jaan veer   (Meghna)
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Joined 25 April 2019


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jaan veer 24 SEP AT 18:11

वो हमारी गली में आया और गैरो से मिलकर निकल गया
मै उसके दीदार के खातिर दरवाजे पर ही खङा रह गया

मै रूहासी आँखो से अन्दर की ओर बढता चलता गया
मगर मेरा साया उसके इंतजार में दहलीज पर ही रह गया

सुबह पता चला वो आया मगर मुझे सोये देख दबे पाँव लौट गया
और मै बेखबर रात के आँगन में उसे सपनों में ही ढूढता रह गया

उसके निशां देखकर मैं हर गली चौबारे से पूछता चला गया
मगर न जाने वो किस जहां मे गया ना कोई पता रह गया

मैं उसको तलाशते तलाशते इतनी दूर तलक पहुंच गया
पलटकर देखा तो जमाना बहुत पीछे रह गया

उसके इश्क में मैं रंगीनियों से उजड़े हुए कस्बे में बदल गया
अपने अन्दर के जिस शख्स को मै जानता था ना जाने वो कहाँ रह गया




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jaan veer 23 SEP AT 11:05

जुबां की पैनी
तासीर से मुझे उस वक्त कैसा लगा
तुम्हे कोई तुम सा मिले फिर
मै कहूँ बस मुझे भी ऐसा ही लगा

तुम्हें वो दिल्लगी वो ताल्लुकात
सब वक्त गुजारने का जरिया लगा
मुझ खुश्क नदी को तो वो
आब-ए-रवाँ का दरिया लगा

मेरी कराहटें मेरी खून से सनी
आँखे तुम्हे सब मजाक लगा
कभी मेरा दिल अपने सीने में
रखकर देखो तो अहसास हो
वो सब मैने कैसे सहा होगा
उस दर्द से मुनासिब तो मुझे मरना लगा


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jaan veer 21 SEP AT 19:38

दिल पर क्या गुजरती है जब कोई इश्क ठुकराकर जाता है
हम आज से अजनबी ठहरे जब वो ये कहकर चला जाता है

जो मिलकर भी जिन्दगी में कभी नहीं मिल पाता है
बस उसी का जिक्र गजलों और शायरियों में रह जाता है

जिसकी खातिर रह रहकर आँखो से कतरा निकल आता है
बदकिस्मती तो देखो वो बेखबर कभी हाल पूछने भी नही आता है

उस बेहतरीन को हर मोङ पर कोई ना कोई चाहने वाला मिल जाता है
मगर वो अक्सर कहता है मुझे कोई उस सा क्यो नहीं मिल पाता है

वो मेरी मोहब्बत का तमाशा बनाकर खूब मुसकुराता है
शुक्र है खुदा का मेरी वजह से उसका चेहरा तो खिलखिलाता है

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jaan veer 20 SEP AT 19:20

क्यू बार बार अतीत के साये में लिपटती ही जाती हूँ
जिसका अक्श जहन से मिटाना है रह रहकर उसी को याद करती हूँ

जिसको गए मुद्दतो हुए ,चलो अब उसको भूल जाती हूँ
मगर ये कैसे मुमकिन होगा अपने दिल से सवाल करती हूँ

मै किसी भी शहर ,किसी भी दीवार ओ दर जाती हूँ
मै बैचैन होकर हर तरफ उसको तलाश करती हूँ

वो मोहन तो नहीं फिर क्यू मै राधा सी बावली हो जाती हूँ
जो मेरा हो नही सकता क्यू फिर भी मै मोहब्बत उसे बेशुमार करती हूँ

जब लकीरों में उसे ढूंढ ढूंढ कर थक हार जाती हूँ
मैं खुदा के आगे रो रोकर तकदीर बदलने की फरियाद करती हूँ

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jaan veer 19 SEP AT 16:24

वो कसमे वादे करने वाला आज तेरे साथ खङा क्यो नहीं
अगर मोहब्बत थी तुमसे तो तुम्हारे लिए वो जमाने से लङा क्यो नहीं

