Anand Kanaujiya   (Anand)
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Joined 7 January 2019


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14 OCT AT 22:27

जितनी दफा तैयार होकर तुम सामने आते हो,
उतनी दफा हमें तुमसे इश्क़ नया हो जाता है।

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10 OCT AT 2:08

एक शाम की उम्मीद है अब मिलती नहीं क्यों है?
ये रात कमबख़्त तेरे बिना चली आती क्यों है?

बीतती शाम और आती रात से होती अब घबराहट क्यों है?
ये चाँद, सितारों और ठंडी हवा से होती शिकायत क्यों है?

अब तो छुट्टियों से डर लगता है न जाने ये मसला क्यों है?
बाहर का शोर तो ठीक लेकिन खामोशी से डर लगता क्यों है?

ये खाली सड़क, ये रोड लाइट ये सब खामोश क्यों हैं?
अकेले खड़ा मैं इधर, अगल-बगल में तू नही क्यों है?

बैठा हूँ बालकनी में शान्त मगर मन मेरा बेचैन क्यों है?
सब कुछ तो है पाया मेरे पर लगे कुछ खोया क्यों है?

खूबसूरत इन गमलों में फूल लगते इतने साधारण क्यों हैं?
खुशबुओं में इनकी मन मेरा तलाशता तेरा चेहरा क्यों है?

समय काटने को व्हिस्की है मगर इसमें न नशा क्यों है?
खत्म बोतल है पर अब न कोई हो रहा असर क्यों है?

दोस्त हों, दौर चले और बातें खूब हों मन ऐसा चाहता क्यों है?
उन बातों के दौर में जिक्र तेरा हो केवल, दिल चाहता क्यों है?

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9 OCT AT 19:35

अन्तर!

एक तुम हो, तुम्हारी सड़कें भी रोशन हैं,
एक हम हैं, हमारे घर में भी अंधेरा है।

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7 OCT AT 21:55

हमने यूँ ही दिल का कुछ इधर लिख दिया,
तुमने गुजरते हुए यहाँ से थोड़ा सा पढ़ लिया,
कुछ पल को ही सही दोनों एक जगह पर थे,
इस तरह दो दिलों ने इश्क मुकम्मल कर लिया।

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6 OCT AT 0:16

#चकाचौंध

कहते हैं तेरे शहर में चकाचौंध बहुत है,
मान लिया इन बातों में सच्चाई बहुत है।

होती नहीं यहाँ रात कि रोशनी बहुत है,
लेकिन मुझे फिर भी अफसोस बहुत है।

मन मेरा पागल तुझे यहाँ ढूंढता बहुत है,
कोशिशों के बावजूद नही राहत बहुत है।

तेरा चेहरा सामने न हो तो क्या बताएँ,
मेरी इन आँखों में रहता अँधेरा बहुत है।

©️अनुनाद/आनन्द कनौजिया/०५.१०.२०२०

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6 OCT AT 0:13

#चकाचौंध

कहते हैं तेरे शहर में चकाचौंध बहुत है,
मान लिया इन बातों में सच्चाई बहुत है।

होती नहीं यहाँ रात कि रोशनी बहुत है,
लेकिन मुझे फिर भी अफसोस बहुत है।

मन मेरा पागल तुझे यहाँ ढूंढता बहुत है,
कोशिशों के बावजूद नही राहत बहुत है।

तेरा चेहरा सामने न हो तो क्या बताएँ,
मेरी इन आँखों में रहता अँधेरा बहुत है।

©️अनुनाद/आनन्द कनौजिया/०५.१०.२०२०

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5 OCT AT 1:49

तू खास था या नहीं, नहीं पता!
मगर तुझे देखकर जो ख्याल आते थे .....
वो बेहद खास थे।

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5 OCT AT 1:30

अब सोचता हूँ कि,
तुझे पाना चाहता भी हूँ या नहीं?
तेरे पास होने से कहीं,
अब मुझे तेरी यादों में ज्यादा मजा आता है.....

और अब तो यूँ है कि,
कभी-कभी खुद के ख़्यालों में उलझ जाता हूँ,
तेरे साथ होने से कहीं,
तेरे साथ की बातें करना ज्यादा खूबसूरत हैं?????

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29 SEP AT 22:20

है योग्यता हममे, हम आज भी अपना हित साध सकते हैं,
हम किसी कोरपोरेट या फिर देश के बाहर भी जा सकते हैं।

मगर देश भक्ति का जज़्बा लिए हम सरकारी सेवाओं में आयें हैं
समाज की भलाई को लेकर हम सब संघर्षों को गले लगाएँ हैं।

निजीकरण बर्दाश्त नहीं ये हमारे और गरीब जनता के साथ धोखा है,
देश की प्रगति में साधक बिजली को हमने ही ग़लत हाथों में जाने से रोका है।

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29 SEP AT 22:18

ये बिजली है आम जन मानस का हक़ और सबको ज़रूरी है,
बिना किसी लाभ-हानि के इस पर सरकारी नियंत्रण ज़रूरी है।

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