Shatakshi Vipul Gupta   (Shatakshi (शावी))
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Joined 17 January 2018


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Joined 17 January 2018
Shatakshi Vipul Gupta 4 APR 2018 AT 12:26

ज़रा देर ठहरो,यूँ न जाओ अभी,कहने को है,बात बाकी अभी
कि जाने का, यूँ न बहाना करों, गई शाम है,रात बाकी अभी

बहुत खेल हैं तुमने जीते मगर, मगर हार बैठे हो रिश्ते सभी
ज़रा एक बाज़ी हमसे भी खेलो, कि देनी तुम्हे मात बाकी अभी

हैं दिल में तेरे घर कर के बैठे, तुम जान करके क्यूँ अनजान हो
दिल के उस हिस्से में तो देखो, जहां करनी है खात बाकी अभी

इज़हार इश्क़ का था तुमने किया,तुम्ही ने किया था सजदा कभी
माना था तुमने खुदा इश्क़ को, तो कैसी मिलानी जात बाकी अभी

गर ढल रहे हो तुम भी सनम, हम भी कहीं पर बिखर हैं रहें
रूह तो तुझसे जा है मिली,फ़ख़त कहने को है, गात बाकी अभी

तेरे होने भर का अब दम बचा है, ज़रा सा समझना तुम्हारा ज़रूरी
अपनी मैय्यत का सामान लेकर हैं बैठे, करना है बस यात बाकी अभी



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Shatakshi Vipul Gupta 2 APR 2018 AT 14:05

है शर्म की बात बहुत जो, आरक्षण पर है मचा बवाल
हम गुलाम ही अच्छे थे क्या,मन मेंउठ खड़ा हुआ सवाल

अग्रेंजों के शासन में हम सब थे, बस भारत मां के लाल
ये आज़ादी लगता है, अब बन गयी है, जी का जंजाल

शहीदों की रूहों को भी, हो रहा होगा, हाँ कुछ मलाल
उनकी शहादत बेकार कर, इज्जत को भी दिया उछाल

दुश्मनो की किसे ज़रूरत, अब आपस में हों रहे हलाल
सामाजिक मुद्दों पर चुप्पी,देश की जनता वाकईकमाल

बदसूरत हो गयी शख्सियत, जो होती थी कभी जमाल
देश का नेता ही बन बैठा देश का नम्बर एक दलाल

पकड़ देश के गद्दारों को अभी सभी मिलके दो निकाल
वक्त थोड़ा ही है बाकी देश को अपने अब लो सम्भाल

_____शताक्षी वैश्य"शावी"

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Shatakshi Vipul Gupta 1 APR 2018 AT 20:37

"ummm! Mamma! let me sleep for few more minutes" I murmered. Suddenly i realised that I am no more princess now. I remembered that I am now a daughter in law. Here new responsibilities and new role is waiting for me. I was just began to cry. Suddenly i heard"let her sleep".Yes, these were words of my mother in law.
A RAY of HAPPINESS touched my heart and a smile on my lips was smiling.😘😘😊

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Shatakshi Vipul Gupta 1 APR 2018 AT 15:21

महज "फरेब"आये नज़र रिश्तों के "गुलिस्तान"में
सारे "राज़" खुलते है जब पहुंचते हैं "श्मशान" में।

बेच कर "इंसानियत" खुश हैं जो अपने"मक़ाम"में
सब "हिसाब" होगा जब आएगी दिक्कत"जान" में।

महसूस"गुनाह"होगा उसे जब ढूंढेगा सुकूँ "सामान" में
चुना महज "पत्थर"है तूने हर दफ़ा हीरे की "खदान"में

सरेआम "इश्क़"भी बिकता है यहां छोटे मोटे"दाम"में
कौन"दिल"पर करता है सज़दा डूबे हैं "हवस स्नान" में

वो"बर्बाद"हो चले जिनको है भरोसा अबभी ईमान में
बिक गयी "शर्म ओ हया" बेशर्मी की उस "दुकान" में

है"वतन" मेरा अनोखा जहाँ चलते है पत्त्थर "जवान"में
हैं "राजनीति" ढूँढते जहां सब इस मरे हुए "किसान"में

