#गहरा

41 quotes

मेरे सपनो कि चाबी कहाँ से मिली तुम्हे?
जो वहाँ भी हाजिरी लगा गए तुम!

लाखों कोशिशें कि तुम्हे भुलाने की...
लेकिन सब हुए नाकामयाब

क्या सच मे जोरा है इतना गहरा रिश्ता तुने मुझसे?

#yqdidi#yqbaba#tpmd#सपनें#गहरा

17 SEP AT 23:02

वो लिख दिया दर्द जो ज्यादा था।
जो बचा है वो इससे कहीं गहरा है।
आज भी रोयां रोयां दुखता है।

#दर्द#ज्यादा#बचा#गहरा#yqbaba#yqdidi#yqbhaijaan#

23 AUG AT 14:31

दर्द जितना गहरा होता है 
गम-ए-गहराई में डुबनें की सजा देता है
दर्द लिखने का एक अलग अंदाज होता है
ये हुनर मोम से दिल वालों के पास होता है

#गहरा#yqbaba#yqdidi Vershu Verma i like ur quote hope u vl like ....topic दर्द

21 AUG AT 17:37

मैं आंधी नहीं अजूबा हूँ फकत फरक इतना है।
तुम प्यार के किनारे पे हो मैं ईश्क में गहरा डूबा हूँ।

#आंधी#अजूबा#प्यार#किनारे#फकत#फर्क#ईश्क#गहरा#डूबा#yqbaba#yqdidi#yqbhaijaan#

20 AUG AT 21:29

वो गुलाबो में बैठी रही, 
उसने काँटों को छूकर नही देखा,

वो आसमां में उड़ती रही, 
उसने जमीं पर आकर नही देखा,

वो उजालों में रही हर पल, 
उसने अंधेरो में जाकर नही देखा,

वो बैठी रही किनारे पर,
गहरा ठहरा हुआ जल सोचकर,

मैं बहता हुआ दरिया हूँ, 
उसने मुझमे उतरकर नही देखा।।

#yqbaba#yqdidi#yqbhaijan#51quote#गुलाब#कांटा#आसमां#जमीं#उजाला#अँधेरा#गहरा#किनारा#दरिया ये पंक्तियाँ मेरी पसंदीदा पंक्तियों में से एक है, आशा करता हूँ सभी को पसंद आये।। Its my 51th quote on YQ feelling very happy Thanks to #YQ to improve my writing skills and thanks to all freinds who like my quotes and appreciate me.

16 AUG AT 3:56







इश्क़ और अश्क़, ताल्लुक़ आँखों से है,
इश्क़ आँखों से शुरू हो कर, 
अश्क़ों पर ख़त्म हो जाता है...
            
            जो तेरे इश्क़ में मेरे अश्क़ मिल जाये,
            तो फिर इश्क़ का रंग गहरा होगा ही....

-aRCHANA

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14 AUG AT 2:28

सोच रहा हूँ मैं भी लिख दूँ
एक कविता तुम्हारे नाज़ पर
तुम्हारे हुस्न पर, तुम्हारे नख़रे पर
जैसे सभी लिखते हैं वैसे ही एक कविता

मगर सुनो तुम्हें आना होगा
मेरी कविता में समाना होगा
अगर तुम ही नहीं रहोगी उसमें
तो मेरी कविता का श्रृंगार कैसे होगा

न कोई रस, न कोई अलंकार
न शर्म का पहरा, न मर्म गहरा
तुम्हारे बिन रूपविहीन, गुुणविहीन
किसी को मेरी कविता से प्यार कैसे होगा

तो सुनो ! आओ ना मैं भी लिख दूँ
सिर्फ और सिर्फ तुम पर एक 'अलग' कविता

सोच रहा हूँ मैं भी लिख दूँ, एक कविता तुम्हारे नाज़ पर, तुम्हारे हुस्न पर, तुम्हारे नख़रे पर, जैसे सभी लिखते हैं वैसे ही एक कविता । मगर सुनो तुम्हें आना होगा, मेरी कविता में समाना होगा, अगर तुम ही नहीं रहोगी उसमें, तो मेरी कविता का श्रृंगार कैसे होगा । न कोई रस, न कोई अलंकार, न शर्म का पहरा, न मर्म गहरा, तुम्हारे बिन रूपविहीन, गुुणविहीन, किसी को मेरी कविता से प्यार कैसे होगा । तो सुनो ! आओ ना मैं भी लिख दूँ, सिर्फ और सिर्फ तुम पर एक 'अलग' कविता । © मिस्टर अलग (अभिषेक मिश्रा 'अलग) 🇮🇳 Visit at http:\\www.misteralag.com #yqbaba #yqdidi #yqhindi #yqyopowrimo #yqBTtalks #कविता #नाज़ #हुस्न #नख़रे #श्रृंगार #रस #अलंकार #शर्म #मर्म #गहरा #प्यार #रूपविहीन #गुणविहीन #मिस्टरअलग #misteralag

27 JUL AT 23:16