3 MAY 2020 AT 15:38

बहुत इन्तजार कर लिया तेरे आने का।
अब जीना सीख रहा हूं। तेरे बग़ैर।
छीनना सीखा नहीं मैंने । वरना हौसले तो अभी भी बुलंद हैं हमारे।

- ankahe-lafzmere