Indu Singh

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शीशे की तरह दिल भी चिटकता है 
फिर टूटता है 
फ़र्क ! एक में आवाज़ 
दूजा ख़ामोशी पिरोता है।

9 AUG AT 10:39

किस-किस का बहिष्कार या तिरस्कार करेंगे। झींगुरों की बढ़ोत्तरी की गति को रोका नहीं जा सकता। झींगुर मुक्त घर में भी कुछ समय बाद एक आध झींगुर नज़र आ ही जाता है। दिन के उजाले में शांत रहने वाले झींगुर दूसरों की रातें ख़राब करते हैं। झींगुरों का अस्तित्व है तो कुछ भी नहीं फिर भी ये घरों में संक्रमण फैला देते हैं। समय-समय पर पेस्ट कंट्रोल (पीड़क नियन्त्रण)  करवाना अति आवश्यक है ।

# अभिधा ही लिखती हूँ,अभिधा ही पढ़ें ☺

4 AUG AT 17:39

यथार्थ और भ्रम !
जुड़वाँ भाई हैं दोनों। एक दूजे के बिना रह नहीं सकते। जब भी भ्रम, भ्रमित करता है यथार्थ अपनी यथार्थता दिखाता है और जब भी यथार्थ रूबरू होता है, भ्रम उसे भ्रमित कर देता है. सभी जीते हैं इन दोनों के साथ शक्कर लिपटी इमली की तरह । खट्टी भी तेज और मीठी भी तेज।
यथार्थ और भ्रम क्या खूब जोड़ी रची है रचनाकार ने जो यथार्थ दे नहीं सकता कभी, भ्रम सर्वथा दे देता है और जो भ्रम दे सकता है सदा, यथार्थ देने नहीं देता……
कभी यथार्थ कभी भ्रम
कभी ख़ुशी कभी ग़म………!!!

31 JUL AT 8:47

तुम अभिधा ही बने रहे
वो व्यंजना बने रहे
लक्षणा तक का सफ़र
न कोई तय कर सका।

28 JUL AT 7:21

तुम्हारा आना भी ऐसा कि बस तुम ही तुम ।
तुम्हारा जाना भी ऐसा कि बस तुम ही तुम ।।

26 JUL AT 17:26

मशीनी युग है ज़ाहिर है लोग भी मशीनी ही होंगें 
बड़ी शिद्दत से ये बात समझ आ चुकी है। 
दिक्कत ये कि खुद को मशीन होने से
कैसे बचाऊँ और क्योँ बचाऊँ के बीच 
एक गहरी झड़प जारी है 
जो मशीन न बनाया खुद को 
तो चलना दूभर है एक भी कदम 
जो मशीन बना लिया खुद को 
तो फिर जीना नामुमकिन !!!

15 JUL AT 19:40

कहते हैं कि सब तय है लेकिन 
क्या सच में सब तय है ?
तय न हो सका आज तक रात-दिन का फ़ासला 
फिर दोपहर क्यों ज़रूरी है ज़ख्म उकेरने को 
तय तो ये था कि  कुछ भी तय न रहेगा कभी 
फिर हर घटना तय थी क्यों कहा किसी ने !!!

6 JUL AT 7:41

ज़िंदगी कोई किताब नहीं एक यात्रा है।सब अपनी- अपनी क्षमता के अनुसार इसे कर रहे।किसी का भी सफ़र आसान नहीं लेकिन किसी का सफ़र मुश्किल ज़रूर है ।अपनों को खोने की तकलीफ़ कभी नहीं बयाँ की जा सकती।चलना होता है फिर भी मुस्कुराते हए !!!

4 JUL AT 7:31

काश ! इक रोज़ ऐसा हो जाए 
याद से मेरी तू बेचैन हो जाए...
जब सुनने की जिद मैं न करूँ 
सुनाने को तू... बेचैन हो जाए....

10 JUN AT 17:50