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YourQuote
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Nope, you can't back away,
It's written in one of those books,
Supposedly written by someone who
had a god view of your life,

“A Drunk Text To God” Hey god!! What up? Hope you're okay up there, Hell, why wouldn't you be? After all it's heaven where you live, Today I'm going to pretend you exist, Unlike her, Who exists but I pretend she doesn't, Honestly, I'm pissed off at you, Because you said you created all men equal, Nope, you can't back away, It's written in one of those books, Supposedly written by someone who had a god view of your life, Yeah, so, all men equal, Then why is it that we're not, If the notion of “tall, dark, and handsome” was true, Did you have just “dark” in mind when you made me? Because of you I have a non existent social life, Because of you I shy away from talking to anybody, You must be drunk like I am right now, When you made my blueprints, Or should I say “blackprints”, You can't possibly negate your existence and say in your deep baritone “It's your genes, son.” Oh, I completely forgot about her, Sorry, it's the fault of Mr. Jack Daniel, So, you made me dark, You made me short, And of all things you made me a forgettable face, Who does that man? You didn't make me equal to the other guy and I expected her to treat me like him, You didn't care, why would she? Why would she even touch me even with her finger when I'm not him? Harsh isn't it? Why would she care that I was a gentleman and did not go within three feet radius of her without her permission? All men equal. What a load of crap! Oh, and one more thing before I pass out, Don't bother replying because I'm blocking you, This time it's me. Goodbye. #yqbaba #insecurities #drunktext #god #dark #short #average

,Mard (short story)

