Anand Kanaujiya   (Anand)
154 Followers · 157 Following

read more
Joined 7 January 2019


read more
Joined 7 January 2019
YESTERDAY AT 0:07

शाम का चाँद

आज चाँद को शाम में ही निकला हुवा देखा,
तेरे इश्क़ में उसने समय का ख्याल ही नहीं रखा। 


पाने को झलक तेरी वो दीवाना आतुर बड़ा था,
पागलपन में देखो वो रात से पहले आकर खड़ा था।

©️अनुनाद/आनन्द कनौजिया/२४.०१.२०२१

-


19 JAN AT 16:23

उनकी ख़ूबसूरती की कैसे और कितनी तारीफ़ की जाए ग़ालिब...
वो अपने पैरों में कला धागा भी पहन लें तो वो भी गहना हो जाए!

-


14 JAN AT 8:13

अधूरी मुलाकात...

ये जो तुम आधा सा मुस्कुराते हो,
कोई बात होठों से दबाकर रखना चाहते हो!

दिल की बात करूँ, कुछ पूँछूँ, तो मौन रहते हो,
मगर सामने खामोश खड़े रहकर तुम सब कह देते हो!

खामोशियाँ भी हमेशा काम नहीं आती देखो,
तुम अपनों से ऐसा भी क्या राज रखना चाहते हो!

एक उम्र मिली है तुमको हमको जीने को,
क्यूँ नहीं इसके कुछ पल खुलकर साथ मेरे बिताते हो!

एक झलक ही मिली थी कि तुम चल दिये,
आ जाओ कि आँखों की प्यास और क्यूँ बढ़ाते हो?

©️अनुनाद/आनन्द कनौजिया/१३.०१.२०२१

-


13 JAN AT 23:35

ये जो तुम आधा सा मुस्कुराते हो,
कोई बात होठों से दबाकर रखना चाहते हो!

-


5 JAN AT 23:47

तेरी !




मेरी !



हमारी।

-


26 NOV 2020 AT 0:35

साथ होते हो तो दूर जाने का डर लगा रहता है, तुम्हें पता था!
ख़त्म करने को मेरा डर इतनी भी दूर जाने की क्या ज़रूरत थी?

-


26 NOV 2020 AT 0:34


तेरे साथ की खुशबू से सराबोर महक रहा हूँ इस कदर,
कि इत्र के सौदागर थे और हम अपना सारा कारोबार भूल गए।

-


26 NOV 2020 AT 0:29

कितना कुछ दिया है ऐ जिन्दगी तूने जीने को,
कितना कुछ रोज रह जाता है मेरे समेटने को!

तू ही बता ऐ नींद कैसे गले लगा लूँ तुझे मैं,
मंजिल को दो कदम ही बढ़ा था और रात हो गई।

ये सूरज सुर्ख लाल है बिल्कुल मेरी तरह लगता है,
इस ढलती शाम से बेहद नाराज लगता है।

-


26 NOV 2020 AT 0:25

एक सीख है जो तू दे गया मुझे, अब ताउम्र साथ रहेगी,
होशियार था तू, तुझे पता था कि ये साथ उम्र भर का नहीं।

-


11 NOV 2020 AT 1:03

तुम लड़ते रहे हमसे दुनिया की रवायतों के खातिर...
और हम हैं कि, इक तेरे खातिर, सदा ख़ामोश रहे ...!

-


Fetching Anand Kanaujiya Quotes