Alok   (Alok Maurya)
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Joined 12 December 2020


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Joined 12 December 2020
6 AUG 2021 AT 1:00

हजारो फूल देखें हैं इस गुलशन में मगर
तुम जैसा कोई नहीं देखा!

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19 JUL 2021 AT 20:48

कोई हो ना हो, इक सितारा हो सामने
मेरी नजर में हों वह, इक नजारा हो सामने

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10 JUL 2021 AT 0:57

सफर जिंदगी का
कितना अजीब होता है
हम कभी चाहते हैं कितनो से मिलना
और कोई मिल जाता यूं ही अचानक से
जिसमें हमें शीतलता नजर आती है
मन होता कि उसके छांव में ही हम बैठे रहे
फिर वह मुलाकात
सिर्फ मुलाकात नहीं रहती
वह मुलाकात उतर जाती है दिल में
कुछ ख्वाबों को सजाएं
हम रास्ते में आगे तो बढ़ जाते हैं
मगर वह छोटे ख्वाब ही
हमारे दिल में प्यार की तरह उतर जाते हैं!
हां तुम प्यारे हो मेरे इस दिल को
शायद यह बात तुम भी तो जानते हो!
हां मुझे रास्ते में वापस जाने का मन करता है
हां तुमसे मिलने को दिल करता है!!

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6 JUL 2021 AT 16:11

खाली खाली सा यह सफ़र है
राहों में ही खो जाता हूं मैं
इक राही से मिलने की चाहत में
छाया में बैठ जाता हूं मैं !

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5 JUL 2021 AT 0:05

मैं चाहता हूं इक मुलाकात
जिसमें मैं और तुम और साथ में हो
चाय का एक कप
जो तुम पीना
ताकि मैं चाय ना पीकर
तुम्हे देख पाऊं जी भरके!
चाय पीते हुए
ऐसा नहीं की मुझे चाय प्रिय नहीं
पर मेरे लिए चाय से
कहीं ज्यादा प्यारे हो तुम!

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4 JUL 2021 AT 13:36

मैं चाहता हूं इक मुलाकात
जिसमें मैं, तुम और साथ में हो
चाय का एक कप!

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30 JUN 2021 AT 19:32

तुम कहते हो उसमें खामियां हैं
पर मुझे खूबियां ही नज़र आती हैं
हद तो यह है तुम चाहते हो
मैं देखूं उसको तुम्हारे नज़र से !!

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30 JUN 2021 AT 14:32

कभी इसमें मिलता है सुकून तो कभी जलन होती है
यह धूप भी कितनी गजब होती है!

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4 JUN 2021 AT 19:57

राही, तुम देखते हो
रवि के तेज में छाया की तरफ
जिसकी शीतलता ही
तुम्हें मंजिल सा प्रतीत होती है।
जहां पहुंच तुम चाहते हो ठहरना
यह चाहत रोक सकती है तुम्हें
रास्ते पर आगे बढ़ने से।
पर राही!
तुम्हें सीखना होगा
लगातार चलने का हुनर
रास्ते में मिलने वाले खूबसूरत पलों को
प्रणाम करने का हुनर।
तुम्हें समझना होगा
इन रास्तों में कोई मंजिल ही नहीं है,
अतः तुम जलाए रखना
ख्वाहिशों की ज्योति
शायद यह ज्योति ही तुम्हें
प्रेरित करेगी
लगातार चलने के लिए
राही तुम्हारी पहचान तो रास्तों से ही है,
पर तुम देखते हो
तपती धूप में मंजिल की तरफ।।

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27 MAY 2021 AT 21:27

जो जैसा है उसको वैसा कहने का आदी हूं
वो क्या है कि मैं थोडा़ जज्बाती हूं!

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