19 MAY 2019 AT 17:03

शेर-ओ-शायरी तो दिल बहलाने का ज़रिया है जनाब,
लफ़्ज़ काग़ज़ पर उतारने से महबूब लौटा नहीं करते।

- गुमनाम_सिकंदर