#मशीन

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👇इंसान और मशीन👇
(poem in the caption)

इंसान ने मशीन बनाई और कुछ फ़ितरत अपनी भी डाल दी मशीनों में कंप्यूटर को बिजली चाहिए गाड़ियों को पेट्रोल चाहिए हैंड ड्रायर भी तब चलता है जब नीचे उसके हम हाथ फैलाते है मशीनों के कई गुण, इंसानो के गुण से मेल खाते हैं मशीनों को जितना छेड़ो उतना उसके बिगड़ जाने का डर जैसे बिगड़ते है लोग ज़रा ज़रा सी बात को लेकर कभी नखरे दिखा जाती है मशीन ना चलने का बहाना देकर और, मशीन भी एक दिन बंद पड़ जाती है ,जैसे किसी रोज़ इंसान मशीन को भी नहीं मालूम है, वो कितने दिन की है मेहमान मशीन का कोई हिस्सा, खराब हो जाए तो बदल कर हिस्सा फिर चलने लगती हैं मशीनें इंसान भी तो कभी कभी बदल कर ख़ुद को फिर से लगते हैं जीने किसी ने सोच समझ कर ईजाद की है मशीन जब नयी नयी घर में आती है तो लगती है हसीन फिर कुछ समय बाद उसकी इज़्ज़त धुल जाती है मशीन भी कभी कभी इंसानों सा दुख पाती है ज़रूरतों के हिसाब से इस्तेमाल की जाती है ज़रूरत ना हो तो मशीनें धूल खाती है मशीनें भी बूढ़ी होकर, बेघर हो जाती है मशीन पुरानी किसी के काम ना आती है मशीनों का अगर दिल और मज़हब होता मशीनें इंसान ही होती, अगर इनका भी कोई रब होता ©Anshul Joshi #मशीन #इंसान #yqbaba #yqdidi #yqbhaijan #YoPoWriMo #anshulwrites #yqpoetry Best of YourQuote Poetry pic credits: google.com

10 MAY AT 23:52

वो फूल तोड़कर लाता था
वो रोज उसे गुलदस्ते में सजाती थी
वो जानती थी कि...
एक दिन उसे भी किसी बगिया से 
तोड़कर लाया गया था इसी तरह।
और सजा दिया गया एक सामान की तरह
और शायद जब वो मुरझा जायेगी
तो फेंक दिया जायेगा इन फूलों की तरह
  चार दीवारी के किसी कोने में।
    हाँ वो फूल ही तो है।
फर्क बस इतना है कि वो औरत है।
एक के लिए पराया धन दूसरे घर के लिए परजीवी है।
 फिर भी वे जीव नहीं और न जीवित ही है ।
       बस एक मशीन की तरह 
शायद एक कृत्रिम फूल की तरह।
या कामकाजी घरेलू उपकरण की तरह।
            हाँ वो औरत है।

वो फूल तोड़कर लाता था वो रोज उसे गुलदस्ते में सजाती थी वो जानती थी कि... एक दिन उसे भी किसी बगिया से तोड़कर लाया गया था इसी तरह। और सजा दिया गया एक सामान की तरह और शायद जब वो मुरझा जायेगी तो फेंक दिया जायेगा इन फूलों की तरह चार दीवारी के किसी कोने में। हाँ वो फूल ही तो है। फर्क बस इतना है कि वो औरत है। एक के लिए पराया धन दूसरे घर के लिए परजीवी है। फिर भी वे जीव नहीं और न जीवित ही है बस एक मशीन की तरह शायद एक कृत्रिम फूल की तरह। या कामकाजी घरेलू उपकरण की तरह। हाँ वो औरत है। पारुल शर्मा #फूल #गुलदस्ता #दीवार #धन #परजीवी #मशीन #कृत्रिम #कामकाजी #उपकरण #घरेलू #YQDidi #YQBaba #Happywomensday#women#और#नारी#स्त्री#महिला#लड़कियाँ#देवी #girls

21 FEB AT 14:22