मेरा ख़्वाब था यूं जैसे मुझे हासिल था वो,
महफ़िल में मगर किसी और के साथ शामिल था वो।।
मेरी नम आंखों के तहखाने चराग जल उठा था,
थमी सांसों पे सवाल के सचमुच मेरे काबिल था वो ?
मुझे कुरेदती रहीं फिर बेबुनियाद यादें तेरी,
वो सरमाया था मेरा कभी, कभी मुस्तकबिल था वो।।
सफ़र में हमसफ़र बदल लिया था जिसने,
मेरा वहम था कभी के मेरी मंज़िल था वो।।
ठेस खाकर मैं सादादिल हैरान हुआ यूं शायद,
दिल फरेब नहीं जानता था जाहिल था वो ।।-
30 NOV 2022 AT 19:43