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QUOTES ON #भटकेलोग

#भटकेलोग quotes

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Alok Nanda 28 APR AT 18:36

भटके हुए लोग को, आज राह दिखाने वाला,
कोई नहीं है..
जमाना खुदगर्ज जो हो गया है ।
कभी कभी अपनो के लाख समझाने के बाद भी,
कुछ भटके हुए लोग, सही राह पर वापस नहीं आते ।
कभी कभी कुछ भटके हुए लोग, ज़िन्दगी की जंगल में,
अकेले पड़ जाते हैं,
जहाँ से राह ढूंढ पाना आसान नहीं होता ।

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Renu Vivek 18 APR AT 12:30

आज भी पंछियों की तरह घर से निकलेंगे
हम शाम तक लौटने की दुआओं के साथ
कुछ पुरस्कार और तिरस्कार लिए हाथ
आजकल अनदेखा करते हुए गुज़र जाते हैं
हम जिन्दगी को हरदम अब दौड़ते हुये
कभी कभी मन करता है कि बस
बहुत हो गया चलो छोड़ो ये सब
सोचते हैं यहीं हो जाये अब सब खत्म
और क्या! कुछ न रहे न हो कोई गम
कुछ छूट गया पीछे जो हम ना पा सके
कुछ गंतव्य ऐसे रह गए जहाँ ना जा सके
पता नही क्यों, ऐसा क्यों लगने लगता है
भटके हुये लोग हैं हम राही मतवाले से
जाना कहाँ पता नहीं चल रहे बस धुन में
सब कुछ सिमट सा गया है इस 8 से 4 में
वही निकल पड़ते हैं भोर के अंधेरे में
पहुंचते हैं घर फिर अंजान से अंधेरे में
जैसे न किसी को किसी से सरोकार
न ही खुशियों का कोई भी प्रकार
कोई लुत्फ नहीं कोई उफ्फ नहीं
सब जड़ सा हो गया वहीं के वहीं
चलते चलते लगे सब शांत सा है
मानों सब आस पास परछांयिओं सा है
चल रहा है साथ पर अस्तित्व शून्य
न कुछ विलग फिर भी सब कुछ गूण

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Richa Ramya 12 APR AT 19:19

चलते चलते ये कहाँ आ गए
अंजान डगर पे,अनजान सड़क पे
अनजाने से लोग,अनजाने से सोच
इस अंजान से सफर में
हमें अपनी पहचान बनानी हैं
इस अंजान सी दुनियां में
हमे अपना नाम कामना है
चलते चलते एक मुकाम हासिल करना है
चलते चलते एक इतहास बनना है
चलते चलते थकना तो है
पर रुकना नहीं हैं

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Neeraj Kumar 12 APR AT 11:32

चलते-2
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Pankhuri Kumari 12 APR AT 0:33

“भाई साहब, ये पता बताएँगे”
“अरे भाई आप तो बहुत दूर निकल आए।”
“अच्छा”
तभी उसके साथी भी वहाँ आ गए।
एक ने पूछा,”क्या हुआ कुछ पता चला”
“हाँ भाई, हमें काफ़ी पीछे मुड़ जाना था पर आगे आ गए।”
“आपको पहले किसी से पूछ लेना चाहिए था। खामखां समय भी बर्बाद हुआ और परेशानी अलग।”
मुझे उनकी चिंता हो रही थी।
“समय बर्बाद क्या हुआ? मोड़ पकड़ लेते तब भी समय बीतना ही था,छूट गया तब भी बीता। उस ग़लती की अफ़सोस में ऊपरवाले ने सफर के जो ये चंद घंटे एक्स्ट्रा दिए हैं उसे क्यों बर्बाद करें। अब गाड़ी मोड़ लेते हैं फिर अपना मोड़ आ जाएगा।”
मुझे शुक्रिया कहते मस्ती में उन्होंने गाड़ी वापस मोड़ ली।
ज़िंदगी के कितने सही रस्ते पे थे न ये भटके लोग।

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Ashiq Jain 12 APR AT 0:28

भटकते भटकते कही दूर चला जा तू
जिस बक्से में कैद है, दुनिया तेरी
तोड उसको, और फिर भटक जा जरा।
जिस शाम तेरी पर्चाई तु भूलेगा
तब लौट आना, जा तेरा घर है।
जब सब लूट जाएगा तेरा
तू फिर भी बडना आगे ज़िन्दगी में।
भूल जा अपनी पहचान तू
फिर बनाना अपना आसियाना, काबलियत पर।
ना करना वादा, साथ निभाने का
बिक्रेगा तू, बिन आवाज के।
जीले थोडा, जब कही रूखे तू
मौत भी आए, तो लग जाना गले थोडा, मुस्कुराके।
हमे यूही नहीं बुलाते, भटका हुआ इन्सान॥

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