Neelesh Maheshwari  
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Joined 17 February 2018


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27 FEB 2018 AT 1:48

हुंकार भरी आज हमने
दम लेंगे हम जीत के .
हम चलेंगे , हम लड़ेंगे
इस अन्धेरी रात में .
हुंकार भरी आज हमने
दम लेंगे हम जीत के .

भोर नयी होगी रे साथी
मिटेंगे जाति के भेद रे .
गुलामी की बेड़ियाँ हटेंगी
साँस लेंगे आजाद नभ में रे .
हुंकार भरी आज हमने
दम लेंगे हम जीत के .

सीमाओं पर ना शीश कटेंगे
होगी अमन की शाम रे .
प्यार भरी ये दुनिया होगी
इन्सानियत होगी धर्म रे .
हुंकार भरी आज हमने
दम लेंगे हम जीत के .

© नीलेश माहेश्वरी

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18 FEB 2018 AT 17:47

जीवन पथ पर
इस कठिन डगर पर
कांटो भरी राहो से
गुज़रना जरूरी है
हे पथिक ! तेरे लहू और इस धरा का पवित्र संगम जरूरी है.

साजिशो के जाल है
तेरे कदमो की ताल से
कईयों के हाल बेहाल है
कश्तियां ना मिलें ,ना सही
डोगियों के सहारे ही
वैतरणी पार करना जरूरी है
हे पथिक ! तेरे लहू और इस धरा का पवित्र संगम जरूरी है.

वार हजारो सहने है
कर्म करते जाना है
जब बुझ्ने लगे लौ
तब नव ज्योति प्रज्वल्लन जरूरी है
हे पथिक ! तेरे लहू और इस धरा का पवित्र संगम जरूरी है.

©नीलेश माहेश्वरी

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18 FEB 2018 AT 14:13

किसी पिंजरे मे कैद था जो
आज आजाद है वो
हाँ , अब आजाद है वो .

तैयार है वो भरने को उङान
चौटिल पंख , पर है दिल मे अरमान
लहू से रंगने को ज़मीन और आसमान
आज बेकरार है वो
हाँ , अब आजाद है वो .

©नीलेश माहेश्वरी

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18 FEB 2018 AT 14:04

संघर्ष जारी है
कदम कदम बढाकर
चलना जारी है.

ठोकरे हर दर पर
इस डगर मुश्किल पर
पर दूर उस चौखट पर
आशा की एक किरण अभी बाकी है
संघर्ष जारी है.

हर एक देहरी पर
अलख जगाने जाना है
नव अंकुर सृजन के लिए
अपनी देह को जलाना है
अभी पूर्ण आहुति नही है
चाहे मेघ कितने ही बरसे
जलते जाना है
संघर्ष को बढ़ाना है
बस चलते जाना है.

-© नीलेश माहेश्वरी

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