Vikas Mishra   (विकास मिश्रा)
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लिखना नहीं जानते..बस शौक है तो झाड़ रहे है..
Joined 3 July 2017


लिखना नहीं जानते..बस शौक है तो झाड़ रहे है..
Joined 3 July 2017
Vikas Mishra 4 APR AT 22:59

दुनिया से कहते फिरते हो कि सफ़र में हो
साफ़ क्यों नहीं कहते कि कोई घर नहीं?

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Vikas Mishra 10 MAR AT 23:57

ये शहर हमको धीरे धीरे रिझाता है
ये शहर हमपे चुपचाप मुस्कुराता है!

बुलंदियों से ऊंची इमारतें बनाकर
ये रोशनी से अंधेरे को छुपाता है,
फिर उसी रोशनी की चकाचौंध से
ये हमको बड़े सलीके से गिराता है..

ये आसमान से तारे गायब करके
हमारी राहों में सितारे बिछाता है
फिर उन सितारों की एवज़ में
हमसे हमारा चांद भी ले जाता है

ये हमसे सारी राहें भुलवाकर
खुद मंजिल का पता बताता है
और उस मंजिल की तलाश में
हमसे हमारा ही घर छुड़वाता है

ये एक कोने में खड़े होकर
हमको गांव से शहर बनाता है,
ये शहर हमपे चुपचाप मुस्कुराता है!

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Vikas Mishra 6 MAR AT 0:45

चेहरे पर पड़ती हुई कुछ लकीरें
माथे पर जरूरत से ज्यादा शिकन
आंखों में सदियों से रुकी उदासी
आत्मा पे दागे गए सवालों के निशान

इन सबके बाद भी
उसने खुद को चमकाया..
आज उसने फ़ोटो पर
एक नया फिल्टर लगाया!

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फिल्टर!

#yqhindi #yqbaba #poetry #life

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Vikas Mishra 29 JAN AT 0:47

ये दुनिया जब ख़त्म होने को होगी

तो कवि अपनी तल्ख़ कलमों से
कोई कविता नहीं लिखेंगे
बल्कि अपना अस्तित्व संभालेंगे

पुरुष खोकर अपना पौरुष
तमाम प्रलाप विलाप के बीच
बस इस विध्वंस को कोसेंगे

स्त्रियां हो जाएंगी उद्विग्न
वो सारी ममता को त्यागकर
मात्र अपने प्राणों का सोचेंगी

मेरे बच्चे! अगर हो सके
तो तुम उस वक्त चिल्लाना मत,
तुम बस कुछ आंसू बहा देना

मैं चाहता हूँ कि ये दुनिया
तुम्हारे आँसुओ में डूबकर ख़त्म हो!

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ये दुनिया जब ख़त्म होने को होगी तो शायद एक कविता बचेगी!

#yqpoetry #yqhindi

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Vikas Mishra 11 JAN AT 0:12

तुम्हारी मृत्यु के बाद
जब सैकड़ो लोग मेरे पास थे
हर कोई बंधा रहा था ढांढस
और मेरे पास अनगिनत कंधे थे
अपने हर मलाल को रोने को..

उस वक्त मैंने चाहा था कि
मैं रोऊँ सिर्फ़ तुमसे लिपटकर
उस वक्त जब तुम्हारा शरीर
निष्ठुर पड़ा, निर्जीव था
उस वक्त भी मुझे तुम्हीं से थी
सांत्वना की उम्मीद!

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सांत्वना!!

#yqhindi #death

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Vikas Mishra 8 JAN AT 23:28

एक दिन हम सब कुछ भुला देंगे..

भुला देंगे अपने बचपन का हर एक ख़्वाब
इसके लिए हम बचपन को 'बड़ा' कर देंगे
हमें तारों को मिलाना भी भूलना होगा
इसके लिए हम आसमान खाली कर देंगे

हम अभी वालों से रिश्ता ख़त्म करके
अपनी पहली मोहब्बत भी भुला देंगे
हमारे माथे पर जो चूमने का निशान है
उसे हमारे माथे की सिलवटें भुला देंगी

हमें अपने जीवित एहसासों को भी भूलना होगा
उन्हें हम एक कविता में दफ़न करके भूलेंगे
हम अपने आप को एक ताले में बंद करेंगे
और उसकी चाभी समंदर में फेंककर भूल जाएंगे

हमें अपनी नींद भी भुलानी होगी
इसके लिए हम रातों को जुगनू ढूंढेंगे
हम देखेंगे यहाँ होती हर एक ज्यादती
फिर दुनिया को प्यार से देखना भूल जाएंगे

सब कुछ भुला देने के बाद
जो बात हमको कायदे से याद रहेगी
वो होगी हमारी भूलने की कला!

