rishabh myjoopress   (©myjoopress)
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Joined 4 May 2019


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13 NOV AT 22:49

As a general rule of thumb, a person can survive without water for about 3 days. However, some factors, such as how much water an individual body needs, and how it uses water, can affect this. Factors that may change how much water a person needs include: age.

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13 AUG AT 0:35

एतबार हर किस्से पर हम यूँ ही कर लेते हैं
ना समझ हैं तभी तो हम कुछ भी कह लेते हैं

सोच कर रिश्ते बुनना हमें थोड़ा कम सा आता है
पर जिसको भी माना अपना उसके लिए खजाना हैं
हम उसके लिए खजाना हैं

-ऋषभ कुमार

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31 MAR AT 21:54

जिन्दगी आसान हो जाती है
जब ये एहसास होता है कि आपको जरूरत तो किसी की नहीं
पर वो एक ही काफी है जो आपका इस दुनिया पर विश्वास
दोबारा ला सके

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30 MAR AT 9:01

जल जल कर जो खाक हों, जल जाने दो उन्हें
जल जल में जो करे फर्क, जल मोल क्या वो जाने
कल कल की बातों में, हर कल जो गवा दे
कल कल की चाहत भी, क्या ही रखेंगे वे बिचारे
-Rishabh kumar

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22 MAR AT 12:12

craving for ups
yet living in downs
looking for bread
snoring in house

passing the days
upto nights
chilling as i saved
any of spice

i make wonder
why i thunder
upon those vibes
cause left all cries

no one's fault
mine just hikes
melodious delusions
keeps the device

crescent moon
lurking doom
peeps at ages
passing so soon

again He recite
my recipe binds
waking the awake
without a demise

looking at self
rowing the raft
with my shaft
staring stars

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17 MAR AT 17:07

नजर में आके भी नजरअंदाज कर जाना
नजरों मे देखे बिना, नजरों से गिर जाना
नजर ना लगे इस खातिर, नजरें मिला न पाना
नजारों की हर बात, नजरों में कह जाना
नजर का है कसूर, नजरिया नहीं बदलना
नजर नजर का है जो फर्क, फक्र उसी का रखना
नजर में जो भी आए,नजरिया उसे बनाए
नजरिया जाँचे बिना, नजर में वही बसाए
धुँधली है जिनकी नजर, नजारें क्या बदलेंगे
नजरों में रहके ही, नजरअंदाज ही करेंगे
नजरअंदाज कर ही देंगे

-ऋषभ कुमार

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15 MAR AT 16:44

जरूरत भी क्या है बातों की
बातें हर रोज किया करते हैं
जरूरत भी है क्या वादों की
बिन कहे जो रोज शिफा बनते हैं
कुछ यादें, कुछ किस्से
किस्मत में, ना हुए तो क्या हुआ
कुछ जख्म, मेरे हिस्से
ना हुए तो क्या हुआ
जरूरत है वो, जरूरी तो नहीं
साथ ही हैं वो, साथी ना सही।

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10 MAR AT 12:19

जिंदा हो, जिंदगी का एहसास तो रखो
दुविधाएँ रहेंगी, खुद पर विश्वास तो रखो
तलाश खत्म होने तक, वो प्यास तो रखो
कुछ कर दिखाने की, वो बात तो रखो

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4 MAR AT 16:27

कुछ खामोशी
रखनी है अभी
सैलाब थोड़ा ऊँचा
उठना जरूर चाहिए

बातें, अब से कम
करनी है अभी
और नाम बने काम से
गर्व बढ़ना तो चाहिए

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12 FEB AT 22:02

कुछ राज तुम भी खोलो।
कुछ साज हम सुनाएँ।
क्यों काज हो ही ऐसे कि,
कुछ बात हम छिपाएँ।
हाँ समझ ना सके हम तो,
कुछ धैर्य तुम भी धरना।
जो बात हो तुम्हारी,
कहते, हमें भी समझना।— % &

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