#मिट्टी

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हम तो मिट्टी के खिलौनों से ही खेलते रहे,
और तुम हमको मिट्टी का समझकर हमसे ही खेल गए।
              -✍रामप्रकाश मुरारका✍



मिट्टी के खिलौनों से खेलने का जमाना गया जनाब,
वो तो आपको मिट्टी का ही बना इन्सान समझकर आपसे खेल गए।

Thank you for your invitation रामप्रकाश मुरारका जी ; आशा है आपको मेरी ये कोशिश पसंद आएगी। #मिट्टी #collab#yqbaba#yqdidi

11 OCT AT 16:06

कभी फुलो के खुशबु में छुप कर 
तुम्हे महकाऊंगी ..
कभी लहरो के साथ आती रेत सी 
 छुँ जाऊंगी ..
कभी सुरज की तपन से 
तडपाऊंगी ....
तो किसी दिन अमावस के 
अन्धेरे में खो जाऊंगी ....
कभी किसी पुराने पुस्तक में लगी 
धुल बन जाऊंगी ....
तो कभी कागज के नाव 
सी बह जाऊंगी ....
बसंत ऋतु में वो सरसों के फुलो 
की पीली छटा में दिख जाऊंगी ...
तो किसी दिन गुलाब के काटों 
सी चुभ जाऊंगी  ...
कभी देखना मुझे 
अग्नी की ज्वाला में 
तो कभी बहते झरने में 
मिल जाऊंगी ....
अश्रुधारा बन कर बह जाऊंगी 
आंखो के कोरो से तुम्हारे 
तो कभी मीठी मुशकान बनकर 
चेहरे में बिखर जाऊंगी ...

क्या फर्क पड़ता हैं 
"नेहा " हो या "नन्दिता "     

इस मिट्टी से ही तो बनी हुँ "मैं"
किसी रोज मिट्टी में मिल जाऊंगी 
किसी रोज मिट्टी में मिल जाऊंगी.......

©नेहा नन्दिता मिश्रा™

कभी फुलो के खुशबु में छुप कर तुम्हे महकाऊंगी .. कभी लहरो के साथ आती रेत सी छुँ जाऊंगी .. कभी सुरज की तपन से तडपाऊंगी .... तो किसी दिन अमावस के अन्धेरे में खो जाऊंगी .... कभी किसी पुराने पुस्तक में लगी धुल बन जाऊंगी .... तो कभी कागज के नाव सी बह जाऊंगी .... बसंत ऋतु में वो सरसों के फुलो की पिली छटा में दिख जाऊंगी ... तो किसी दिन गुलाब के काटों सी चुभ जाऊंगी ... कभी देखना मुझे अग्नी की ज्वाला में तो कभी बहते झरने में मिल जाऊंगी .... अश्रुधारा बन कर बह जाऊंगी आंखो के कोरो से तुम्हारे तो कभी मीठी मुशकान बनकर चेहरे में बिखर जाऊंगी ... क्या फर्क पड़ता हैं "नेहा " हो या "नन्दिता " इस मिट्टी से ही तो बनी हुँ "मैं" किसी रोज मिट्टी में मिल जाऊंगी किसी रोज मिट्टी में मिल जाऊंगी....... ©नेहा नन्दिता मिश्रा™ #मिट्टी #वजूद #मैं #yqbaba #yqdidi

26 SEP AT 9:49