Sheetal Singh   (Sheetal Singh)
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Joined 24 March 2018


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Joined 24 March 2018
Sheetal Singh YESTERDAY AT 13:38

ग़र तुम भुल गए हो दास्तान ए इतिहास को तो भूलते रहों मगर इस कलम को ज़ालिम ए ज़ुल्म सहने कि आदत नहीं,

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Sheetal Singh 11 NOV AT 23:48

ग़र क़ानून किसी कि आवाज़,विचारों को नहीं सुन सकता तो क़ानून को यह हक़ नहीं कि वह किसी से उसकी जिन्दगी छीनले,

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Sheetal Singh 11 NOV AT 23:13

ये बाजुबंद पर न्याय लिखें, हाथों में यूँ डंडा लिए
शांति कि जब ये कानून बात करें, सच में लोकतांत्रिक शब्द इन आँखो को मजीद खोखला नजर आता हैं,

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Sheetal Singh 11 NOV AT 21:28

इक बात बताओं,ये तस्वीरें आख़िर मुकर्रर होगी भी कैसे इसमें रगं तुम्हारा कहाँ शरीक किधर शुमार हैं,

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Sheetal Singh 11 NOV AT 20:31

सुनो,आख़िर कैसी इश्क़ ए कश्मकश में उलझे हो तुम,
हम सवाल तुमसे कुछ करते हैं,
जवाब में महज़ ज़िक्र तुम उसका करते हो!

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Sheetal Singh 11 NOV AT 20:01

तेरा यूँ क़बूल कर जुबां से मुकर जाना क्या हाल ए दिल कर गया तुझे आवाज़ें क्या देते हम तु तो पल में हमसे पर्दा कर गया,

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Sheetal Singh 11 NOV AT 1:04

चादर ओढ़ी तुमने मज़हबी ए नाचीज़ और रंग मज़हब ए पोशाक का तुम हमको अदा करने को कहते हों,,

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Sheetal Singh 11 NOV AT 0:44

खुदगर्ज़ ये ज़माना भले हि बदल जाए मगर इमां का नेक व पाक़ दिल इन्सान कभी बेग़ैरत व फऱेब का लिबास नहीं ओढ़ता

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Sheetal Singh 10 NOV AT 20:22

ना जाने किस ओर चल पड़ा है ये आलम सारा
देख इन्हें रोती है आँखे अब थक सी जाती हैं,
हाल ए मज़लूम जाहिर होता इस फ़िज़ा का अब
ये मख़दूम भी इन्सान ए ज़ुल्म के आगें
लाचार,बेज़ार नजर आते हैं

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Sheetal Singh 10 NOV AT 15:46

Those who says that"we can never be wrong"unknowingly they are criminals of their own,,,

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