है "महफूज़" कहाँ आबरू यहां अपने और"अनजान"में
फ़र्क़ "दरिंदे" करते हैं कहाँ अब वयस्क और"नादान" में

नहीं"शहीद" होते वतन पे मरते हैं सब धर्म के"नाम" में
ढूंढते"कमियां"यहां अब सभी "अल्लाह औ भगवान"में

हैं"तन्हा" महफिलें अब वो बात कहां नशीली "जाम" मे
बढ़ी"दूरियां"दिलों में कि फर्क कहाँ घर और"वीरान" में

वो "खुदा"भी अचरज में है क्या करी कमी "इंसान" में।
कोई "फर्क" लगता नहीं हां अब इंसां और "हैवान" में।

_____शताक्षी वैश्य'शावी'





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Shatakshi Vipul Gupta 31 MAR 2018 AT 18:51

मिलत राम घर बैठ के......मन की जिस मन भाय।
निज अवगुण मिट जात हैं.... धीरज मन में आय।।

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Shatakshi Vipul Gupta 31 MAR 2018 AT 10:33

ये ख्वाब बहुत खूबसूरत है गर मुकम्मल हो जाये

तमाम मुल्कों में ये मुल्क मेरा भी अफ़ज़ल हो जाये।

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Shatakshi Vipul Gupta 30 MAR 2018 AT 15:57

दोहावली

देह जलाकर सखी ने ,महलन लियो बनाय।।
आयी आंधी काल की, सकलहिं गयो उड़ाय।।

बरसों बीत गये सखी,सब से मिल नहिं पाय।।
धन दौलत की आग ने ,रिश्ते दिये जलाय।।

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Shatakshi Vipul Gupta 30 MAR 2018 AT 11:16

विश्वास भरे
तनिक धीर भरे
हम हैं चले
मन में आस भरे
विकट राह
पर है नेक चाह.
कोई पा सके
न इस मन थाह
साहस भरा
हर इक विचार
हम तुम हैं चले



__शताक्षी'शावी'


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Shatakshi Vipul Gupta 28 MAR 2018 AT 16:05

किसी के शायर बनने के पीछे टूटा हुआ दिल ही हो, ज़रूरी तो नहीं
जो बिना रूके चल रहा हो चाहिये उसे मंज़िल ही हो, ज़रुरी तो नहीं

माना कि फरेब को यहां पहचानना बहुत मुश्किल है, साथी मेरे
मगर जिसके हाथने थामे हो खंज़र वहीं कातिल ही हो,ज़रूरी तो नही

टूट जाया करती हैं हिम्मतें लाख कोशिशों के बाद भी कभी कभी
लाख दुआएं करने पर भी मन चाही मुराद हासिल ही हो, ज़रूरी तो नही

लेती है इम्तेहान ज़िन्दगी पल पल सभी से अपने नए नए अंदाज में
किस्मत भी जिता देती है किसी किसी को,वो काबिल ही हो ज़रूरी तो नहीं

बहुत बड़े बड़े लोग सलीके से संवरने वाले काम छोटे कर जाते हैं
बदहाल दिखने वाला हर शख्स हर दफ़ा ज़ाहिल ही हो ज़रूरी तो नही

चंद रुपयों के खातिर जान,इज्जत,रिश्ते,न्याय बिक जाते है यहां पर
इंसाफ की कुर्सी पर बैठने वाला हर शख़्स आदिल ही हो ज़रूरी तो नहीं

कई बार खुद की गलतफहमियों से भी बढ़ जाया करती हैं दूरियां'शावी'
जिसे तुम दे रहे हो दोष बर्बादी का अपनी वही फ़ासिल ही हो ज़रूरी तो हो

_____शताक्षी वैश्य'शावी'

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Shatakshi Vipul Gupta 27 MAR 2018 AT 10:39

इश्क़ करते करते हम उस पल तक पहुंच गए कि
पापा के थप्पड़ से शुरू हो मम्मी की चप्पल तक पहुंच गए😂😂😁😁

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