शार्ट स्टोरी (Rahil fatma) (मर्द) दोनों लड़कों से उलझते हुए प्रोफेसर ने लड़की को अपने कब्ज़े में ले लिया ।उनमे से एक लड़के के हाथ में पिस्टल थी जिसका निशाना उसने लड़की पर साधा हुआ था "छोड़ दे इसे वरना गोली मार दूंगा "लड़का पिस्टल को दोनों हाथो से थामे उसे धमकी दे रहा था ,प्रोफेसर ने लड़की की कलाई पकड़ी और उसे अपनी पीठे पीछे छुपा लिया ,अपने सामने खड़े इस पहाड़ इंसान को वो ट्रेन में बैठने से पहले तक कतई नही जानती थी जो अपनी जान की परवाह किए बग़ैर उसकी हिफाजत कर रहा था। जब वो ट्रेन में थी तभी से उसके कुछ साथियो के उसे प्रोफेसर कहकर बातचीत करने से उसे अंदाज़ हुआ था कि सफेद शर्ट पहने ,स्पेक्ट्स लगाए ये नोजवान एक प्रोफेसर था।उससे ग़लती हुई थी जो अब्बा के समझाने के बावजूद भी वो रात में तन्हा सफर कर रही थी,पुराने ख्यालातों की गर्द में छुपे अब्बा भी ना......अब्बा की बात पर उसने जवाब दिया था क्या दिन क्या रात ?क्या मर्द क्या औरत अब्बा ? अब सब बदल चुका है।हुआ यूं था कि पिछले स्टेशन पर इस डब्बे के लगभग सभी लोग उतर गएं थें यानि इस डब्बे में अब उसके साथ कोई दूसरा नही था ...सिवाए प्रोफेसर के ।इतने में ही न जाने कहां से दो लड़के इस डब्बे में चढ़ आएं। उनके कपड़ों से उठती शराब की बू से ही वो खौफ में आ गई थी ,वो ही हुआ जिस का डर था आखिरकार उसकी हिफाज़त के लिए प्रोफेसर को उन लड़को से उलझना पड़ा। खामखां के फ़िकरे कहते हुए जब उनमे से एक लड़के ने उसकी कलाई पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचा तो प्रोफेसर का खून खौल उठा और उसने लड़के को गर्दन से दबोच लिया , इस पल वो इतने सख्त गुस्से में था कि उसके हाथों लड़के की मौत भी हो सकती थी लेकिन तभी उसके दूसरे साथी ने लड़की को बर्थ पर धक्का दिया ,प्रोफेसर ने पहले वाले लड़के को छोड़ दिया और लड़की का हाथ पकड़ कर उसे अपने पास खड़ा कर लिया इस बार वो उसके दूसरे साथी की तरफ गुस्से से बढ़ा,लेकिन अब उसकी खुद की जान पर बन आई थी।पहले लड़के ने पिस्टल निकाली और निशाना लड़की पर तान दिया ,अब या तो लड़की की जान जाती या उसे बचाने के लिए प्रोफेसर की,प्रोफेसर ने लड़की को अपनी पीठ पीछे छुपा लिया और लड़के को धक्का देकर पिस्टल अपने क़ब्ज़े में ले ली,कुछ देर छीना झपटी के बाद अपनी जान बचाने के लिए दोनों लड़के चलती ट्रेन से कूद गएं,प्रोफेसर ने पिस्टल भी ट्रेन के बाहर फेंक दी,ट्रेन के दूसरे डब्बो में लोग बेखबर नींद में दफन थें,ये आधी मौत भी अल्लाह की अजीब नेमत है जो बाहरी दुनिया से लोगों का नाता ही तोड़ देती है , खौफ से घबराई कांपती सहमी हुई लड़की वापिस अपनी सीट पर बैठ गईं। पसीने में लथपथ ,प्रोफेसर साहब ने अपने कपड़े दुरुस्त करते हुए एक नज़र उस पर डाली ,उसके कपड़े खींचा तानी की वजह से कंधे पर से फट गए थे,रोने की वजह से काजल आँखों में फ़ैल गई थी । रेशमीं बाल बेतरतीब खुले हुए कन्धों पर और कमर पर लहरा रहें थें ,जो दुपट्टा वो घर से पहन कर चली थी वो बर्थ के नीचे पड़ा था,उसने झुक कर उसे उठाना चाहा मगर प्रोफेसर ने हाथ के इशारे से उसे रोक दिया और दुपट्टा उठा कर उसकी तरफ बढ़ा दिया ,वो डरी सहमी और शर्मिंदा थी, शर्मिन्दगी से बोली "थैंक यू सर!रात के सन्नाटे में लोहे की पटरी पर दौड़ती ये ट्रेन कितना शोर मचाती है और जब क़रीब से कोई दूसरी ट्रेन गुज़रती है तो धड़ धड़ की आवाज़ और सायरन हमारे जिस्म में एक झुरझुरी पैदा कर देते हैं लेकिन ये तमाम शोर उसके अंदर के शोर से बहुत कम था ,जल्दी ही ये शोर आसुंओं और सिसकियों की सूरत में उजागर होने लगा ,बड़ी पुरसकूंन सिसकियां, सुना है लड़कियो की ये मजबूर आदत बड़ी दिलकश होती है और सामने वाले के दिल में एक उलझन बुन देती हैं, अल्लाह को भी तो अपने सामने रोते हुए बन्दे बहुत पसन्द हैं ,एक फ़क़ीर ने अपने एक मुरीद पर खास नज़र सिर्फ इसलिए कर दी थीं क्योंकि उसकी आँखे कई बार आसुंओं से डगमगा गई थी और ये आंसू छुपाते छुपाते भी उन्हें ज़ाहिर हो गएं थें , लेकिन इस ट्रेन का मज़मून अल्लाह और उसके वाली नही थें ।प्रोफेसर देर तक उसके बहते हुए आंसुओ को देखता रहा कुछ नही बोला ।जब वो रो रोकर थक गईं तो उसने जेब से रुमाल निकाला और उसे दे दिया,वो आंसू पोंछ रही थी कि प्रोफेसर की खामोशी टूट गई और इस ख़ामोशी के पीछे छुपा उसके दिल का राज़ ज़ाहिर हो गया ,जब उसने कहा "तुम बहुत खूबसूरत हो" लड़की ने चौंक कर उसे देखा,इससे पहले वो कुछ कह पाती ,प्रोफेसर की गंभीर आवाज़ दोबारा आई "चली जाओ यहां से" लड़की ने नासमझी की हालत में उसे देखा ,उसकी आँखे धोखा नही खा सकती थी ,प्रोफेसर एक डीसेंट डीसेंट इंसान था फिर ऐसी बाते क्यों.....??? "मैने कहा चली जाओ यहां से...इस बार वो चिल्लाया ,बहुत बेबस और परेशान लड़की बेयक़ीनी से उसे देख रही थी इससे पहले वो कुछ और कह पाती एक और दहाड़ सुनाई दी "जाओ" इस बार उसे प्रोफेसर की आँखों में एक जुस्तजू दिखाई दी .....एक बाकिरदार इंसान की अपने किरदार को सम्भालने की जुस्तजू ......वो घबरा कर उसके पास से हटी ,लेकिन टूटी हुई चप्पल की वजह से डगमगा कर प्रोफेसर ऊपर ही गिर गई , लोहे की पटरी पर ट्रेन के पैरो का भी इतना शोर नही था जितना तूफान उसके दिल ने मचाया हुआ था , उठने के लिए उसे प्रोफेसर का ही बाज़ू पकड़ना पड़ा लेकिन इस बार प्रोफेसर ने उसका बाज़ू नही छोड़ा,उसे अपने क़रीब करके कुछ देर यूं ही देखता रहा फिर क़रीब और ज़्यादा क़रीब हो गया और उसके दाहिने गाल पर हल्का सा बोसा दिया जो न की बराबर था।लड़की बर्फ की मूरत बनी रह गई थी फिर वो उसकी आँखों में आँखे डाल कर बोला "मै एक प्रोफेसर हूं ,लोगो को इल्म सिखाता हूं आज तुम भी एक सबक लेकर जाओ ....सिर्फ अच्छा होना काफी नही ,मर्द मर्द होता है ।" इतना कहकर प्रोफेसर ने उसका बाज़ू छोड़ दिया,अचानक ट्रेन रुक गई ,स्टेशन आ गया ।वो टूटी हुई चप्पल को वही छोड़कर नंगे पैर ट्रेन से नीचे उतर गई ,लोगों के बीच भीड़भाड़ में पहुंची और कांपते हुए पलट कर ट्रेन को देखा ,प्रोफेसर कही दिखाई नही दिया ,लेकिन प्रोफेसर की वो किस ,जो किस थी भी और नही भी कशफ के चेहरे पर सबक की तरह लिखी गई थी, उसने कंपकपाते हाथ के इशारे से एक ऑटो रुकाया ,वो ऑटो जिसमे दो औरते सवार थीं। yqbaba#love#short story#shiksha#imagination

I'm at mears,
In tears of yours,
may run through years,
Forgive me with cheers.

#poem#short one Mears is defined as a boundary Person sitting at the boundary of sea shore with tears, & that may run through years untill she forgives him with cheers. #mears#tears#youts#cheers#yqbaba