Anand Kanaujiya   (Anand)
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Joined 7 January 2019


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1 JUL AT 2:26

माना कि तुझको पा लिया है हमने मगर,
महफ़िल में तुझे ढूढने की आदत नहीं गई।

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13 JUN AT 21:40

काश….. बच्चों सी ज़िद मैं कर पाता
तुझको जाता देखता तो लिपट जाता!

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11 JUN AT 22:30

तेरे आने का इंतजार यूँ हो
जैसे बारिश के इंतजार में मिट्टी ।

तेरे आने का इंतजार खत्म हो 
जैसे बारिश में खत्म इंतजार मिट्टी ।

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11 JUN AT 22:29

प्यार का एहसास साथ रह जाए
जैसे बारिश के बाद गीली मिट्टी ।

तुम्हारे जाने की तड़प ऐसी हो
जैसे बारिश के बाद सूखी मिट्टी ।

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11 JUN AT 8:05

तेरे लौटने का विश्वास यूँ हो, हर वर्ष जैसे
बारिशें गिरती हैं भिगोने को मिट्टी

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11 JUN AT 8:02

मिलो तो अब ऐसे, जैसे
बारिश की बूंद से मिट्टी ।

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10 JUN AT 9:35

तेरे प्यार में यूँ भीग जाऊँ
जैसे बारिशों में ये मिट्टी ।

तेरे लौटने पर आलम कुछ यूँ हो, जैसे
बारिशों में आनन्द को प्राप्त हो मिट्टी ।

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31 MAY AT 22:51

ऐ उम्र इतना भी बड़ा न बनाना कि
अपनों के सामने भी झुक न पाऊँ।
मुझे रहने दे वही छोटा सा बच्चा कि
माँ की गोद में सर रख कर सो जाऊँ।।

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23 MAY AT 23:05

"बीती इस उम्र में एक अरसा देखा
नंगे पैरों से चलकर आसमाँ देखा।"

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13 MAY AT 9:51

तुम्हारी कहानी में मिला कोई ओर-छोर नहीं
कहानी सुनाने का तुम्हें कोई सलीका नहीं
बहुत देर तक सुना पर तुमको समझा नहीं
दिल से मजबूर हो तुम अपने क़ाबू में नहीं।

दिल की बातें करते हो दीवाने मालूम पड़ते हो
किसी के इश्क़ में बेहद घायल जान पड़ते हो
ज़ुबान क़े बजाय शब्द तेरे आँखों से छलकते हैं
चुप रहो कि तेरे हाव भाव पूरी कहानी कहते हैं।

अखिलेंद्र भाई को समर्पित

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