Anjula Bhadauria

305

quotes

3718

followers

90

following

Anjula Bhadauria (💐 अंjula SINGH भdauria 💐)

📚Published Author and Editor of 8 Books (Available on: Amazon, Flipkart, Shopclues, etc) 🎨 Exhibited Artist (Lalit Kala Academy, New Delhi ; General Zorawar Singh Auditorium, Jammu) 📝 BoostThyself (Author and Artist Hub member) 📰Published Poet (Amar Ujala, Progya, Swarnima, MCTE Newsletter, etc) 👩🏻‍🏫 Ex-Principal (ARPS) 👩🏻‍🎓 Educationist 👩🏻‍💻 Web Designer and Advanced Web Developer 💎 Advanced Pranic Healer 🏡 Certified Feng Shui Expert 👰Wedded to Olive green 😊I love reading, writing, painting, dancing n playing outdoor sports (especially cricket n basketball)... 😊I prefer using My Artwork as the background image for my Quotes... ☺️Written 8 EDUCATIONAL BOOKS: www.amazon.in search: Anjula Singh OR www.facebook.com/anjulasingh53 ☺️MY PAINTINGS & ARTWORK at: www.facebook.com/anjulaz 💐My writings n paintings reflect what I am or what I have been through.... "ठहरती नहीं ज़िन्दगी, काफ़िला बढ़ा चलता है, मिल ही जातें हैं मुसाफिर, कारवाँ बना चलता है।" - अंjula SINGH भdauria

https://about.me/anjulasingh

Top tags: yqbaba yqdidi tpmd20words tpmd boostthyself
नख से शिख तक है अनेकानेक विविधताओं से ये घिरा,
पर अब तक क्या कहीं कोई हिन्दुस्तानीं है आपको मिला।

#YQbaba #YQdidi #हिन्दुस्तानी (We are lucky to be one of the most culturally diverse nation of the world but unfortunately we have still not set our priorities clear... Putting state and religion before nation and playing in the hands of shrewd politicians is our biggest mistake... Our husbands, brothers, sons, fathers when they lay their life in protecting country do not ask which state or religion they are protecting then why can't we rise above our selfish motives.....)

19 NOV AT 1:22

महफूज़ किनारों पर तो काफ़िले भी साथ देते हैं, 
बीच मझधार में खैरख्वाह की आजमाइश होती है।

#YQbaba #YQdidi #खैरख्वाह My Pen and Ink work in the background (Even difficult times are important in life because that is the time when you find out the difference between real and fake)

15 NOV AT 1:58

अरे प्रचार करने की ज़हमत, क्यों उठाते हैं नेताजी... 
अबकी बार सदन पहुंचाएंगे, आरक्षण कोटा छाँटकर...

#YQbaba #YQdidi #नेता #आरक्षण #boldquote Today Reservation is just used as a tool by politicians to increase their vote bank... How will they feel if they also get selected for parliament by reservation quota instead of their performance and capabilities... aankit Srivastava ankit thanks for making me the part of this collaboration 😊 hope u like it 💐

14 NOV AT 0:39


Cognizance of 'Karma' 
placed my heart and soul
on the path of right
'Dharma'.

#YQbaba #Karma #Dharma #place Mukesh Zade thank you so much for giving me the opportunity to collaborate with you 😊 Hope I could do justice 💐

13 NOV AT 23:37

पन्ना धाय
(A Tribute to Rajputani lady's supreme sacrifice)

