#इंसानियत

91 quotes

तुम शब्द हो ना... 
पहली बार जब तुम मिले...
तुतला रहे थे... 
अर्थहीन, अधूरे से...
अक्षर थे तुम... 
बड़े खूबसूरत.......
सब खुश थे, तुमसे मिलकर...
जब तुमने पहली बार... 
"माँ".....कहा... 
तुम पूर्ण हो गये... 
माँ की उंगली पकड़....
भाषा की पाठशाला में.... 
संधि,,, समास के साहचर्य से... 
तुम अर्थवान् होते गए.... 
पर...... अब.... 
तुम्हारे पर्याय... 
तुम्हारे अनेकार्थी रूप का... 
न जाने कब , कौन.... 
अपने स्वार्थ के लिए... 
उपयोग कर ले... 
और तुम नादान... 
बहक जाते हो... 
कभी ज़िहाद के नाम पर....
आतंकवादी बन जाते हो... 
कभी राष्ट्रवाद के रास्ते पर....
राजनीति से छले जाते हो...
कभी जाति में बंटकर....
आरक्षण की आग फैलाते हो.... 
कभी दंगाईयों की भीड़ में मिलकर... 
सरे राह इंसानियत को मार गिराते हो....
तुम अब हाथी के दाँत हो गये हो..
खाने के ओर, दिखाने के ओर...
मैं डरने लगा हूँ......तुमसे...
अब चुप रहने लगा हूँ..... ||

#yqdidi#शब्द#जिहाद#आरक्षण#जातिवाद#राजनीति#इंसानियत#चुप

YESTERDAY AT 9:15

बेवफाई के अलावा भी और दर्द हैं वजूद में,
जरूरत हैं तो बस एक बार खुद से दिल हटाकर.
दूसरो को एक नजर उठा कर देखने की और,
दिल खोल कर मेहसूस करने की..!!

Bewafai ke alawa bhe or dard hai wajood me, zaroorat hai to bus ek baar khud se dil hata kar. Doosro ko ek nazar utha kar dekhne ki or dil khol kar mehsus karne ki..!!

#YQdidi #ChallengeCompleted #Pains of life and #Responsibility towards selflessness Shib Shankar ❤ something in hindi this time Bibhuti Saikia 🙃 hope its up to your expectations. 😘😘😘😘 #DailyChallenges #ज़िन्दगी #शब्द #इंसानियत #Life #humanity #selfless #yqrandoms #YqHindi #feelings #thoughts #YourQuote #ArtHub #TheInkSlingers #Tpmd #BTTalks #YQ !! 📝✌ #बेवफाई के अलावा भी और #दर्द हैं वजूद में,जरूरत हैं तो बस एक बार खुद से दिल हटाकर. दूसरो को एक #नजर उठा कर देखने की और, #दिल खोल कर मेहसूस करने की..!!

25 JUN AT 19:18

दुनिया की भीड़ में ,
इंसान नज़र नहीं आते ज़नाब....

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24 JUN AT 11:31

गावातल्या मातीतच मिळते
माणुसकीची नीती  
जिथं  न पाहता धर्म-जाती
माणसं मदतीस तत्परतेने धावत येती

       ●●●

शहरात जाताना वाटते भीती
कारण तिथं दीड दमडीचीही
किंमत नसे रक्ताच्या नाती

    -वसीम शेख

#Caption in #hindi #गांव के मिट्टी में ही #इंसानियत बाकी है। लोग दौड़ते है मदद के लिए चाहे कोई भी #धर्म-जाति है।। #शहर में जाने से अब #डर लगता है। जहाँ पर #खून के रिश्तों की कोई नही महत्ता है।। गावातल्या #मातीतच मिळते माणुसकीची नीती जिथं न पाहता धर्म-जाती माणसं मदतीस तत्परतेने धावत येती शहरात जाताना वाटते भीती कारण तिथं दीड दमडीचीही #किंमत नसे रक्ताच्या #नाती -वसीम शेख #YQtaai #माती #कविता #मराठी #YoPoWriMo #YQdidi #हिंदी #कविता #YQbaba

24 JUN AT 0:05