Prashant Praniti   (आनंद ✍️)
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Joined 25 February 2018


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16 JAN AT 20:13

जिसे देखो वही बस मन्नतों के धागे में उलझा हुआ है
हमने तो अपनी साँसों की डोर उसकी धड़कनों में बांधकर सारा क़िस्सा ही ख़त्म कर दिया है !

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9 JAN AT 14:03

हमे कहाँ मालूम था अपने नाम का मतलब,
कि तुमने इस "आ" को अपने "न" से जोड़कर हमारी आन को हवा दे दी !

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6 JAN AT 20:54

मैं तुझे देखकर
बड़ी आसानी से अपनी




में लिख लेता हूँ
पता है क्यों क्योंकि





के हर पन्ने पर तेरे नाम
की स्याही ज़रूरी है
ज़िंदा रहने के लिए इसलिए
तो हर जंग बड़ी आसानी से
जीत लेता हूँ !

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4 JAN AT 20:12

अपनेपन का शोर नहीं मचाता मैं अपना हूँ यही हर बार बताता हूँ,
सुन लेता हूँ जब कोई कहे बुरे हो तुम फिर मैं भी ख़ामोश रहकर हर बात कह जाता हूँ !

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2 JAN AT 19:33

मैं तुझमे कुछ यूँ गुम हो गया हूँ,
के मैं अब मैं नहीं रहा तुम हो गया हूँ !

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26 DEC 2020 AT 20:50

जो थक हारकर बैठ जाऊँ तो बाकी ही क्या रहा,
मैं जब तलक ज़िंदा रहा तेरी ही मोहब्बत में रहा !

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24 DEC 2020 AT 16:49

झकझोर कर रख देती हैं लाख मनाने से रहीं,
ये उदासियाँ भी देखो हर बार मुझे हराने में रहीं !

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22 DEC 2020 AT 21:47

दूरी जरा भी महसूस नहीं होती इतने पास हैं हम,
एक दूसरे के हसीन ख़्वाब ख्यालात एहसास हैं हम !

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21 DEC 2020 AT 20:38

भीगे पड़े हैं दो बदन जैसे बारिश टप टप बरस रही है,
कुछ यूँ चढ़ी एक दूजे पर मोहब्बत की गर्मी उतारे नहीं उतर रही है !

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20 DEC 2020 AT 20:44

ठंड कितनी ही क्यों न हो पता नहीं चलती,
कुछ यूँ चढ़ी तेरे एहसासों की गर्मी अब उतारे नहीं उतरती !

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