दिल तिरा बे-क़रार हो जाए
काश तुझको भी प्यार हो जाए
तुझपे मरती हूँ ख़ुद से ज़्यादा मैं
तुझको भी ऐतिबार हो जाए
रक्स करने लगेगी ये दुनिया
गर तुझे सच में प्यार हो जाए
साथ देना मिरा हमेशा तुम
राज गर आश्कार हो जाए
फ़ख़्र मुझको मिरी मोहब्बत पे
इश्क़ अब बेशुमार हो जाए
शिर्क़ गन्दा गुनाह है मालिक
क्यों भला शर्मसार हो जाए
ख़्वाब से तुम बने हो ख़्वाबीदा
अब हक़ीक़त में यार हो जाए
रात दिन बस तिरी इबादत की
तू ख़ुदा एक बार हो जाए
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लाश बहकर किनारे लग जाए
हम भी गंगा के धारे लग जाए
मेरी किस्मत बदल भी सकती है
बे - सहारे, सहारे लग जाए
ये मेरी ओढ़नी भी चमकेगी
इसमें दो-चार तारे लग जाए
ये भी मुमकिन है फ़ायदा ही हो
ये भी है कि ख़सारे लग जाए
मैंने चाहा कि साथ हो हम लोग
ये न हो की दरारे लग जाए
क्या पता किसका साथ दे मालिक
किस्मतों के इशारे लग जाए-
एक ही साथ दुश्मन भी संभाले हमने
आस्तीन एक थी सांप कई पाले हमने
वो मुझे छोड़ रहा था और हम चुप थे
जाते हुए पैरों के नहीं देखे छाले हमने
अपनी ही मौत की तैयारियों में थी मैं
घर के पंखे में है रस्सी को डाले हमने
लाख कोशिश कि काम नहीं हो पाया
फिर किया खुदी आग के हवाले हमने
मेरे होने से है घर के अंदर वीरानियाँ
अपने ही नाम के हटाए हैं ये जाले हमने
मैं ही घर की बहुत स्याह कोई रूह थी
होके राख़ वो दाग़ हटाए काले हमने-
रोशनी थी तुम्हारे होने से
अब उदासी है चारों कोने से
कितनी ज़्यादा तिरी ज़रूरत है
ये पता चल गया है खोने से
सब्र से काम लो ये आयत है
कुछ भी हासिल नहीं है रोने से
तेरी चाहत अगर ये दुनिया है
फिर तो हासिल नहीं है सोने से
करके तौबा ये दाग़ जायेगा
दाग़ जाए न मुँह को धोने से
ठीक होगा पता नहीं शायद
क़ब्ल जो काटकर है बोने से-
अब तो हम बात भी नहीं करते
क्या करूँ शायरी नहीं करते
कोशिशें कामयाब कब होंगी
हम तो अब खुदकुशी नहीं करते
हम को नाकामियों ने घेरा है
यूँ ही हम तीरगी नहीं करते
शोर तन्हाइयों का कमरे में
ख़ौफ़ तन्हाई भी नहीं करते
लाश बहकर किनारे लग जाए
बात कुछ भी सही नहीं करते
कोई आए, रुके, चला जाए
चाहतें अब तेरी नहीं करते
ये सितंबर ख़तम नहीं होता
ये सितम फरवरी नहीं करते
आख़िरी सब समझ के लिखती हूँ
कुछ भी हम आख़िरी नहीं करते-
यहाँ पहचान की जो बस्तियाँ थीं
उन्हीं में खेलती कुछ लड़कियाँ थीं
इधर से देखती थी ख़्वाब अपना
इसी घर में बहुत सी खिड़कियाँ थीं
सहारे जिसके मैंने चलना सीखा
मेरे बाबा कि वो बस उंगलियाँ थीं
मुलायम हाथ जैसे कोई टहनी
इसी पर बैठती सब तितलियाँ थीं
हमारा गांव में गुज़रा है बचपन
यहीं तालाब में कुछ मछलियाँ थीं
कमाने आ गए परदेश हम भी
मगर गांवों में मेरी खेतियाँ थीं
लगे हैं जिस्म पर ये ज़ख्म जितने
हमारे दोस्त की ही बरछियाँ थीं-
मैं तुम्हें अब छोड़ भी सकती नहीं हूँ
हाँ ये रिश्ता तोड़ भी सकती नहीं हूँ
जिस वरक पर नाम तेरा लिख दिया है
वो वरक मैं मोड़ भी सकती नहीं हूँ
कर दिया बरबाद मैंने इश्क़ में यूँ
हाथ तुझसे जोड़ भी सकती नहीं हूँ
तुमसे वादा कर लिया ज़िंदा रहूँगी
दर्द में सर फोड़ भी सकती नहीं हूँ
मार डाला ख़ुद को मैंने इस तरह से
ख़ुद को अब झिंझोड़ भी सकती नहीं हूँ
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ज़िंदगी का ख़तम सफ़र सुन लो
मौत की मेरी अब ख़बर सुन लो
मुझको तेरी वफ़ा ने मार दिया
ज़हर का है नहीं असर सुन लो
वैसे तो तुम बात भी नहीं सुनते
जाते जाते मेरी मगर सुन लो
साथ देना हमारा तुम हरदम
तुम ही हो मेरे हमसफ़र सुन लो
जाते जाते है ये इल्तिज़ा तुमसे
ख़ैर छोड़ो दर-गुज़र सुन लो-
एक दरिया के दो किनारे हम
क्या तुम्हारे तो क्या हमारे हम
तुम जो होते तो ज़ख्म भर जाते
कैसे दिल की भरें दरारे हम
ज़िस्म बैसाखियों का आदी है
ख़ुद के चलते नहीं सहारे हम
मेरी बातें उसे तकल्लुफ़ दें
ज़िंदगी किस तरह गुज़ारे हम
उसका होना मिठास है समझो
और उसमें हैं यार खारे हम
वो हमारा नहीं रहा जानी
उसको कैसे करें इशारे हम
देखकर मुझको मत दुआ मांगो
एक टूटे हुए सितारे हम-
कैसी ख़बर थी मौत की जो काम कर गई
हिम्मत भी अपनी हार के लड़की वो मर गई
जो लोग घर में रहते थे वो खुश बहुत हुए
साज़िश हमारी खूब थी बच्ची वो डर गई
जो शख़्स अपना खास था वो दूर हो गया
हाथों से अपने देख लो मैं क्या ही कर गई
मुश्किल सफ़र में साथ मेरा छोड़ना नहीं
ये बोल कर वो गोद में मेरे बिखर गई
मेरे ख़ुदा तू खूब है तेरी नवाज़िशें
तूने निभाया साथ तो जाकर निखर गई-