Rakhi Shrma

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Rakhi Shrma (Rakhi sharma)

Tum meri pahli nazar ka pyar nhi ho Ye ishq mujhko tumse aahista aahista hua hai #rakhi

Top tags: yqbaba ishq rooh aagosh aankhe
कौन पूछता है साहब जब ज़िन्दगी ही हार गयी साथ चलते चलते 
नीम से कड़वे हो गए हैं आजकल लोगो के मिज़ाज़ मेरे लिए ।
#राखी

26 JUN AT 0:00

टूटी हुई चूड़ियां आखिर क्यों न रोती
सोचती है काश वो पत्थर की होती ।
#राखी

25 JUN AT 23:58

चंद सिक्के क्या खो गए मेरे
लगा वजूद ही खत्म हो गया ।
वाकिफ़ हुई जिंदगी हक़ीक़त से
पैसे पे ऐतबार गहरा हो गया ।
#राखी

25 JUN AT 23:58

टूट जाती हैं सांसें जिसकी किसी की उसको दरकार नही रहती
जिस्म से निकल जाती है रूह तो जिंदगी इख़्तियार में नही रहती ।
#राखी

22 JUN AT 20:26

मेरे पेचों ख़म में आकार उलझ जाते हैं वो
फिर ढूंढते रहते हैं रास्ता निकल जाने का
#राखी
पेचों ख़म- curly hairs

21 JUN AT 22:29

मेरे दिल से दिल को मिलाया उसने 
मुझको प्यार करना सिखाया उसने 

मैं तो हो गयी थी दीवानी प्यार में 
ये मुझे को खुद बताया उसने 

यूँ तो वो मेरा बन गया था फिर भी 
कभी कभी गैरों से मिल के सताया उसने 

हमेशा साथ रहने का वादा था लेकिन 
टूटता है वादा कैसे ये दिखाया उसने 

मैंने बहुत रोका मगर वो चला ही गया 
कभी न रोने वाली आँख को रुलाया उसने 

तकलीफ ज़रा न हुई और हम क़त्ल भी हो गए 
किस कमाल से खंज़र था चलाया उसने
#राखी

21 JUN AT 22:28

आंसू आते है आँखों में शराब समझ के पीती जाती हूँ 
इतनी बेबसी है की अज़ाब समझ के गुज़रती जाती हूँ

कैसा दर्द है ये दिल का दर्द ही मुझे चैन नही लेने देता
तेरे चेहरे को किताब समझ लफ्जों में उतरती जाती हूँ

यूँ तो कई बार मैंने कोशिश की पर हर बार नाकाम रही
तुझे नहीं भूलती बाकि हर एक शै भूलती जाती हूँ

लाख ज़माना कहे तू गैर है फिर भी तेरी तलबगार हूँ मैं
प्यास जो मिटती नही पास होते हुए सराबोर होती जाती हूँ 

नशीली हो जाती हूँ मैं कुछ कुछ शराब की तरह साहिब
कतरा कतरा बिखरता है लहू पानी बनकर रिसती जाती हूँ

गम नही मुझे प्यार में दूरी का मैं तो इश्क़ में तेरे हयात हूँ 
तू याद मत आ क्योंकि मैं याद की आग में तपती जाती हूँ
#राखी

21 JUN AT 22:26

अक्सर मैंने ख्वाबों को हकीकत 
में तब्दील होते देखा है
पर तुम वो हक़ीक़त हो जो ख्वाब बनकर 
आंखों में चुभती है
इल्म नही था कि बेज़ारी का ये आलम
जीना दुश्वार कर देगा
वाकिफ़ हूँ रिश्तों के टूटने का दर्द 
बेहद दर्दनाक होता है 
पर जहां कोई रिश्ता ही न वो वहां भी टूटने का 
अहसास क्यों बेचैन करता है
आखिर कब तक खामोशियों की ये बेड़ियाँ
जकड़े रहेंगी दामन 
वास्ता नही है माज़ी से कोई पर क्यों 
ये सदायें डराती हैं 
नसीब को दोष देना आसान था पर पहलू में
बैठना गंवारा न था
सिसकियाँ जो दबा रखी थी आखिर कब तक 
न आह बन के निकलती
कोई तो बहाना चाहिये था भरे दिल को 
भी खाली होने का
बस फिर रो लिए कहीं तो सुकून सेे दो पल
नसीब में लिख डाले
रेत के महल बनाकर तहस नहस कर डाले आखिर
दीवानेपन का जावाल था ।
बसाये नही घर खानाबदोश जिंदगी में
सिर्फ तेरी खुशी का ख्याल था ।
#राखी

21 JUN AT 22:22

मेरी आँखों में ख्वाबों  की कमी तो कभी नही थी  मुक्कम्मल ख्वाब वो था जिसमे तुम मुझसे मिले थे ।
#राखी

21 JUN AT 22:20

ये एक परिपक्व
प्रेम की परिभाषा है 
उन्हें जब सोचते हैं 
चुप्पी की सीमा में 
बिखर सी जाती है जिंदगी 
जैसे किसी मृगतृष्णा
के मद में अंधा हिरण 
बिखर कर भी जीता है वो 
खुशबू का अहसास जिस से
वो कभी मुक्त नही हो सकता
और कस्तूरी पाने की लालसा 
उससे चैन से बैठने भी नही देती ।
वो प्रयत्नशील रहता है कि कैसे 
वो उस फूल को खोज ले जिसकी 
खुशबू उसे मदमस्त कर रही है ।
और शायद मरते दम तक ये तकलीफ 
उसके साथ रहती है कि उसे मिली नही
 वो खुशबू ढूंढने से ।
#राखी

21 JUN AT 22:19