Amandeep Singh   (MannसेAman)
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Insta: waah.amandeep

New Story ("Phir Meri Yaad") 👇
Joined 22 December 2016


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Amandeep Singh 15 AUG AT 21:16

सुर्ख़ रंग, होंठों से उड़ के, नाख़ूनों पर जा बैठे
इस दिल पे तेरा कब्ज़ा है, दूसरा कोई क्या बैठे

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Amandeep Singh 31 JUL AT 15:53

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हमें चूम के ज़ेहन में उनके दूसरा कोई आता था
हमने जन्नत में, यारों, दोज़ख की खाई देखी है
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(पूरी रचना अनुशीर्षक में पढ़ें 👇)

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Amandeep Singh 29 MAY AT 22:19

होगा तू मल्लाह, पर अस्ल में, 'वो' शामिल है
कश्ती और किनारे के वस्ल में, 'वो' शामिल है

कोशिश करता है चाँद बने, बन नहीं पाता
जुगनू की इस नाकाम नक्ल में, 'वो' शामिल है

एक झटक में इल्म हुआ, मेरी चाहत का उसे
बोला बस ये, "आपकी शक्ल में 'वो' शामिल है"

अह्ल-ए-ईमान, किस बात का ग़ुरूर है तुझे
क़ाफ़िरों की भी हरेक नस्ल में, 'वो' शामिल है

फूल पसंद थे, तोड़ सकते थे, लेकिन उन्हें
पानी दिया, शुक्र है, अक्ल में 'वो' शामिल है

मर जाना चाहता था 'अमन', जुदाई के बाद
मौत में जो पड़ गया, उस दख्ल में, 'वो' शामिल है

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Amandeep Singh 20 MAY AT 18:46

जाने जाना, तुझे बात ये, खलती क्यूँ नईं यार
तेरी मेरी, साथ, लकीरें चलती क्यूँ नईं यार

साल-हा-साल जनम दिन मेरे, निकल जाते हैं
तू ही मगर, दिमाग से, निकलती क्यूँ नईं यार

तेरे दिल में 'अमन' की अब चिता जलती है
तेरे दिल में आग 'अमन' की, जलती क्यूँ नईं यार


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Amandeep Singh 10 MAY AT 15:37

"म्हारी नर्स गांधारी से कम है के"

घुटने पर चोट लगी थी, सो ड्रेसिंग करवाने ऑफिस के मेडिकल रूम में गया। नर्स कहती, "कैसे करवाओगे, चेंज करने के लिए कुछ है?"। मैंने कहा, "नहीं, कोई मेल कंपाउंडर कर सकता है क्या?"। कहने लगी, "है तो, पर उसे आता नहीं है ड्रेसिंग करना"।

तब तो मैं भी सोच में पड़ गया कि करवाना भी ज़रूरी है और यहाँ कोई उपाय भी नज़र नहीं आ रहा। अचानक से नज़र, मरीज़ बिस्तर पर पड़ी, जहाँ प्लास्टिक में बंद, नयी बेडशीट पड़ी थी। मैंने पूछा, "अगर आपको कोई दिक्कत ना हो तो मैं ये बेडशीट बाँध लूँ क्या?"। नर्स अच्छी थी, परमिसन दे दिया और बाहर निकल गयी।

घुटने के ऊपर तक बेडशीट बाँध के नर्स के सामने जाते हुए मुझे बिल्कुल वैसे ही अजीब लग रहा था जैसा कि महाभारत के युद्ध की सत्रहवीं रात दुर्योधन को लगा होगा, जब वो केवल एक गमछा बाँधे, अपनी माँ, गांधारी के प्रतीक्षा-कक्ष में उनके सामने निर्वस्त्र गया था। तब, गांधारी ने अपनी शक्तियाँ प्रदान कर, उसके बदन को वज्र सा बना कर, युद्ध के प्रहारों से उसे इम्यून किया था... और आज नर्स ने अपनी ड्रेसिंग शक्तियों से ड्रेसिंग कर, पट्टी बाँध कर, मेरी चोट को बैक्टीरिया के प्रहारों से इम्यून किया है।

म्हारी नर्स गांधारी से कम है के!

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Amandeep Singh 26 APR AT 23:14

रूह के हर कोने से सारे ग़म, कुछ यूँ परतें बना रहे हैं
के हम शहर में अपने लापता होने के पर्चे बंटवा रहे हैं


बीस साल से नहीं बतायी, फ़िर भी माँ क्यों कहती हैं
पापा को बतलाना मत, जो बात तुम्हें हम बता रहे हैं

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Amandeep Singh 25 MAR AT 20:01

जाने सहरा की अना किसने ऐसे पटकी है
दूर दिखाई दे रही, पानी की एक मटकी है

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Amandeep Singh 22 MAR AT 23:45


"विश्व भ्रमण"

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Amandeep Singh 17 MAR AT 15:55

चेहरे पे हँसी, दिल में उदासी रक्खी
मैं दरिया रहा, पर आँखें प्यासी रक्खी

नींद सुकूं की, अपनी जाँ को दी मैंने
ख़ुद के हिस्से में केवल उबासी रक्खी

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Amandeep Singh 10 MAR AT 0:59

घर में बच्चा हुआ, अंततः, जश्न मना

कुर्बां बच्चियाँ हुईं क्रमशः, जश्न मना


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