Anand Kanaujiya   (अनुनादित आनन्द)
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Joined 7 January 2019


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Joined 7 January 2019
7 MAY AT 7:46

आज के दौर में, नहीं, किसी भी दौर में सत्य से बड़ा humour दूसरा कुछ भी नहीं है ।

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28 APR AT 9:04

मैंने नशे करके भी देख लिये ऐ दिलरुबा,
ये कदम लड़खड़ाए तो बस तेरे नाम पर ।

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28 APR AT 8:58

ग़र चाहते हो आनन्द मंज़िल पर पहुँचना,
मंज़िल से ज़्यादा रास्तों का ध्यान रखना।

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5 MAR 2023 AT 0:35

सड़क सी है ये ज़िंदगी अपनी
न जाने कितनों से वास्ता आज तक !
गुजरती भीड़ हज़ारों की मगर
सड़क फिर भी तनहा है आज तक !

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10 DEC 2022 AT 10:42

तुझे हमसफ़र बना सकूँ इसलिए ताउम्र सफ़र में रहा,
मैं अपने शहर में भी देखो एक मुसाफ़िर की तरह रहा।

©️®️मुसाफ़िर/अनुनाद/आनन्द/०९.१२.२०२२

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24 NOV 2022 AT 23:51

इसलिए
बस लिखे जा रहे हैं!

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21 NOV 2022 AT 22:34

भटका हुवा ही तो हूँ
तेरे साथ जो नहीं हूँ!

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20 NOV 2022 AT 23:53

बड़ा मुश्किल है तुझको

छोड़कर मुझे जाना...

उसके लिए जरूरी है

हाथों में हाथों का होना।

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20 NOV 2022 AT 23:50

बड़ा मुश्किल है इच्छाओं को

गलत सही के चक्कर में दबाना...

जलराशि खतरे से ज्यादा हो तो

लाजमी है बाँध का ढह जाना।

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5 NOV 2022 AT 23:13

वो दायरा
जिससे बाहर रहकर
लोग तुमसे
बात करते हैं
मैं वो दायरा
तोड़ना चाहता हूँ
मैं तेरे इतना क़रीब
आना चाहता हूँ।

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