Indu Singh

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हदों में रहने वाले सरहदों की हदों से हैरान 
हद फिर भी मिटती नहीं सरहदों की हदों पर !!!

4 OCT AT 22:49

जो जितना बर्दाश्त करता है वो बस बर्दाश्त ही करता जाता है फिर चाहे वो स्त्री हो या पुरुष। 
बर्दाश्त की सीमा पार हो जाने पर भी वो आवाज़ नही उठा पाता है अक्सर.....
और अगर कभी वो चिल्लाता है तो भी आदतन अपने ही अंदर !!!!

28 SEP AT 10:26

इक कहानी बनेगी तेरी ये मुस्कुराहट
कि देखकर इसे जी जाने को जी चाहता है ।

25 SEP AT 8:32

सबसे क़रीबी रिश्ते हमेशा नक़ाब में ही रहते हैं।
नक़ाब उठता नहीं इसलिए कुछ दिखता नहीं।
माता पिता बच्चों को कभी ये हकीकत नहीं बताते कि असल तो नक़ाब में बंद है।परिणाम ये कि सभी एक भ्रम को सच समझ जीते चले जाते हैं। दूर का तो बच्चे भी अपने अनुभव से सीखते जाते हैं लेकिन इतने पास का नहीं सोच पाते क्योंकि नक़ाब कभी हटता ही नहीं और अगर बच्चा कुछ सोचे भी तो माता पिता की दी गई सीख के आगे वो चुप ही रहता है। जिस दिन नक़ाब ज़रा भी हटता है वो बच्चा बिखर जाता है क्योंकि इतना भयानक उसने कभी कुछ नहीं देखा होता है। 
माता पिता को अपने बच्चों को बचपन से ही नक़ाब के पीछे की सच्चाई भी अवश्य बतानी चाहिए। दुनिया अच्छी है या बुरी आपको सब पता है लेकिन आपके सबसे क़रीबी का चेहरा ही आप ने नहीं देखा !!!

9 SEP AT 7:49

घोर एकांत में ही बजता है घोर कोलाहल...!

8 SEP AT 11:36

सफ़ेदपोशों से कौन बचाएगा, हैं फैले ज़माने में बहुत 
कि हर साफ़ रंग चौंकाएगा सभी को ज़माने में बहुत।

30 AUG AT 17:40

ख़यालों ने की है तेरी गुज़ारिश
इक लम्हे के लिए ख़याल बन जाओ 
हर ख़याल पे हो बस तेरी ही दस्तक 
बेख़याली में भी तुम्ही याद आओ।

23 AUG AT 20:53

शीशे की तरह दिल भी चिटकता है 
फिर टूटता है 
फ़र्क ! एक में आवाज़ 
दूजा ख़ामोशी पिरोता है।

9 AUG AT 10:39

किस-किस का बहिष्कार या तिरस्कार करेंगे। झींगुरों की बढ़ोत्तरी की गति को रोका नहीं जा सकता। झींगुर मुक्त घर में भी कुछ समय बाद एक आध झींगुर नज़र आ ही जाता है। दिन के उजाले में शांत रहने वाले झींगुर दूसरों की रातें ख़राब करते हैं। झींगुरों का अस्तित्व है तो कुछ भी नहीं फिर भी ये घरों में संक्रमण फैला देते हैं। समय-समय पर पेस्ट कंट्रोल (पीड़क नियन्त्रण)  करवाना अति आवश्यक है ।

# अभिधा ही लिखती हूँ,अभिधा ही पढ़ें ☺

4 AUG AT 17:39

यथार्थ और भ्रम !
जुड़वाँ भाई हैं दोनों। एक दूजे के बिना रह नहीं सकते। जब भी भ्रम, भ्रमित करता है यथार्थ अपनी यथार्थता दिखाता है और जब भी यथार्थ रूबरू होता है, भ्रम उसे भ्रमित कर देता है. सभी जीते हैं इन दोनों के साथ शक्कर लिपटी इमली की तरह । खट्टी भी तेज और मीठी भी तेज।
यथार्थ और भ्रम क्या खूब जोड़ी रची है रचनाकार ने जो यथार्थ दे नहीं सकता कभी, भ्रम सर्वथा दे देता है और जो भ्रम दे सकता है सदा, यथार्थ देने नहीं देता……
कभी यथार्थ कभी भ्रम
कभी ख़ुशी कभी ग़म………!!!

31 JUL AT 8:47