 May 2017
14 APR AT 4:05

चुनाव रैलि में पहुँचा करोना गिर गया चक्कर खाए ,

किसको पकड़ें किसको जकड़े कोई समझ न आए !

जोगिरा सारा रा रा रा !

ना कोई सोशल डिस्टेंसिंग और ना कोई मास्क लगाए!

इतनी भीड़ में आकर तो कोरोना भी पछताए !

जोगिरा सारा रा रा रा !

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29 MAR AT 17:12

तुम्हारे जाने के बाद मैं ठीक ही हूँ ,

पर ख़राब होने के नजदीक भी हूँ !

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29 MAR AT 12:20

पिछले बरस लुटा था सुख-संसार होली में ,
सो इस बरस ना करेंगे हम प्यार होली में !

तेरे तन से हों लिपटे भीगे कपड़े हों जैसे ,
मेरे मन में उठते हैं ऐसे ही विचार होली में !

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29 MAR AT 11:35

हमसे खेल होली,वो गैर की हो ली ,

दामन से जैसे अलग हो गई चोली !

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21 MAR AT 16:16

मैं ऐसी कविता न लिख दूँ कहीं जिसमें पलने लगो तुम ,

और मैं जब उसको सुनाऊँ तो जलने लगो तुम !

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12 FEB AT 19:57



तुम मुस्कुराते हो तो लगता है ऐसे ,

बागों में फूल अभी खिले हों जैसे !

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9 FEB AT 6:22



और भी मुश्किल है चुप रहना !

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3 FEB AT 20:21


प्यार वो नैय्या है,जिसका न खेवैया है ,

इसको तो डुबोना है जग का रवैया है !

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2 FEB AT 13:33



जितना उसे मैं पसन्द हूँ , उतनी वो मुझे प्यारी है , इतनी कहानी हमारी है !

इक दूजे को चाहने के सिवा और नहीं कुछ किया,इस चाहत में उम्र गुजारी है !

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30 JAN AT 20:45

जो चीथड़ों में लिपट गए खादी के लिये ,
है नमन उनको आज आज़ादी के लिये !

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