Palkesh Soni   (Palkesh)
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Wordsmith✍❣
Insta:- thepalkeshsoni
Joined 7 June 2018


Wordsmith✍❣
Insta:- thepalkeshsoni
Joined 7 June 2018
Palkesh Soni 11 JUL AT 0:56

मैनें फक़त गुनगुनाए थे,चंद मिस़रे तेरी यादों के बाग़ों में,
ज़ालिम शाखों ने फूलों में ये रंग छेड़ दिया!

चले ही थे साथ कुछ लम्हात के लिए,
अफ़वाह होगयी भंवरे ने तितली को छेड़ दिया!

हक़ीकत ही तो है जो लिखा है,तुम ही बताओ
तुमको चांद कह दिया तो क्या तुमको छेड़ दिया?

एक तेरा नाम ही तो लिखा था,आखरी पन्ने पर किताब के
कोई जायदाद के काग़ज़ात थे नहीं जिसको हमने छेड़ दिया!

हंगामा तो तब होगया बड़ा ज़ोर से मुहल्ले में,
मामला जब ये मास्टरजी ने घर में छेड़ दिया!

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Palkesh Soni 29 JUN AT 19:18

स्मृतिशेष!

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Palkesh Soni 26 JUN AT 19:46

मौसम का गुरूर तो देखो,
जैसे तुमसे मिलकर आया हो...⛈

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Palkesh Soni 22 JUN AT 15:14

Read full poem in caption..


पर मैंने तो सुना है
प्रेम श्रृंगार है!
वसंत-कारक है!

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Palkesh Soni 26 MAY AT 19:55

कहते हैं चुरा लो चांद को,
अभी मेरा ईमान बाक़ी है।
ये क्या चले और थक गए,
अभी तो पूरा इम्तिहान बाक़ी है।
कलम छीनकर क्या गज़ब कर दोगे?
अभी मेरे मुंह में ज़ुबान बाक़ी है।
यह तो खाली खेल था,जो चलता आया,
अभी करतब-ऐ-जंग-ऐ-मैदान बाक़ी है।
सिर्फ एक तितली को देख मचल उठे,
अभी तो पूरा गुलिस्तान बाक़ी है।
धड़कनें रुकने से कोई थोड़े ही मरता है,
होंसला है मतलब अभी जान बाक़ी है।
मंजिलों,ठोकरों, मील के पत्थरों,
अभी मेरी उड़ान बाक़ी है,
अभी मेरी उड़ान बाक़ी है...!!!

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Palkesh Soni 19 MAY AT 18:54

रोज़ आधी मांगने पर भी पूरी रोटी रख देती है,
मां तारीखें देखकर प्यार नहीं करती!

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Palkesh Soni 18 APR AT 11:56

आरज़ू बचपन से थी, चांद से मुलाक़ात की,
और फिर हुआ यूं,हम आपसे टकरा गए!😍

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Palkesh Soni 3 APR AT 10:57

चाँद को आसमान से धक्का दे,
जमीन पर कुछ ग़ुलाब खीला देती है,
रोज़ सुबह, सूरज के संग ये साज़िश रचती है!

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Palkesh Soni 30 MAR AT 23:07

आज चांद इतरा बहुत रहा है,
ज़रूर तुमने अपने जैसा कहा होगा!

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Palkesh Soni 28 MAR AT 23:47

जो लगता है तुम्हे चन्द अल्फ़ाज़ों का मेला,
मेरे ख़्वाबों की मूकम्मल दास्तां है ये!

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