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भूलने की कला!!

#random #yqhindi

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Vikas Mishra 23 NOV 2018 AT 2:27

मेरे पिता की कही
कोई भी बात
कभी झूठी नहीं हुई..

पिता ने कहा था
कि मैं तुम्हारे साथ हूँ
और ये दुनिया तुम्हारी है..

और ये दुनिया मेरी
तब तक ही रही
जब तक वो.. रहे साथ।

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'साथ'

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Vikas Mishra 1 AUG 2018 AT 12:21

माँओ ने कई सदियाँ बिताई है
एक स्त्री के रूप में
जो कभी बेटी बनी, तो कभी पत्नी
और अंत में बनी एक माँ!
हर रूप में उसका संघर्ष
रात के अंधेरे की तरह बढ़ता ही रहा
और उसने अपने हर संघर्ष को
घर की दीवारों में दफ़न कर दिया!!

उसने माँ के रूप में तूफानों के बीच
अंधेरों से एक रोशनी बचाई है
ताकि हम जब भी उससे मिले
तो उजाले में मिल सकें
और वो उजाला दिखा सकें
हमारी आंखों में उसके लिए
आदर और प्यार!!

एक दिन हम कह सकेंगे
कि ये वही उजाला है
जो माँ ने सूरज से चुराया था,
दुनिया से बचाया था,
जो दीप्तमान हुआ था
उसकी आत्मीयता के प्रकाश से,
वो उजाला जो कभी उसका था
लेकिन जिसने हमें रोशन किया है!!

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माँ!!
#yqhindi #maa #yqbaba

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Vikas Mishra 22 JUL 2018 AT 21:01

और ये बारिशें एक व्यक्त ना कर सकने वाला एहसास लाईं है!

हम सब गुम है बचपन के बगीचे में, बारिश के कारण बने छोटे से पोखर में और मिट्टी से आती उस सौंधी खुशबू में!! और इसमें मेरे जेहन में सवाल आता है कि अब वो नावें कहाँ है?

वो नावें जो हम उन किताबों को फाड़कर बनाया करते थे जिन्हें कभी जबरदस्ती भरा था। क्या अब उन नावों को इन फुहारों के बाद अपने छोटे हाथों से नहीं चलाएंगे?

मैं चला जा रहा हूँ और मेरे पैर पानी के ऊपर आवाज़ कर रहे है; छप-छप, छपाक! मुझे लगता है कि मैंने एक नाव खोल दी है और इन लहरों में डाल दी है! मेरे पास कोई पतवार भी नहीं है और मैं ये भी नहीं जानता कि मैं कहाँ जा रहा हूँ! लेकिन मैं एक ख़्वाब देख रहा हूँ और ये एक अच्छा संकेत है!!

मैं देख रहा हूँ कि मेरी ख़्वाहिश पूरी हो रही है! मैंने अपना बचपन का एक हिस्सा उन दिनों से आज के दौर में चुरा लिया है! और जहां तक मुझे याद है, मैंने एक सदी खर्च कर दी उन चीजों की कीमत जानने में, जिनसे मैं बना हूँ! वो चीजें जो निर्माण करती है, मेरी आत्मा का और एक पीढ़ी का!!

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बारिश, बचपन और उसके साये से भागते हम :')

#monsoon #childhood #yqhindi

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Vikas Mishra 11 JUL 2018 AT 0:11

"तो क्या हो जाएगा?" उसने पूछा था..

"क्या ही हो जाएगा अगर इस धरती की सारी मधुमक्खियाँ एक दिन खत्म हो जाएंगी? अगर एक रोज़ ठंड इतनी बढ़ जाएगी कि सब बर्फ हो जाएगा? या फिर एक ज्वालामुखी खुद का विस्तार करते हुए सबको निगल जाएगा?" जवाब में मैंने पूछा था..

"बहुत कुछ" उसने कहा था!!

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"बहुत कुछ"
#yqhindi #yqrandoms

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