Khyati Gautam   (Khyati)
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All that lies within is supreme!
Joined 13 November 2016


All that lies within is supreme!
Joined 13 November 2016
2 APR AT 20:34

एक दिन आप यूँ हमको मिल जाएंगे
ख्वाबों के गुल हमारे फिर खिल जाएंगे
हमने सोचा न था
हमने समझा न था।

एक दिन आप हम बात करते रहें
वक़्त कटता रहे, यादें बुनती रहें
राज़ जो दिल में हों
आंखें कहती रहें।

एक दिन आपसे वो भी कह जाएंगे
जो कहने से अब तक हम डरते रहे
न हो कोई गिला, न ही शिकवा कोई
दिल जो दिल से मिलें
ग़ज़लें बनती गयीं।

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6 APR 2021 AT 22:24

I wanted to discover
My heart's deepest desire
And how I could fulfil it;
In all the years that followed
I found my ultimate answer.

I desire absolute freedom
What reading books always gives me.

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5 APR 2021 AT 21:17

कितना खुद को निराश करना
दिल को तकलीफ देता है।

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4 APR 2021 AT 22:44

अक्सर इस ज़माने में
हम खुशियाँ बहुत ढूँढ़ते हैं
पर जिसकी तलाश रहती
वो शायद बैठा दुबककर अंदर होता है।

अक्सर मंज़िलों तक पहुंचने वाले
रास्ते हम ढूँढ़ते हैं
पर जो रास्ते आँखों के सामने होते
उन पर चलने से डरते हैं।

अक्सर इस ज़माने में
हम एक दूसरे से कम मोहब्बत करते हैं
नफ़रतों के दिये का तेल
हर रोज़ प्रेम से बदलते हैं।

अक्सर इस ज़माने में
हम ख्वाहिशों और ख्वाबों की कीमत लगाते हैं
और अधूरे सपनों की बाज़ी
समझौतों से बेपरवाह होकर लगाते हैं।

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3 APR 2021 AT 23:21

A beautiful world unfolds before me
As I close my eyes and open my mind,
In its full glory, replete with different hues,
A world that is by far the most kind.

A world where each human talks with a smile
Where each conversation or even a cursory salutation,
considered pretty much menial
brims with ecstasy and a longing to build connection.

A world that smells of a combination
of all the possible fragrances,
The one that looks akin to a sunflower
Basking in the glory of respecting each other's existence.

A world that hums soft music and sings songs
More than throwing cuss words and expletives
A world that sways in a rhythmic motion
After seeing the rainbow of opinions.

A world that has people lifting each other up
Leading from the front and holding each other's back
A world that stands firm on the tenets of humanity
Come what may, a calamity or mayhem!

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2 APR 2021 AT 23:18

टूटे ख़्वाबों की भरपाई कैसे हो
चुभते टुकड़ों से रिहाई कैसे हो।
मैं खो चुकी हूँ जिस शख़्स को
उससे एक बार फ़िर मुलाक़ात कैसे हो।

मैंने चाहा जो आसमान अपने हिस्से का
उसे हासिल करने की कोशिश तो हुई,
पर जो नाकामयाबी हाथ लगी
उसका इलज़ाम किसकी साज़िश पर हो।

क्या है वो किस्मत का खेल
जो करता हमें अपनी मंज़िलों से दूर,
या है लानत मेरी शिद्दत की कमी पर
जो हर ख्वाहिश मेरी अधूरी हो।

हाथो की लकीरों पर आँसू बहाऊँ
या दिल के दर्द की दवा ढूंढ लाऊँ,
किस जगह मिलेगा सुकून इस मुसाफिर को
जिसके रस्ते महज़ कांटो की चादर और मूसलाधार बारिश हो।

जज़्बा कुछ नाकाफ़ी था या थी मैं कुछ नाक़ाबिल
किस धुप को साया समझ
मैं बेफिक्र सी सोती रही कुछ देर और,
ये था शायद ख़ुदा को मंज़ूर
कि मेरी हार का ज़िम्मा मेरे ही सर हो.

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1 APR 2021 AT 22:50

As I sit today,
in front of my laptop's a bit too bright screen
for writing a poem,
my eyes hurt, my fingers barely move,
my heart brims with messed up thoughts
and my soul aches for not being able to express, anymore.

I don't know when and how
my life came down to this
this point of emptiness that stretches far,
far beyond all the infinities.
I couldn't see it coming
for the longest part of the time
And yet here I am staring at it,
the one which should not be named at all,
with my drooping eyelids and burning heart.

When does an artist lose himself?
Is it in the rush of life or
In the battle against one's own mind or
In our incapacitated creativity succumbing to ruins of time or
Is it really lost ever? Maybe, the art is waiting
for me and my will and my passion
to paint the canvas.

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14 MAR 2021 AT 7:34

हम तमाम उम्र कुछ बनने में निकाल देते हैं,
और जो हम होते हैं,
उसे ठीक से कभी न जान पाते हैं,
न ही जी पाते हैं।

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30 APR 2020 AT 22:07

फ़िर हम नहीं मिले
दिनों, हफ़्तों, महीनों, सालों तक।
सच कहूँ तो याद जब भी हो आती है
मुझे हम दोनों की
इस पत्ते को जी से लगा लेती हूँ
मन फ़िर वैसे ही चहक महक उठता है।

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29 APR 2020 AT 22:26

देखते देखते
तुम यूँ उड़ चले
महफ़िल रोती रही
आप हँस कर निकल गए।

तुम कहते रहे कहानियाँ
कुछ आँखों से
कुछ मुस्कानों से
जज़्बात दिखाते आप
महसूस हम करते रहे।

बात थी एक
जैसे तुम जिया करते थे
जैसे तुम अपनी कला से
प्यार किया करते थे।
याद रखेंगे हम।
याद रखेंगे तुम्हें।

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