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Harsh Tyagi Kalpit (©हर्ष त्यागी 'कल्पित')

Harsh Tyagi Kalpit 6 JAN AT 11:49

सब जानकर भी अगर अनजान हूँ।
समझ लो फिर कितना परेशान हूँ।
और खुद को देखकर भी हैरान हूँ।
जिसे बंटवारे और झूठ से नफरत थी।
क्या आज 'कल्पित' मैं वहीं इंसान हूँ।

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Harsh Tyagi Kalpit 10 DEC 2018 AT 23:15


पहली बार तेरी दुनिया से बाहर निकला
ऐसा लगा जैसे दशकों से कुछ देखा ही ना हो
कुछ पुराने लोगों को ढूंढने निकला
ऐसा लगा जैसे उनसे कभी मिला ही ना हो
फिर किसी से पूछा तो पता चला
कुछ लोग मुझे भी ढूंढने आये थे एक दौर में
वो दौर जब मैं सिर्फ तेरी दुनिया में जीता था
उन्हें भी पुराना 'कल्पित' नहीं मिला था
तेरी दुनिया मे रहना का है ये सिला
ना वो मिले, ना तू मिला
सब छोड़ मेरे यार
तू दो घूंट और पिला

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Harsh Tyagi Kalpit 8 DEC 2018 AT 20:56

हिम्मत तो थी उसमें
जब मेरा हाथ छोड़
किसी और का हाथ थामा था
बस और एक हिम्मत कर देना
जब सामने आओ कभी
तो नज़र मत चुराना
क्योंकि मुझे उन नज़रों को देखना हैं
जिन्होंने कभी मुझसे भी एक वादा किया था

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Harsh Tyagi Kalpit 8 DEC 2018 AT 19:12


अब अगर तेरे पास वापस आया।
तो इस दिल के साथ ना इंसाफी होगी।
जो गैरों के साथ देख कर ।
फिर भी धड़क रहा हैं।

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Harsh Tyagi Kalpit 8 DEC 2018 AT 17:48

जो देखना नहीं था, वो भी देख लिया
उसके बाद भी धड़क रहा है तू
'ए दिल' बड़ा होंसला है तुझ में

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Harsh Tyagi Kalpit 7 DEC 2018 AT 11:45

जहाँ फर्क ना पड़े ।
वहाँ फिक्र करनी छोड़ दो।

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Harsh Tyagi Kalpit 7 DEC 2018 AT 11:33

आज का दिन खास है
लेकिन ना मैं उसके पास हूँ
ना वो मेरे पास है

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Harsh Tyagi Kalpit 6 DEC 2018 AT 22:54

किसी ने कहा भूल जा उसे
अगर भूलना मुश्किल है
तो किसी का सहारा लीजिए
वो सिर्फ इतना जानते है
कि उसे भूलना मुश्किल है
लेकिन उसे भूलने के लिए
किसी का सहारा लेकर बाद में छोड़ देना
'कल्पित' की फितरत में नहीं

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Harsh Tyagi Kalpit 6 DEC 2018 AT 21:11

कुछ रास्तों से अनजान था।
चलना तुम ने सिखाया, ये कह कर।
मंज़िल तक साथ चलेंगें।
रफ्तार 'कल्पित' की धीमी क्या हुई?
बीच रास्ते में तुम ने साथी बदल दिया।
रफ्तार धीमी होने की वजह सिर्फ इतनी थी।
मुझे तेरे पैरो के निशान पर चलना था।
अगर अपनी रफ्तार में चलता।
तो तेरा साथ छूट जाता।
अब अफ़सोस है जब साथ छूटना ही था।
तो रफ्तार क्यो नहीं पकड़ी ?

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Harsh Tyagi Kalpit 6 DEC 2018 AT 18:24

मुश्किल है ये रात गुजरना
रात के साथ हम गुज़र जाए तो क्या?

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