Rishu Mridula Anand   (रिशु मृदुला आनन्द)
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एक ख़ुशनुमा सुकूनी आदमी

Instagram: RishuAnandFromHimalayas
Joined 22 May 2018


एक ख़ुशनुमा सुकूनी आदमी

Instagram: RishuAnandFromHimalayas
Joined 22 May 2018

बस तेरी परछाईँयाँ ढूंढता हूँ ज़माने भर में मैं
क़दम रखा तूने जहाँ वो इबादतगाह है मेरी

तेरा ही रूप निहारूं ऐ मौला हर शख़्स में मैं
हज़ार राहों में मंज़िल तेरी है एक राह मेरी

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Rishu Mridula Anand 19 HOURS AGO

वो शायर जो अक्सर सर धुनता है
ज़िंदगी और मौत में मौत चुनता है

उसने पढ़ा है इतना सिखने के लिए
अब कैसे बताए शब्द कैसे चुनता है

मिली है ज़बान तो सलीक़े से बोलो
शायर हो तुम्हें सारा ज़हान सुनता है

हर कोई रखता है यहाँ सनम अपना
एक ही है जो अपना ख़ुदा बुनता है

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Rishu Mridula Anand YESTERDAY AT 1:36

हम दोनों साथ मिलकर हर रात जो तारा देखते थे,
वो आज रात टूट गया

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Rishu Mridula Anand YESTERDAY AT 23:01

बहुत पुराना हो गया हूँ अन्दर से मैं
सीने से लगाकर नया कर दो मुझको

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Rishu Mridula Anand YESTERDAY AT 20:13

आदत नहीं है मेरी कि
मैं रूखा सूखा हो जाऊँ

मैं जब भी तोड़ना चाहता हूँ दर्द का कारोबार
क्यों हर बार मुझको ही बिखेर देता है कोई

आदत नहीं है मेरी कि
मैं तुम्हारे जैसा हो जाऊँ

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Rishu Mridula Anand 20 APR AT 22:50

प्रतिध्वनियाँ आती रहतीं हैं हमें
कुछ कहे अनकहे अश’आरों की

दृष्य घुमते ही रहते हैं आखों में
कुछ देखे अनदेखे नज़ारों की

शायरी राह है ख़ुद की तलाश में
ये हुनर रौनक़ नहीं है बाज़ारों की

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Rishu Mridula Anand 20 APR AT 18:51

आज फिर मेरे ख़ुदा याद आ रहे हैं,
अच्छा चलो कोई और बात करते हैं

आज वो सच में बहुत याद आ रहे हैं,
अच्छा चलो आज शायरी लिखते हैं

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Rishu Mridula Anand 20 APR AT 14:14

ग़लत आदमी को भी सही आदमी समझना चाह रही हूँ मैं
तुम मिलने क्यूँ नहीं आते हो कन्हैया देखो कराह रही हूँ मैं

अपने शहर में सबसे ख़ूबसूरत कहते थे पुराने लोग मुझको
छोटे और बड़े हरएक लड़के की अटकी हुई आह रही हूँ मैं

बेवजह बेफ़जूल सबकी बात मानती रही हूँ बचपन से ही
विवाहित हूँ बिना मुहब्बत का एक रिश्ता निबाह रही हूँ मैं

‘राधा की बात’

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Rishu Mridula Anand 20 APR AT 4:37

धर्म कौन सा अपनाऊँ मैं
किस मन्दिर, मस्जिद, गिरजा, गुरुद्वारे जाऊँ मैं

चलो हम माँ पिता के सामने सर झुकाते हैं
बाकी सब से प्यार, त्याग और क्षमा निभाते हैं
जिससे किया इश्क़ बस एक उसी से निभाते हैं

धर्म सारे बाद में निभाऊँगा
पहले मानव धर्म निभाऊँगा

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Rishu Mridula Anand 19 APR AT 18:22

एक बात चलते चलते दूर तक निकल गई है
शायरी अंदर से बाहर की ओर फिसल गई है

राज़ दुनिया के दबा बैठे हैं अपने दिल में हम
तमन्ना एक थी देखकर उनको फिसल गई है

रोता अकेला बैठकर वो अपने ख़ुदा के लिए
आँसू उसके देख चीख़ हमारी निकल गई है

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