Ankush Tiwari   (Ankush Tiwari)
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Joined 8 December 2016


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Ankush Tiwari 15 JUN AT 0:03

Dear Sushant Singh Rajput...

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Ankush Tiwari 29 MAY AT 9:34


हमें इतने गहरे गहरे घाव मिले है बदन के क़तरे क़तरे पर
रूह के एक एक हिस्से पर, तक़दीरों से तमाश-बीनों से कि
जहाँ भी नाज़ुकी से छुएँ या मरहम तक लगाने की सोचें
वहीं से जान छटपटा छटपटा कर निकलने को होती है।

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Ankush Tiwari 28 MAY AT 9:49

रात के तीन बजते ही एंग्जायटी बड़ी बेरहमी से अपने काँटेदार पंजे में कस के जकड़ लेती है, मैं अपने आप को चारों तरफ से चादर से ढक लेता हूँ जिससे कोई देख न ले, चादर के अंदर मेरी उँगलियाँ फड़फड़ाती रहती हैं पर बेबस कुछ कर नहीं पातीं एक पर कटे पंछी के भाँति। मेरा घर थोड़ा छोटा है, इसमें सब सदस्यों के लिए अलग अलग कमरे नहीं है, लगभग सारे लोग एक साथ एक ही कमरे में सोते हैं, दाएँ बाएँ उकरू मुकरू हो कर, हालाँकि इसमें भी जगह बच जाती है बस समस्या तब होती है जब रात के तीन बजे अचानक प्यास न लगी हो फिर भी गला सुख जाए, गर्दन में हड्डियों के चटकने की आवाज़ें आने लगे, साँसें अटक अटक कर चलने लगें, ठंड में भी शरीर पसीने से तर हो जाये, यूँ ही अचानक बहुत तेज़ तेज़ चिंघाड़ कर रोने का दिल करे तब अपना मुँह तकिए से भींच कर, हाथ पैर सिकोड़ कर बिना किसी शोर के रोना पड़े, आँखें से बहते लहू को चुपचाप पीना पड़े, उस वक़्त घर तो क्या पूरी दुनिया भी बड़ी संकरी लगने लगती है, मेरे दोनों हाथ मेरा ही गला दबोचने लगते हैं और मेरा दम घुटने लगता है पर मैं कुछ कर नहीं पाता सिवाए छटपटाने के।

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Ankush Tiwari 25 MAY AT 6:58

#ग़ज़ल
गुमनामी  के    साये    में  रहने   वाले   हैं
सारे  परिंदे   जो   सच   कहने   वाले    हैं

आया  न  ता-उम्र   जीना  जुदा   हो   कर
चश्म-ए-जहाँ भी मियाँ सहने  वाले हैं

( **पूरी ग़ज़ल अनुशीर्षक में पढ़ें**)

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Ankush Tiwari 23 MAY AT 8:17

पहले धोखा दे कर फिर सीने से लगाया हमें
मुकद्दर ने चाकू की नोक पर आज़माया हमें

पीठ पीछे बुराई करना मुँह पर प्रशंसा करना
उम्र निकल गयी बस यही हुनर न आया हमें

पॉकेट कटी, गाड़ी चढ़ी, सर फटा, ख़ून बहा
ये भला किस चौराहे पर लाकर बिठाया हमें

माँग में सिंदूर लगा कर हरी हरी चूड़ियाँ पहना
समय ने किसी विधवा का जोड़ा पहनाया हमें

तलब सिगरेट की उठी है जो कभी पी ही नहीं
सुकूँ की चाह ने कमज़र्फ कम्बख़्त बनाया हमें।

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Ankush Tiwari 17 MAY AT 3:04

अल्लाह सलामत रखे।

( **पूरी कहानी अनुशीर्षक में पढ़ें**)

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Ankush Tiwari 16 MAY AT 8:05

आज़ादी का नशा चखने के लिए, तमाम दुःखों का अंत करने के लिए लगभग हर चालीस सेकंड्स में एक व्यक्ति, आत्महत्या की कुल्हाड़ी से उन अदृश्य बेड़ियों को काट देता है जिनसे बाहर निकल पाना उतना ही जटिल है जितना किसी बंज़र ज़मीन पर एक पेड़ का उग आना।

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Ankush Tiwari 15 MAY AT 4:56

तुम्हारे लौट कर आने की संभावना से भी बहुत कम संभावना है मेरा तुम्हारे बिना जीवित रहना।

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Ankush Tiwari 13 MAY AT 7:22


आँखों से हर एक ख़्वाब को नोच कर भभकते अंगारे भर दिए
अपने सारे एहसानों की बड़ी मामूली क़ीमत वसूली है उसने।

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Ankush Tiwari 11 MAY AT 2:39

रोटियाँ।

( ** पूरी कविता अनुशीर्षक में **

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