Shifa Iram   (Shifaaa)
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Alhamdulillah
An Indian Muslim.❤
Joined 30 June 2019


Alhamdulillah
An Indian Muslim.❤
Joined 30 June 2019
Shifa Iram 4 HOURS AGO

मुकदमा दाख़िल हुआ, के खो गई है,
जगने की आस में शायद, सो गई है ;

बद्ग़ुमान थे चश्म, ज़बान सुस्त थी,
उंगलियां हरकत में, पलकें चुस्त थी ;

हाथों का फंसाया बिल-आख़िर हाथों को जा मिला
लौ मेरे ही कान के, 'पेंसिल' पास में छिपा मिला ।


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Shifa Iram 31 MAY AT 12:31

सबको जांचने की हड़बड़ी है
अपनी छवि भले ही, धूमिल पड़ी है

ये जो हर किसी में झांकते हो
सच कहना,
अपना प्रतिबिम्ब देख भी पाते हो ?

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Shifa Iram 25 MAY AT 13:21

धुले हुए कपड़ों में नई यादें बनाते हैं
बिन गले मिले भी, दिल जोड़ कर दिखाते हैं

अपनों से मिलने का डिजिटल तरीका अपनाते हैं
ये एक ईद हम, ज़रा मुख़्तलिफ़ मनाते हैं

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Shifa Iram 24 MAY AT 12:30

मुआएना नफ़्स का दौर था,
मआज़रत की घड़ी थी ;

अंजानों की पूरी बस्ती में,
'रमज़ान' मेरी गली थी ।


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Shifa Iram 17 MAY AT 19:46

जिन तकियों पे सर था,
वो ही पत्ते हवा दे रहें
वक़्त ने ज़रा करवट क्या फेरा,
सब मुड़ - मुड़ मज़े ले रहें

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Shifa Iram 15 MAY AT 21:50

'खूगर रंज के' डूबे हुए हैं
'इश्क़ ईलाही' से चूके हुए हैं ;

'क़ल्ब बशर' को लज़्ज़त अता कीजे
'सब्र, शुक्र ओ इज़्ज़त' अता कीजे ।

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Shifa Iram 12 MAY AT 19:43

Wo kahtey hain, ki kahtey nahi
Jo kahtey hain, to sahtey nahi

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Shifa Iram 10 MAY AT 9:42

टहनी हूँ तेरी माँ
तू दरख़्त सबसे मज़बूत है,

'मेरी बेटी' पर ये ग़ुरूर तेरा
मेरी कामयाबी का सुबूत है ।

मेरे 'वजूद में है काजल' तेरा
तेरे आंसू जिन्हे झकझोरती है,

सब्र, तहम्मुल ओ ताक़त तेरा
मेरे रब की तू अज़ीज़ मोती है ।।

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Shifa Iram 8 MAY AT 19:03

वक़्त के महदूद रहें, उम्र से महरूम हूए
समझ की तलाश में गोया, नासमझ 'कई' ग़ुरूब हूए

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Shifa Iram 5 MAY AT 22:51

मुख़्तसर कुछ लम्हात हैं,
चंद दिन, गिने हूए रात हैं ;

'इश्क़ हक़ीक़ी' में डूब लीजिए
ज़रा रोइए, मनाइए, 'दिल' जीत लीजिए ।

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