Nandkishor Patel   (NANDKISHOR PATEL)
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Joined 7 December 2017


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Joined 7 December 2017
Nandkishor Patel 12 JAN AT 10:49

ये जाती-धर्म की आंधी अब कुछ मंद हो जाए,
घटित हो कुछ यहां ऐसा कि फिर आनंद हो जाए,
मिटे सब वैर मन का और मधुर संबंध हो जाए,
मेरा-तेरा तेरा-मेरा यहां सब बन्द हो जाए,
हे वीणावादनी कुछ शब्द दो ऐसे
कि नन्दन की कविता छंद हो जाए,
काश ये मेरा मुक़म्मल बंध हो जाए,
कुछ कृपा करो ऐसी मेरे भगवन, मेरे अल्लाह, मेरे दाता..
की हर युवा सभल करके विवेकानंद हो जाए,
हाँ... हर युवा सभल करके विवेकानंद हो जाए।।
✍ NANDAN

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Nandkishor Patel 31 DEC 2018 AT 11:50

राजनीति में धर्म एक बड़ा मुद्दा है,
इसीलिए कहते हैं राजनीति में सब गन्दा है,
यहां धर्म ही सबसे बड़ा धन्धा हैं,
अनपढ़-गरीबों को छोड़ो साहब!!!..
यहां तो पढ़ा-लिखा ही सबसे बड़ा अंधा है!!!
✍ NANDAN

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Nandkishor Patel 20 DEC 2018 AT 20:01

जहां सेवक नहीं सुनता राजा की...
हम उस राजदरबार जैसे हैं,
जो गालियों से हो शुरू...
नेताओं के उस सत्कार जैसे हैं,
कोई मुनाफ़ा है नहीं जिसमे...
हम उस व्यापार जैसे हैं,
जो देती हैं झाड़ू और बेलन...
हम उस पत्नि के प्यार जैसे हैं,
चलाना है मगर डीजल नहीं जिसमे...
हम उस कार जैसे हैं,
गवर्नर के यहां बन्धक मगर सरकार जैसे हैं....
गवर्नर के यहां बन्धक मगर सरकार जैसे हैं।।
✍NANDAN

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Nandkishor Patel 3 DEC 2018 AT 17:01

मैंने कुछ शख़्स ऐसे भी देखे हैं,
जो उन्हें पसन्द न थे मुझमें,
उन्हें हँसाने मैने,
हर वो ख़्वाब तोड़ कर फैंके हैं,

शायद! उन्हें मेरी आदतों से नहीं...मुझसे बैर है,
वो तो हर बार अहसास कराते रहे..
हम ही न समझे की हम उनके लिये कल भी गैर थे...आज भी गैर हैं....
✍NANDAN

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Nandkishor Patel 9 NOV 2018 AT 9:06

लाख करोड़ो में मेरी बहना है,
तेरा जाना-मेरा आना, तेरा कहना-मेरा सहना,
तेरा रूठना और मेरा मनाना,
जिंदगी भर यूँ ही चलते रहना है...
भाईदूज पे बस इतना कहना है,
लाख करोड़ो में मेरी बहना है।।
दुनिया के इन मेलों में न हमको बिछड़ना है,
तेरी हर जिद सदा मुझको..पूरी करना है,
मेरी हर साँस पे हक़ है तेरा बहना,
हमें तो रोज यूँ ही लड़ना-झगड़ना है,
तेरी नादानियों से मुझे यूँ ही तंग रहना है,
हर सुख-दुःख में बस इतना कहना है,
हमें तो जिंदगी भर संग रहना है....
भाईदूज पे बस इतना कहना है,
लाख करोड़ो में मेरी बहना है,
✍नन्दन

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Nandkishor Patel 7 NOV 2018 AT 0:07

कुछ वफ़ादारी वतन से भी निभा लेना,
इस बार दीये माटी के जला देना।।

देकर के उसे पैसे इक गोली के..
न सरहद पे लहू सैनिक का बहा देना,
किसी कुम्हार के घर का दिया तुम न बुझा देना,
जन्मे और खेले हो जिस माटी में
तुम समझ कर कर्ज ही चूका देना,

कुछ वफ़ादारी वतन से भी निभा लेना,
इस बार दीये माटी के जला देना।।
✍NANDAN

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Nandkishor Patel 31 OCT 2018 AT 19:06

हम यूँ सयुंक्त और ख़ुश न होते,
अगर सभी को साथ मिलाने लौह पुरूष न होते ।।

अंग्रेजों से मुक्ति पाकर भी हम आजाद नहीं हो पाते,
हम एम.पी. से यू.पी. जाने को
गुजरात पुनः फिर आने को बीजा मांग रहे होते ।।

हम यूँ सयुंक्त और ख़ुश न होते,
अगर सभी को साथ मिलाने लौह पुरूष न होते ।।
✍NANDAN

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Nandkishor Patel 28 OCT 2018 AT 19:07

रहूँगा चुप सदा यूँ ही इरादा करके आया हूँ,
लो मैं लौट आया हूँ, लो मैं लौट आया हूँ,

तुम्हें अब दुःख न होगा कभी मुझसे मैं ये वादा करके आया हूँ,
अपना सजोयें फिर अकेलापन ले के आया हूँ,
रहूंगा सदा ही पास में तेरे ये मै उनसे कह कें आया हूँ,
रुलाती थी उन्हें जो भी वो सारी बलायें ले के आया हूँ,
देने को नही था पास कुछ मेरे..मै बस उन्हें दिल से दुआएँ दे के आया हूँ,

रहूँगा चुप सदा यूँ ही इरादा करके आया हूँ,
लो मैं लौट आया हूँ, लो मैं लौट आया हूँ,
✍NANDAN

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Nandkishor Patel 16 OCT 2018 AT 19:10

स्वयं कृष्ण देख रहे...कुछ तो शर्म कीजिए,
फ़ैशन के नाम पे न यूँ जिश्म नग्न कीजिए,
हरि ने जो दिया वो चीर याद कीजिये,
तब हुई थी जो भाई को वो पीर याद कीजिये,
कान्हा के जैसा भाई लज्जित न रहें,
आँख में लज्जा का थोडा तो नीर रहने दीजिये,
तन ढका रहे नारीत्व बचा रहे....
तन पे इतना चीर रहने दीजिये।

स्वयं कृष्ण देख रहे...कुछ तो शर्म कीजिए,
फ़ैशन के नाम पे न यूँ जिश्म नग्न कीजिए,
✍Nandan

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Nandkishor Patel 4 SEP 2018 AT 20:12

गुरु कबहुँ ज्ञान अधूरो देत नहीं,
कबहुँ बिन गुरु ज्ञानी कोऊ होत नहीं।।
HAPPY Teacher's day
✍Nandan

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