#इश्क़

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अहसास भी उसी से मिले
जिससे हैं यह घाव मिले
कैसे करूँ शिक़वे..
कैसे करूँ मैं उससे गिले

उसी ने तो इश्क़ का मतलब, था सिखलाया
बनके महताब..
मेरी स्याह काली रात को, था चमकाया
आज अगर वो बेवफ़ा हो गयी तो क्या
वफ़ा का पाठ भी तो, उसी ने था पढ़ाया
बस अब इतनी सी है दुआ 
मेरी सुन ले वो इतनी सी इल्तिज़ा
अपना दामन वो, और नापाक ना होने दे
अब किसी और को, उसे बेवफ़ा ना कहने दे
जो हमराह उसने अब चुना है
वो उसी का सानी रहे, 
उसी से शुरू, उसी पर ख़त्म 
उसकी ज़िंदगानी रहे
- साकेत गर्ग

#गिले = complaint #महताब = moon #इल्तिज़ा = request #सानी = match Full poem: अहसास भी उसी से मिले जिससे हैं यह घाव मिले कैसे करूँ शिक़वे.. कैसे करूँ मैं उससे गिले उसी ने तो इश्क़ का मतलब था सिखलाया बनके महताब मेरी स्याह काली रात को था चमकाया आज अगर वो बेवफ़ा हो गयी तो क्या वफ़ा का पाठ भी तो उसी ने था पढ़ाया बस अब इतनी सी है दुआ मेरी सुन ले वो इतनी सी इल्तिज़ा अपना दामन वो और नापाक ना होने दे अब किसी और को उसे बेवफ़ा ना कहने दे जो हमराह उसने अब चुना है वो उसी का सानी रहे उसी से शुरू उसी पर ख़त्म उसकी ज़िंदगानी रहे - साकेत गर्ग #YoPoWriMo #Hindi #Urdu #हिंदी #उर्दू #अहसास #शिक़वे #इश्क़ #स्याह #वफा #दुआ #दामन #नापाक #बेवफा #हमराह #ज़िंदगानी #love #YQBhaijan #YQBaba #YQDidi #SaGa

2 HOURS AGO

"माँ"

इश्क़ को इश्क़ में मगरूर देखा है...
मैने जिस्म ओर रूह को चुर देखा है...

मुझे सब से ज्यादा मुहब्बत है मेरी माँ से...
उसकी हंसी में मेरे होने का गुरुर देखा है...

तुम बेवजह ही ढूंढते रहे जमाने मे खुदा...
मैंने खुदा नही देखा माँ को जरूर देखा है...

इश्क़ को #इश्क़ में #मगरूर देखा है... मैने #जिस्म ओर #रूह को चुर देखा है... मुझे सब से #ज्यादा #मुहब्बत है मेरी #माँ से... उसकी #हंसी में मेरे होने का #गुरुर देखा है... तुम #बेवजह ही #ढूंढते रहे #जमाने मे #खुदा... मैंने खुदा नही देखा माँ को #जरूर देखा है... #NANU #YQbaba #YQdidi

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