Read in Caption

#YQbaba #YQdidi #PannaDhai #पन्नाधाय #BraveRajput Many of us today fight like animals for material gains. We are slowly forgetting that sacrifice for the motherland is the biggest sacrifice. Instead we are busy making the system of our country hollow by bribe and cheating. We no longer realise that sacrificing one’s own life for country is a supreme sacrifice. Yet there have been even a bigger sacrifices in the pages of history. PANNA DHAI is indeed the epitome when it comes to sacrifice. Maharaja Sangram Singh (popularly known as Rana Sanga) of Chittor died (1527 AD) and mother Karmavati took Jauhar, their son Uday Singh was a little baby. Rana Sanga had appointed Banveer to be the regent who would be a guardian of the little prince till he grew up and took over the reign of the kingdom. Banveer however had a different idea. He planned to kill the baby prince so that he could himself be the king forever. Panna Dai (nanny) use to take care of the little prince. When she came to know that Banveer was coming to kill the would-be king, she did something that defies all human instincts. She sent the baby prince to safety and replaced him with her own little baby. Banveer beheaded Panna’s son, but the little prince remained unharmed. यह विशुद्ध सत्य व साहस ही तो जीवन जीने का आधार है, जिसके ओज व प्रभामण्डल आगे सब निस्तेज सब बेकार है, अनपेक्षित आशातीत समर्पण वीरों के जीवन का विस्तार है, जिसके सम्मुख समस्त विश्व में सब गौड़ - सब निराधार है, कितनें लोगों का सम्पूर्ण जीवन बना समर्पण की मिसाल है , जिसके आगे स्वयं नतमस्तक होता धरती-अंबर विशाल है, वीरता और राजपूत है एक दूसरे के पूरक व पूर्णतः समान, इतिहास के पन्नों में भी स्वर्णाक्षरों से इंकित इनका बलिदान, पन्ना धाय ने सोलवहीं सदी में स्वामिभक्ति का छुआ सोपान,  कर्तव्य के राह पर न्योछावर करी स्वयं अपने पुत्र की जान, हृदयविदरक परिस्थिति में एकमात्र पुत्र को किया है अर्पण, पैदा करने वाली जननी से भी कहीं ऊँचा किया है यह तर्पण, राजकुमार उदय सिंह के पालन पोषण का था उनका काम, राणा सांगा के लिए स्वामीभक्ति पर था उन्हें गर्व व अभिमान, अपने पुत्र चंदन के साथ-साथ राजकुमार को दूध पिलाया, इसलिए 'धाय माँ' का सम्मानित नाम उन्होंने था यहाँ पाया, उदयसिंह की माँ कर्मावती ने जौहर की को अग्नि अपनाया, तब चित्तौड़ वीरभूमि को इस वीरांगना ने कर्मभूमि बनाया , परंतु विधि पटल पे लिखा था एक मर्मभेदी शोकाकुल मोड़, बनवीर बढ़ा लिए नंगी तलवार राजकुमार के कक्ष की ओर , यह चेतावनी पाकर भी अपने कर्तव्य के प्रति छोड़ी न डोर, कर्मयोग से नतमस्तक कर नियति को भी किया कमज़ोर, टोकरी में लिटा राजकुमार उदय को झूठी पत्तलो से ढंका, फिर शीघ्रता से उन्हें विश्वस्त के साथ महल से बाहर करा, सोते अपने एकमात्र पुत्र को राजकुमार के स्थान पर धरा , तभी अचानक रक्त पिपासु बनवीर ने कक्ष में प्रवेश करा, रक्तरंजित तलवार ले जब राजकुमार के विषय में प्रश्न करा, कठोर हृदय से उसने शैया पे सोए पुत्र की ओर इशारा करा, झटके से सत्ता लोभी शैतान ने उस बालक का वध करा, पर अविचलित नेत्र से एक आँसू भी धरती पर न गिरा, खुशी के मद में चूर बनवीर ने ज़ोरदार अट्टहास लगाया, एक बेबस और लाचार माँ का कलेजा जैसे मुंह को आया, मृत पुत्र का मस्तक चूमकर अपनी ममता को सहलाया, पुनः सचेत हो राजकुमार की सुरक्षा को निश्चित कराया , कर्तव्यनिष्ठा की राह पर पन्ना धाय ने पुत्र जीवन चढ़ाया, परंतु इस अद्वितीय बलिदान नें मेवाड़ का राजवंश बचाया, किया न्योछावर सर्वस्व जिसने कर्तव्य सर्वोपरि मान कर, अमिट कहानी लिख दी जिसने समर्पण व बलिदान पर, हम किंकर्तव्यविमूढ़ हैं ऐसी माँ के साहस व बलिदान पर, हम कृतज्ञ है ऐसी वीर राजपूतानी के कर्तव्य के भान पर, जब जब इस धरती पर सर्वोत्तम वीरता की बात चलेगी, पन्ना यह तेरी वीरगाथा सर्वत्र दिशाओं को उद्दीप्त करेगी|

8 NOV AT 12:11