खुदा के आगे तुम्हे पाने की खातिर वो झुका क्यो नहीं
वो जान दाव पर रखने की बात कहने वाला तुम्हे मुश्किल में देख रुका क्यो नहीं

तुम्हें रोता छोड़कर जाने पर उसका दिल पसीजा क्यो नहीं
वो नमाजे पढकर अल्लाह को राजी रखने वाला अपनी दीवानी को मनाता क्यो नहीं

आखिर कमी कहाँ रही, मेरी आशिकी को वो अपनाता क्यो नहीं
वो माँ बाप की मोहब्बत की कदर करने वाला मेरा इश्क समझता क्यो नहीं

दुनिया जहान में सबको प्यार मिल जाता है कहीं ना कहीं
फिर आखिर मेरे ही नसीब में कोई चाहने वाला क्यो नहीं

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jaan veer 18 SEP AT 16:45

खुदा ने जैसा तराशा है उस वजूद को आखिर मिटाऊं कैसे
जो मैं नहीं हूँ फिर वैसी शख्सियत बनकर दिखाऊँ कैसे

चाहे कितना भी संवारू खुद को मगर तेरे मुताबिक नजर आऊं कैसे
जब मेरी रगों में ही सादगी है तो तुझे अलबेली बनकर दिखाऊँ कैसे

हर बार तेरी कसौटी पर खरी उतरकर बताऊँ कैसे
हम मंझे हुए खिलाड़ी तो नहीं है फिर हर इम्तिहान में बाजी मारकर दिखाऊँ कैसे

ना जाने दुनिया को भुलने का लाजबाब हुनर आया कैसे
हम तो परिंदो को भी याद रखते है तो इंसान को भुलाने का ख्याल जहन में लाऊं भी कैसै

जमाने ने आखिर नफरत करने का सलीका सीखा कैसे
मुझे सिर्फ मोहब्बत ही करना आता है तो किसी को पत्थर दिल बनकर दिखाऊँ कैसे

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jaan veer 10 SEP AT 19:09

क्या हिन्दु क्या मुसलमान है,हर शख्स एक इंसान है
जिसने तुम्हें बनाया वो भी उस खुदा की ही संतान है

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jaan veer 10 SEP AT 19:01

कहने को तो हिन्दुस्तान में तेजी से विकास हो रहा है
मगर गरीब तो और भी ज्यादा गरीब हो रहा है

कहने को तो महिलाओं की दशा में सुधार हो रहा है
मगर बलात्कार तो फिर भी आये दिन हो रहा है

कहने को तो समाज रूढियों को तोड़ आगे बढ रहा है
मगर बेटी और बेटे में भेद कहा खत्म हो रहा है

कहने को तो देश गांधी और नेहरू के कदमों पर चल रहा है
मगर भष्ट्राचार तो कम ही नहीं हो रहा है

कहने को तो आज आजादी को एक अरसा हो रहा है
मगर हिन्दु मुस्लिम की घटिया सोच से हर रोज दंगा हो रहा है

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jaan veer 10 SEP AT 18:21

कहने को तो, साथ में सारा जहान है
मगर हर शख्स अन्दर ही अन्दर तन्हाइयों से परेशान है

बोलने को तो हर इंसान के पास मीठी जुबान है
मगर हर शख्स दो लब्ज प्यार से सुनने को परेशान है






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jaan veer 9 SEP AT 20:48

सब कहते है मौत बहुत दर्दनाक होती है
मैं कहती हूँ मौत तो दो पल में आ जाती है तकलीफें तो जिंदगी ताउम्र देती है

सब कहते है मोहब्बत कुदरत का तोहफा होती है
मैं कहती हूँ खुदा के दिये तोहफों से कभी बेवफाई नहीं मिलती है

सब कहते है जिनका नसीब में मुकम्मल होना लिखा हो
ख्वाहिशे वहीं पूरी होती है
मैं कहती हूँ कोशिश हद से ज्यादा हो तो तकदीर भी बदलती है

सब कहते है दुनिया सिर्फ और सिर्फ स्वार्थी होती है
मैं कहती हूँ तुम अपने जहन से मतलब दूर कर के देखो
दुनिया आज भी मोहब्बत के लिए तरसती है

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