Utsahi Ujjwal   (उत्साही "उज्जवल")
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Joined 21 May 2018


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Joined 21 May 2018
Utsahi Ujjwal 10 HOURS AGO

कानों को हुआ मखमली एहसास है
ज़रूर माँ ने दी आवाज़ है

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Utsahi Ujjwal 22 MAY AT 15:48

कब तक याद आओगी कब तक आँख नम होगा
मुझ पर भी कभी ख़ुदा का करम होगा

तुम्हें पाने की कोशिश में बहुत कुछ खो दिया मैंने
अब पाकर भी तुम्हें दर्द कहाँ कम होगा

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Utsahi Ujjwal 22 MAY AT 15:10

ना झुमका, ना बिंदियाँ-काजल, नाहीं तेरो पायल
अखियन ही तेरे बहुते है करने को मुझको घायल
व्यर्थ ना ते कर वक़्त बर्बाद सजने और संवरने में
रूप ही तेरो है काफी करने को सब को कायल

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Utsahi Ujjwal 21 MAY AT 22:24

मैं भी जल जाऊँगा एक दिन और हो जाऊँगा राख
तुम भी जल जाओगी फिर होगी अपनी मुलाक़ात
साथ यहाँ पाने का तुम्हारा अब कोई गुंजाईश नहीं
वक़्त मिलेगा बाद अंत के तब करूँगा सारी बात

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Utsahi Ujjwal 21 MAY AT 15:41

एक साल हो गए आज मेरे yq पर, पहले 5 महीने में 10 quotes और अगले 7 महीने में 450 quotes। जिसमें से मैंने बहुत delete भी कर
दिया है। मुझे yq पर बहुत कुछ सिखने को मिला
और बहुत मित्र भी मिले जिन्होंने मेरा हमेशा
साथ दिया, मैं सभी मित्रों का दिल से धन्यवाद करता हूँ, और मुझे माफ़ करे मैंने आपलोगों के quote पर comment कर आपको अपने प्रोफाइल तक लाया ।
और मुझे विश्वास है की आप सब ऐसे ही मेरा मार्गदर्शन करते रहेंगे ।

Ujjwal kumar

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Utsahi Ujjwal 20 MAY AT 23:46

स्त्री तेरे आगे सब मौन
हम क्या बोले तू है कौन
तेरे बिन शुन्य है संसार
तू ही है सृष्टि की आधार


उत्साही "उज्जवल"




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Utsahi Ujjwal 18 MAY AT 22:27

सुबह-सुबह ट्यूशन जाते थे पूरे जोश में
नज़र लड़ी थी उससे ना रहते थे होश में

आना उसका बलखा के आज भी याद है
उसके चक्कर में ही बने,शायर बर्बाद है
मीठी-मीठी उसकी बतिया ध्यान से सुनते थे
मन ही मन उसको लेकर कई ख़्वाब बुनते थे
उसको देखे कोई आ जाते थे आक्रोश में
सुबह-सुबह ट्यूशन जाते थे पूरे जोश में
उससे नज़र लड़ी थी रहते थे ना होश में

*इसको पूरा करूँ?



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Utsahi Ujjwal 18 MAY AT 15:01

वक़्त को यूँही ना ज़ाया करो
पल-पल से खुशियाँ चुराया करो

रास्ते बना लो अपने हाथों से
हर बात किस्मत पर ना लाया करो

दान देते है सब मंदिरो में यहाँ
तुम भूखों को खाना खिलाया करो

नदी हो तुम बहते रहना तुम्हें
शहरों से नहीं, सागर से दिल लगाया करो

सीढ़ी चढ़ोगे तो गिरोगे भी
जब भी गिर जाओ ख़ुद कोे उठाया करो

माना नफ़रत फैली है चारों तरफ
हो स्वच्छंद प्यार तुम तो लुटाया करो
-उत्साही "उज्जवल"












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Utsahi Ujjwal 18 MAY AT 1:56

हम तुझसे बिछड़कर उदास कितने थे
तुम्हारे सिवा लोग आसपास कितने थे

मिली तो आज भी पेश आई गैरों की तरह
हमनें तुमसे से लगाए आस कितने थे

नींद, चैन,ख़ुशी क्या क्या नहीं खोया
तुम से पहले हम बिंदास कितने थे

पड़े है सारे ख़्वाब मन के किसी कोने में
इश्क़ के मन में आभास कितने थे

तुने ख़ुद ही ख़ुद को तबाह किया 'उज्जवल"
नहीं तो जग में तेरे मोहताज़ कितने थे

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Utsahi Ujjwal 17 MAY AT 17:27

जान लेब का पिया परदेशिया
काटे-कटला ना अब रतिया
तड़पतानी हम त विरह में हो
चैन देवे ना फोन वाली बतिया

पूरा caption में पढ़े
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