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Indu Singh 22 JAN AT 11:42

हर साँझ के बाद सवेरा होता है
कहते हैं सब !
क्या भूल जाते हैं, कि रात आती है
फिर सवेरा होता है।

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Indu Singh 21 JAN AT 16:46

जब दो लोगों के विचार आपस में न मिलें तो बातचीत से मतभेद बढ़ता ही है, बेहतर यही कि एक चुप रहे !

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Indu Singh 16 JAN AT 22:46

तन्हाई पसंद हूँ तन्हा ही रहने दो
मुझे मेरी वीरानी में मुझसा रहने दो
चाह बस यही न पुकारे अब कोई
जिस हाल में भी हूँ मुझे ज़िंदा रहने दो !!

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Indu Singh 26 SEP 2018 AT 21:49

ख़त नहीं आते अब
अतीत हो गए हैं पोस्टकार्ड और
अंतर्देशीय पत्र
पोस्टकार्ड सी खुली सीधी ज़िंदगी
उलझ चुकी है अनेक मोड़ों से
कहीं से झाँकने की
गुंजाइश भी नहीं।
ख़त, नहीं आते अब
अतीत हो गए हैं !

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Indu Singh 24 SEP 2018 AT 7:51

बनावटी फूल
बनावटी रिश्तों से
कहीं अच्छे होते हैं
क्योंकि उनसे
खुशबू न सही
दुर्गन्ध तो नहीं आती है।

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Indu Singh 28 AUG 2018 AT 7:29

न मिल कर सुकूँ न दूर जाकर ही
इससे तो बेहतर था बस ख़यालों में मिलना।

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Indu Singh 19 JUN 2018 AT 22:07

क्यों अहसास भर तुम्हारा
लबों पे फ़ैल जाता है
और पलकें
उठती नहीं फिर....!

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Indu Singh 13 FEB 2018 AT 21:01

अबकी बार जो उठा फिर न गिरेगा
बिखरे हुए रिश्तों जी भर के देख लो उसे।

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Indu Singh 10 FEB 2018 AT 14:53

आजकल चुप-चुप सा रहता है
वक़्त है !
कब तलक शोर करेगा।

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Indu Singh 8 FEB 2018 AT 12:54

रखूँ इत्तफ़ाक हर बात से ज़रूरी तो नहीं
कुछ ख़याल हमारे भी बिखरे हैं फ़िज़ा में।

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